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Abbas Ansari News Today: पिता मुख्तार अंसारी की कब्र पर फातिहा पढ़ सकेगा बीटा अब्बास अंसारी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आया आदेश

Abbas Ansari News Today: माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसके बेटे अब्बासी अंसारी के जेल से बाहर आने की खबरों पर लगा संशय अब खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को बड़ी राहत दी है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी को फातिहा समारोह में भाग लेने की परमिशन दे दी है।

Abbas Ansari News Today: पिता मुख्तार अंसारी की कब्र पर फातिहा पढ़ सकेगा बीटा अब्बास अंसारी, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आया आदेश
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By Ragib Asim

Abbas Ansari News Today: माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसके बेटे अब्बासी अंसारी के जेल से बाहर आने की खबरों पर लगा संशय अब खत्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को बड़ी राहत दी है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी को फातिहा समारोह में भाग लेने की परमिशन दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब्बास को वापस 13 अप्रैल तक कासगंज जेल में वापस लाया जाएगा। अब्बास अंसारी फिलहाल यूपी की कासगंज जेल में बंद है। कल यानी 10 अप्रैल को मुख्तार की मौत के बाद फातिहा समारोह होना है, जिसके लिए अब्बास को गाजीपुर ले जाया जाएगा।

बता दें कि अब्बास अंसारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी को उसके पिता मुख्तार अंसारी की याद में 10 अप्रैल को होने वाले ‘फातिहा’ समारोह में भाग लेने की अनुमति दी। मुख्तार की हाल ही में कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौत हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा कि अब्बास अंसारी को पर्याप्त सुरक्षा के साथ पुलिस हिरासत में कासगंज जेल से उनके गृहनगर गाजीपुर ले जाया जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब्बास अंसारी को 13 अप्रैल तक कासगंज जेल वापस लाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि अब्बास अंसारी आज शाम (मंगलवार) 5 बजे से पहले अपनी यात्रा शुरू करें। सुप्रीम कोर्ट ने अब्बास अंसारी को 11 और 12 अप्रैल को अपने परिवार से मिलने की भी अनुमति दी। इसके साथ ही पुलिस अधिकारियों को आगंतुकों की तलाशी लेने का भी निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई हथियार नहीं ले जाया जाए और अब्बास अंसारी को निर्देश दिया कि वह किसी भी मीडिया को संबोधित नहीं करेंगे।

कौन है मुख्तार अंसारी

बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हुआ था। राजनीति मुख्तार अंसारी को विरासत में मिली। उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे, जबकि उनके पिता एक कम्युनिस्ट नेता थे। देश के पिछले उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी मुख्तार के रिश्ते में चाचा लगते हैं। कॉलेज में ही पढ़ाई में ठीक मुख्तार ने अपने लिए अलग राह चुनी। 1970 का वो दौर जब पूर्वांचल के विकास के लिए सरकार ने योजनाएं शुरू की। 90 का दशक आते-आते मुख्तार ने जमीन कब्जाने के लिए अपना गैंग शुरू कर लिया। उनके सामने सबसे बड़े दुश्मन की तरह खड़े थे बृजेश सिंह। यहीं से मुख्तार और बृजेश के बीच गैंगवार शुरू हुई।

अपने विरोधियों को दिनदहाड़े गैंगवार में मरवा कर पूर्वांचल में दशकों से दहशत का पर्याय बने मऊ से बहुजन समाज पार्टी के विधायक मुख्तार अंसारी के जरायम का सफर गली के गुंडे की तरह शुरू हुआ था। मोहल्ले और क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने की शुरुआत उसने सिनेमाघर के बाहर टिकटें ब्लैक करने से ही की थी। अपने बड़े भाई को वहीं साइकिल स्टैंड का ठेका दिलाकर लोगों पर धौंस जमाने वाला मुख्तार अंसारी धीरे-धीरे बराह- जरायम रेलवे, कोयला रैक, स्क्रैप, मोबाइल टावरों पर डीजल आपूर्ति, मछली व्यवसाय, पुल, सड़क, नाले-नाली तक के व्यावसायिक ठेकों पर अपने लोगों को काबिज कराता गया। दहशत का आलम यह कि पूर्वांचल में बड़ी-बड़ी परियोजनाओं का ठेका लेने से देसी-विदेशी कंपनियों ने भी किनारा कर लिया।

क्रिकेट का अच्छा खिलाड़ी रहा मुख्तार अंसारी जमींदार घराने का भले ही रहा, मगर पैसों और वर्चस्व के लिए उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। छात्र जीवन में ही इसे साथ मिल गया साधु सिंह और मकनू सिंह जैसे कुख्यात अपराधियों का, जिन्हें इसने अपना आपराधिक गुरु माना।

सच्चिदानंद राय की हत्या में आया था पहली बार नाम

मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के हरिहरपुर गांव के सच्चिदानंद राय दबंग छवि के थे। क्षेत्र की राजनीति में भी उनका दखल था। इधर नगर पालिका के चेयरमैन रह चुके कम्युनिस्ट नेता मुख्तार अंसारी के वालिद सुभानुल्लाह अंसारी के राजनीतिक विरोधी भी थे। पिता के बाद बड़े भाई अफजाल की सियासी राह में सच्चिदानंद राय बड़े रोड़ा थे। वर्ष 1988 में उनकी दिनदहाड़े निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी गई। हत्या में पहली बार अंसारी बंधुओं का नाम सामने आया। सच्चिदानंद राय की हत्या ने इनके आपराधिक वर्चस्व की शुरुआत कर दी। फिर तो साधु सिंह, मकनू सिंह के गिरोह में शामिल हुए मुख्तार के नाम एक से बढ़कर एक बड़े गैंगवार, हत्या, फिरौती, रंगदारी की वारदातों का सिलसिला चल पड़ा।

त्रिभुवन सिंह और बृजेश सिंह के गिरोह से मुख्तार अंसारी की टकराहट में पूर्वांचल की धरती कई बार लाल हुई। मऊ दंगा, भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या के बाद इसके दहशत की गूंज देश ने सुनी, मगर तत्कालीन सरकारों की वोट बैंक की राजनीति के चलते इसे मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण ने जेल में भी इसे ठाट की जिंदगी मुहैया कराई और वहीं से गिरोह का संचालन करता रहा।

मुख्तार अंसारी पर 52 मुकदमे दर्ज

पूरे देश में मजबूत आपराधिक नेटवर्क वाले इस गैंगस्टर ने अपने हर काम को बड़ी ही सफाई से अंजाम दिया और सजा से बचता रहा। रासुका, मकोका, गैंगस्टर, गुंडा एक्ट जैसे में कानूनों में पाबंद रह चुके मुख्तार अंसारी पर 52 मुकदमे दर्ज हैं। इतने मुकदमे सिर पर लिए यह नेता 14 साल से जेल में बंद है, लेकिन पूर्वांचल की राजनति में इसका सिक्का लगातार कायम है। चाहे भाई अफजाल की सियासी पारी हो या बेटे का सियासत में पहला कदम, दोनों को जो भी जीत मिली, उसमें मुख्तार का ही योगदान माना जाता है। मुख्तार अंसारी पर आरोप था कि उसने 2005 में जेल में रहते हुए कृष्णानंद राय की हत्या की साजिश रची थी।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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