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Delhi High Court News: हाई कोर्ट ने चुनाव याचिका और आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर सुनाया फैसला, कहा...

Delhi High Court News: एक चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33 ए के तहत किसी उम्मीदवार को अपने रिकॉर्ड का खुलासा करने की वैधानिक बाध्यता केवल तभी होती है, जब उस मामले में अदालत द्वारा आरोप तय कर दिए गए हों या अपराध का संज्ञान ले लिया गया हो। इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है।

Delhi High Court News: हाई कोर्ट ने चुनाव याचिका और आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर सुनाया फैसला, कहा...
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By Radhakishan Sharma

Delhi High Court News: बिलासपुर। पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसाेदिया के खिलाफ दायर चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 33 ए का हवाला देते हुए कहा के तय प्रावधान के तहत किसी उम्मीदवार को अपने रिकॉर्ड का खुलासा करने की वैधानिक बाध्यता केवल तभी होती है, जब उस मामले में अदालत द्वारा आरोप तय कर दिए गए हों या अपराध का संज्ञान ले लिया गया हो। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है।

आम आदमी पार्टी AAP के नेता व पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में पटपड़गंज विधानसभा सीट से जीत को चुनौती देते हुए प्रताप चंद ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने आप उम्मीदवार मनीष सिसोदिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि आप के उम्मीदवार ने आदर्श आचार संहिता के प्रभावशील होने के बाद भी चुनाव प्रचार जारी रखा। ऐसा कर आप उम्मीदवार ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है। याचिकाकर्ता ने आप उम्मीदवार पर नामांकन दाखिल करते वक्त घोषणा पत्र में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को छिपाने का आरोप लगाया है। याचिका के अनुसार आप उम्मीदवार पर वर्ष 2013 में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई थी। घोषणा पत्र में उन्होंने इसका जिक्र नहीं किया है।

इसलिए FIR को जानबुझकर छिपाया नहीं माना जा सकता

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आरोप और उनके अधिवक्ता के दलीलों को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि केवल FIR दर्ज होने को जानबूझकर छिपाया गया तथ्य नहीं माना जा सकता, विशेषकर तब जब उस मामले में कोई चार्जशीट दायर ना किया गया हो। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, आपराधिक इतिहास के खुलासे का मतलब मतदाताओं को अपने उम्मीदवार के बारे में जानकारी रखना और निर्णय लेने में मदद करना है। यह खुलासा कानून के कड़े नियमों के अनुसार हाेने चाहिए।

कोर्ट ने कहा: इस तरह की खामियां याचिका की विश्वनीयता को खत्म कर देती है

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, चुनाव याचिका में यह स्पष्ट करना जरुरी है कि आदर्श आचरण संहिता के उल्लंघन ने चुनाव परिणाम को किस हद तक प्रभावित किया। याचिका में उल्लंघन से चुनाव परिणाम प्रभावित होने के संबंध में पुख्ता प्रमाण व साक्ष्य पेश नहीं किया गया है। याचिका की खामियों की ओर इशारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र पेश नहीं किया है। निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर लगाए गए आरोपों के स्रोत की जानकारी भी नहीं दी है। कोर्ट ने कहा, ये कमियां केवल तकनीकी नहीं हैं बल्कि याचिका की विश्वसनीयता को ही खत्म कर देती है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, सामान्य आरोपों के आधार पर किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि की जीत को अवैध नहीं ठहराया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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