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भारतीय सीमा पर अमेरिकी, इंडियन मिलिट्री के साझा युद्धाभ्यास के मायने क्या हैं ?

भारतीय सीमा पर अमेरिकी, इंडियन मिलिट्री के साझा युद्धाभ्यास के मायने क्या हैं ?
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By NPG News

अखिलेश अखिल

दुनिया में विस्तारवादी राजनीति झंझट का घर है। इससे तनाव तो पैदा होते ही हैं। इसके साथ ही जो देश इस नीति पर चलते हैं असीम संसाधन के साथ ही मानवीय क्रूरता के लिए भी तैयार रहना पड़ता है। कहने के लिए आज के दौर में विस्तारवादी राजनीति से हर देश परहेज करता है, लेकिन चीन ऐसा नहीं मानता। चीन की समझ कुछ अलग तरह की है। उसकी विस्तारवादी राजनीति के अंक में कई देश हैं। करीब आधा दर्जन देशों से चीन की भिड़ंत है। कहीं जमीनी सीमा विवाद है तो कहीं समुद्री विवाद। इसके साथ ही चीन कई देशों पर अपना हक भी मानता है और हरसंभव इसे कब्जा करने को तैयार है। ताइवान और हांगकांग ऐसे ही भूभाग हैं।

चीन के बढ़ते कदम से भारत भी परेशान है। जापान, ऑस्ट्रेलिया भी। अमेरिका भी उतना ही परेशान जितना नाटो के कई देश। लेकिन चीन पीछे हटने को तैयार नहीं है। दुनियाभर में भू राजनीति को लेकर जितनी परेशानी बढ़ी है, उसमें चीन को लेकर सबकी राय यही है कि चीन हठी देश है और उसकी दोस्ती किसी के साथ पक्की नहीं हो सकती।

चीन को लेकर भारत हमेशा सतर्क रहता है। भारत हमें दुनिया के देशों के साथ मैत्री रखना चाहता है और मित्र देशों के साथ मिलकर चीन पर नकेल कसने की तैयारी करता है। अभी हाल में ही चीन को रोकने और उसे संदेश देने के लिए भारत ने जापान के साथ मिलकर मालाबार युद्ध अभ्यास किया है। यह अभ्यास जापान के योकोसूका में चला। यह मालाबार युद्धाभ्यास का 26वां एडिशन था, जो पिछले 9 नवंबर को समाप्त हुआ। इस युद्धाभ्यास में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया। यह चारों देश क्वाड का भी हिस्सा हैं। यह युद्धाभ्यास जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स ने आयोजित किया था।

भारतीय नौसेना की ओर से इस युद्धाभ्यास में आईएनएस शिवालिक और कमोर्तो शामिल हुए। ये दोनों ही स्वदेशी युद्धपोत हैं। शिवालिक एक मल्टी रोल स्टेल्थ फ्रीगेट है, जो एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में भी हिस्सा ले सकता है। वहीं, कमोर्तो पूरी तरह एंटी-सबमरीन वॉरफेयर जहाज है। इस साल मालाबार एक्सरसाइज का उद्देश्य एंटी-सबमरीन वॉरफेयर ड्रिल है। इनका नेतृत्व भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग कमांडिंग ऑफिसर रियर एडमिरल संजय भल्ला ने किया।

बता दें कि मालाबार अभ्यास साल 1992 में भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू किया गया था। फिर 2015 में इसमें जापान और 2020 में ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हो गया, जिससे इस युद्धाभ्यास की लोकप्रियता और बढ़ गई। चारों देशों ने दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्य दखल से उत्पन्न वैश्विक चिंताओं के बीच यह युद्धाभ्यास किया था।

मालाबार युद्धाभ्यास की समाप्ति 9 तारीख को हुई लेकिन चीन को सबक सिखाने के लिए ही आठ तारीख से जी भारत और अमेरिका के बीच मिलिट्री ड्रिल शुरू हो गई है। खबर के मुताबिक इस साल के अंत तक तीन बड़े मिलिट्री युद्धाभ्यास होने हैं। ये युद्धाभ्यास 11 दिसंबर तक चलेंगे और चीन को सतर्क करेंगे।

ये सभी मिलिट्री एक्सरसाइज 8 नंवबर से शुरू हो गई है। 11 दिसंबर तक चलने वाली इन मिलिट्री एक्सरसाइज में भारत अपनी सैन्य ताकत दिखाएगा। भारत और अमेरिका 15 नवंबर से 2 दिसंबर तक एलएसी के पास युद्धाभ्यास करेंगे। एक्सरसाइज उत्‍तराखंड के औली में होगी। ये इलाका एलएसी से महज 100 किलोमीटर दूर है। एक अधिकारी ने कहा- युद्धाभ्‍यास में दोनों देशों के करीब 350-350 सैनिक शामिल होंगे। पहाड़ों और बेहद ठंडे इलाकों में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्‍स को परखा जाएगा। बता दें कि एक साल ये एक्सरसाइज भारत में होती है और एक साल अमेरिका में। पिछले साल ये युद्धाभ्यास अमेरिका के अलास्का में किया गया था।

बता दें कि उत्तराखंड से सटा चीन बॉर्डर भारतीय सेना के सेंट्रल सेक्टर का हिस्सा है। ये इलाका भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवादित रहा है। दो साल पहले गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से इस इलाके में चीन की सैन्य गतिविधियां बढ़ीं हैं। इसी वजह है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाली मिलिट्री एक्सरसाइज बेहद अहम है। उधर अमेरिका भी चीन से नाराज है और खासकर ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका आमने सामने है। अमेरिका लगातार ताइवान के साथ खड़ा है और उसे है तरह की मदद भी कर रहा है। अमेरिका की नाराजगी रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर भी चीन से है।

जानकारी के मुताबिक इस युद्धाभ्यास के जरिए भारत अपनी हाई ऑल्टिट्यूड मिलिट्री वॉरफेयर की रणनीति अमेरिका से साझा करेगा।

इसी तरह भारत धीरे-धीरे ऑस्‍ट्रेलिया के साथ रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है। दोनों देशों की सेनाएं 28 नवंबर से 11 दिसंबर तक पहली 'ऑस्‍ट्रा-हिंद' इन्‍फैंट्री कॉम्‍बैट एक्‍सरसाइज करेंगी। सेना के एक अधिकारी ने कहा- इससे सेमी-डेजर्ट टेरेन में दोनों देशों के साथ में ऑपरेट करने की क्षमता बढ़ेगी।

बता दें कि ये सारे युद्धाभ्यास चीन की बढ़ती ताकत और उसकी विस्तारवादी नीति के खिलाफ है। हालांकि दुनिया की सेनाएं बराबर मित्र देशों के साथ सैनिक ड्रिल करते रहते हैं ताकि दुश्मन देशों को नई तकनीक से परिचय कराया जाए और अपने सैनिकों को एक्टिव रखा जाए, लेकिन भारत के ये हालिया सैनिक ट्रायल चीन को सतर्क करने के लिए है।

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