3 बार के विधायक ने नाजायज रिश्ते को छुपाने माशूका और उसकी बेटी का किया था कत्ल…… वैलेंटाइन डे के दिन खुला 4 साल पुराने खूनी मोहब्बत का किस्सा….पढ़िये राजनीति के शिखर पर बैठा एक शख्स कैसे…कब और क्यों बना कातिल

वैलेंटाइन डे पर एक मोहब्बत के एक कत्ल की दास्तां ने हर किसी को शर्मिंदा कर दिया। चार साल पहले हुए मां-बेटी के कत्ल का गुनाहगार तीन बार का विधायक निकला। नजायज रिश्ते को छुपाने राजनीति के शिखर पर बैठा एक शख्स कैसे…कब और क्यों कातिल बना, इसका राज़ आज रायगढ़ पुलिस ने खोला। अब रायगढ़ पुलिस आरोपी पूर्व विधायक का नार्को टेस्ट कराकर और भी गुनाहों के राज को बेनकाब करने की तैयारी कर रही है” 

रायगढ़ 14 फरवरी 2020।…वो उसे बीबी बताता था….उसे वो बिटिया कहता था…लेकिन मुंहबोले रिश्ते को नाम देने का माशूका ने दवाब बनाया तो एक विधायक के सर पर खूनी सनक सवार हो गयी …और फिर एक दिन अपने इस  नजायज रिश्ते को छुपाने वो विधायक बन गया कातिल। मोहब्बत…माशूका और मर्डर की डर्टी स्टोरी चार साल पुरानी है। 7 मई 2016 को चक्रधरनगर इलाके के हमीरपुर मार्ग पर मां साकम्बरी प्लांट के पास मां-बेटी की लाश मिली थी। पुलिस के लिए ये ब्लाइंड मर्डर का केस था, क्योंकि इस मामले में ना तो कोई सबूत मिला था और ना ही कोई सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। लिहाजा इस ब्लाइंड मर्डर की पड़ताल के लिए तफ्तीश की पहली कड़ी मृतका की पहचान के साथ शुरू हुई।

घटनास्थल के आसपास के ग्रामों में पूछताछ सीसीटीवी फुटेज, कई मोबाइल टावर के डाटा का एनालिसिस किया गया साथ ही पूरे जिले के गुम इंसान की छानबीन के बाद भी दोनों शव की शिनाख्त न होने से तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के दिशा निर्देशन पर पुलिस की टीमें “ओडिसा, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल” के कई जिलों में शिनाख्तगी का प्रयास किया गया एवं जिला पुलिस द्वारा अन्तर्राज्यीय ईश्तहार जारी किया गया और इसी ईश्तहार से मृतिका की पहचान उसके पूर्व पति सुनील श्रीवास्तव ने कल्पना दास और उसकी लड़की बबली श्रीवास्तव के रूप में की गई ।

मृतका की पहचान के बाद डबल मर्डर मामले की जांच में तेजी आ गयी। मृतिका कल्पना दास* के मोबाईल नम्बर का डिटेल निकालकर विशलेषण कर अन्य साक्ष्यों को एकत्र किया जाने लगा। मृतिका के काॅल डिटेल पर ओडिशा के हाई प्रोफाईल व्यक्ति के नाम की जानकारी मिली, जिसमें एक नाम पूर्व विधायक अनूप कुमार साय का था। अनूप कुमार साय को तलब कर पूछताछ की गयी तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। हालांकि एसपी संतोष कुमार सिंह और एडिश्नल एसपी अभिषेक वर्मा और सीएसपी अविनाश ठाकुर की तफ्तीश में पहले पूर्व विधायक ने बरगलाने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसने एक-एककर पूरी वारदात की कड़ी खोल दी।

बीजेडी से तीन बार रहा है विधायक 

इस सनसनीखेज डबल ब्लाइंड मर्डर का आरोपी अनूप साय ओडिशा से बीजेडी पार्टी से है और वर्तमान में स्टेट वेयर हाउस कारपोरेशन का चेयरपर्सन हैं और पूर्व में ब्रिजराजनगर, जिला झारसुगुड़ा से तीन बार विधायक रह चुका हैं।आईजी बिलासपुर श्री दीपांशु काबरा ने रायगढ़ पुलिस को इस बड़ी महत्वपूर्ण केस का खुलासा करने में सफलता के लिए एसपी रायगढ़ संतोष सिंह को प्रशंसा पत्र व जांच में लगी पूरी टीम को बीस हज़ार रुपये के नगद इनाम की घोषणा की हैं।

….शादी की कर रही थी जिद, इसलिए कर दिया कत्ल 

अनूप कुमार साय ने बताया कि वो तीन बार के विधायक हैं और वर्तमान में स्टेटवेयर हाऊस कार्पोरेशन के चेयरमैन है। साल 2004-05 कल्पना दास का उसके पति सुनील श्रीवास्वत ने छोड दिया था। उसके बाद कल्पना के पिता ने कल्पना एवं उसकी लडकी बबली को विधायक के पास लेकर आये । कल्पना के साथ विधायक के पहले से प्रेम संबंध थे। दोनों की मोबाईल नम्बर पर बातचीत होती थी। विधायक की पत्नी और बच्चे भुवनेश्वर में रहते है । 2011 में भुवनेश्वर के  सुन्दरपदा में एक मकान बनाकर कल्पना और उसकी बेटी को दे दिया। विधायक ने कल्पना दास को अपनी पत्नी एवं उसकी लडकी बबली को बेटी बताया। कल्पना की बेटी बबली का सेंट जेवियर्स इंग्लिस मिडियम स्कूल में एडमिशन कराया गया था। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कल्पना एवं लडकी बबली को लेकर विधायक दिल्ली, विशाखापट्टम , हैदराबाद, गोवा घुमाने लेकर गया था। इसी बीच कल्पना की महत्वाकांक्षा बढ़ गयी और वो शादी करने एवं मकान को अपने नाम पर करने और  ब्लैकमेलिंग शुरू दी।  जिससे तंग आकर विधायक ने कल्पना एवं उसकी लडकी बबली को ठिकाने लगाने का प्लान बना दिया। अपने ड्राइवर बर्मन टोप्पो को लेकर बोलेरो पर बैठाकर विधायक कल्पना और उसकी बेटी को लेकर रायगढ़ आया। कल्पना को झांसा दिया गया था कि वो उससे मंदिर में शादी करेगा। रायगढ पहुंचने पर उसने कल्पना से कहा कि होटल नहीं मिल रहा इसलिए किसी रिश्तेदार के यहां हमीरपुर क्षेत्र में रूकेगा।  हमीरपुर मार्ग पर मां साकम्बरी प्लांट जाने के रास्ते के पास जैसे ही गाड़ी पहुंची, उसने कल्पना और बबली को बोलेरो से  उतार कर लोहे के राड से दोनो की हत्या कर दी और फिर ड्राइवर को बोलकर दोनों बोलेरो के लिए चार से पांच बार कुचल दिया, ताकि शव की पहचान ना हो सके। दोनो लाश के ऊपर कई बार चढा कर लाश को वहीं छोड कर हमीरपुर मार्ग होते अपने घर उड़ीसा आ गये*।

 

 

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