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8th Pay Commission: क्या कर्मचारियों को मिलेंगे 5 गारंटीड प्रमोशन? कर्मचारी संगठनों का मेगा प्लान तैयार, इस दिन सौंपी जाएगी फाइनल रिपोर्ट

8th Pay Commission Update 2026: दिल्ली में हुई NC-JCM की अहम बैठक के बाद 8वें वेतन आयोग के सामने रखी जाने वाली मांगों का विस्तृत खाका तैयार हो गया है, जिसमें सैलरी से ज्यादा सेवा शर्तों पर जोर है।

8th Pay Commission: क्या कर्मचारियों को मिलेंगे 5 गारंटीड प्रमोशन? कर्मचारी संगठनों का मेगा प्लान तैयार, इस दिन सौंपी जाएगी फाइनल रिपोर्ट
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फोटो: AI

By Ragib Asim

हाईलाइट

  • कर्मचारी संगठनों ने सेवाकाल में कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित करने की मांग रखी।
  • फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 करने और OPS बहाली पर संगठनों का कड़ा रुख।
  • 10 मार्च को साझा ज्ञापन फाइनल कर जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा।

8th Pay Commission Update 2026: नई दिल्ली में 25 फरवरी को हुई नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड)–जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की बैठक ने देश के करीब 1.2 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदों को पर लगा दिए है। 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद यह पहली ऐसी बड़ी चर्चा थी जिसमें कर्मचारियों के आर्थिक हितों के साथ-साथ उनके करियर ग्राफ और सामाजिक सुरक्षा पर भी विस्तार से मंथन किया गया। रक्षा, रेलवे और डाक जैसे महत्वपूर्ण विभागों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि इस बार लड़ाई सिर्फ वेतन वृद्धि की नहीं बल्कि सम्मानजनक सेवा शर्तों की भी है।

करियर में ठहराव खत्म करने के लिए 5 प्रमोशन का फॉर्मूला

बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा कर्मचारियों के प्रमोशन (Pramotion Policy) को लेकर हुई। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस बात पर चिंता जताई कि जूनियर और मिडिल लेवल के हजारों प्रतिभाशाली कर्मचारी बिना किसी पदोन्नति के एक ही पद पर सालों गुजार देते हैं। इससे न केवल उनकी सैलरी पर असर पड़ता है बल्कि कार्यक्षमता में भी गिरावट आती है।

इसी निराशा को दूर करने के लिए कर्मचारी संगठनों ने मांग रखी है कि 8वें वेतन आयोग में हर कर्मचारी के लिए पूरे सेवाकाल के दौरान कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित किए जाएं। इसके पीछे तर्क यह है कि नियमित अंतराल पर पदोन्नति मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक कामकाज में गति आएगी। इसके साथ ही, संगठनों ने अधिकतम और न्यूनतम वेतन के बीच के बढ़ते फासले को कम करने का मुद्दा भी उठाया। फिलहाल यह अंतर 13 गुना है, जिसे घटाकर 10 गुना करने का प्रस्ताव है।

महंगाई के दौर में 'फैमिली यूनिट' और मेडिकल भत्ते का मुद्दा

वेतन आयोग के कैलकुलेशन में एक बड़ा पेच 'फैमिली यूनिट' (Family Unit) का होता है। फिलहाल वेतन संशोधन के लिए परिवार की 3 इकाइयों को आधार माना जाता है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 5 यूनिट करने की ठोस मांग की है। उनका तर्क है कि भारतीय सामाजिक परिवेश में एक कर्मचारी न केवल अपनी पत्नी और बच्चों, बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी भी उठाता है। यदि यूनिट की संख्या बढ़ती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी में भी भारी उछाल आएगा।

इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी बड़ी मांग सामने आई है। संगठनों ने मांग की है कि जिन शहरों में सीजीएचएस (CGHS) डिस्पेंसरी की सुविधा नहीं है, वहां कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाले 1,000 रुपये के फिक्स्ड मेडिकल भत्ते को बढ़ाकर सीधे 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए। यह मांग बढ़ती मेडिकल लागत और निजी अस्पतालों के खर्चे को देखते हुए रखी गई है।

OPS बनाम NPS का घमासान

बैठक का सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) की बहाली। हालांकि सरकार ने हाल ही में यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) पेश किया है, लेकिन केंद्रीय कर्मचारी परिसंघ के प्रतिनिधि मनजीत सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी ओपीएस से कम किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं। संगठनों का मानना है कि ओपीएस रिटायरमेंट के बाद एक सुनिश्चित सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि नई प्रणालियों में बाजार जोखिम और अनिश्चितता जुड़ी हुई है।

10 मार्च को फाइनल होगा 'डिमांड चार्ट'

अब सबकी नजरें 10 मार्च 2026 को होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं। इस बैठक में सभी अलग-अलग संगठनों द्वारा भेजे गए सुझावों को कंपाइल कर एक साझा ज्ञापन (Common Memorandum) तैयार किया जाएगा। यह ज्ञापन 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा जाएगा। इस ज्ञापन के आधार पर ही आयोग सरकार को अपनी प्रारंभिक सिफारिशें भेजेगा। माना जा रहा है कि अगर सरकार इन मांगों को आंशिक रूप से भी स्वीकार करती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आएगा।

Ragib Asim

Ragib Asim is a seasoned News Editor at NPG News with 15+ years of excellence in print, TV, and digital journalism. A specialist in Bureaucracy, Politics, and Governance, he bridges the gap between traditional reporting and modern SEO strategy (8+ years of expertise). An alumnus of Jamia Millia Islamia and Delhi University, Ragib is known for his deep analytical coverage of Chhattisgarh’s MP administrative landscape and policy shifts. Contact: [email protected]

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