ED vs TMC Supreme Court Hearing : ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका : ED अफसरों पर दर्ज FIR पर लगी रोक, कोर्ट ने पूछा- क्या अदालत को जंतर-मंतर बना दिया?
ED vs TMC Supreme Court Hearing : पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानूनी लड़ाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तगड़ा झटका लग गया है, सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आई-पैक दफ्तर में हुई छापेमारी के बाद ईडी अधिकारियों पर दर्ज कराइ गई एफआईआर पर रोक लगा दी है

ED vs TMC Supreme Court Hearing : ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका : ED अफसरों पर दर्ज FIR पर लगी रोक, कोर्ट ने पूछा- क्या अदालत को जंतर-मंतर बना दिया?
ED vs TMC Supreme Court Hearing : नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानूनी लड़ाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को तगड़ा झटका लग गया है, सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के आई-पैक दफ्तर में हुई छापेमारी के बाद ईडी अधिकारियों पर दर्ज कराइ गई एफआईआर पर रोक लगा दी है, कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है की किसी भी केंद्रीय एजेंसी की जांच में इस तरह कोई दखल नहीं दिया जा सकता, अब इस मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी, तब तक बंगाल पुलिस ईडी अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगी
ED vs TMC Supreme Court Hearing : क्या है पूरा विवाद
पूरा मामला कोलकाता में स्थित आई-पैक के दफ्तर में ईडी की रेड से जुड़ा हुआ है, ईडी ने आरोप लगाया है की जब उनके अधिकारी छापेमारी कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गईं थी, ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया की मुख्यमंत्री ने पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी जांच में बाधा डालने की कोशिश की और सबूतों की चोरी की, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया की जांच के दौरान अधिकारियों के लैपटॉप, जरूरी दस्तावेज और यहाँ तक की मोबाइल फोन भी जबरन छीन लिए गए, और एक अधिकारी का तो फोन भी मुख्यमंत्री ने अपने पास ही रख लिया था
कोर्ट में तीखी बहस और जंतर-मंतर का जीकर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई, ममता सरकार की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने दलील दी की मुख्यमंत्री को Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, इसलिए उनके साथ पुलिस अधिकारियों का होना सामान्य बात है, उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी जानबूझकर चुनाव से जुड़े गुप्त फाईलो को निशाना बना रही थी, और वही सॉलिसिटर जनरल ने हाई कोर्ट में हुए हंगामे का भी जिक्र किया और बताया की वहां वकीलों को ठीक से बहस नहीं करने दी गई और माहौल को खराब किया गया, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा की क्या कोर्ट को जंतर-मंतर बना दिया गया है
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस पीके मिश्रा की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा की अपराधियों को बचाने के लिए राज्य की सुरक्षा का सहारा नहीं लिया जा सकता, कोर्ट ने कहा की कानून बनाए रखने के लिए सभी एजेंसी को आजादी से काम करने देना चाहिए, हालांकि, अदालत ने यह भी माना की किसी एजेंसी को चुनावी काम में कोई दखल या किसी प्रकार की खलल देने का हक नहीं है, लेकिन गंभीर अपराधों की जांच में पार्टी के काम की आड़ लेकर रुकावट डालना भी गलत है
डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते में जवाब मांगा है, और साथ ही, अदालत ने आदेश दिया है की उस दिन की छापेमारी की पूरी सीसीटीवी फुटेज और सर्च की रिकॉर्डिंग वाले सभी स्टोरेज डिवाइस पेन ड्राइव या हार्ड डिस्क को सुरक्षित रखा जाए, ईडी ने बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा को निलंबित करने की भी मांग की है, जिस पर कोर्ट में अभी कोई बात नहीं हुई है
