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इंदौर: 78 की उम्र में MA टॉप! सुषमा मोघे ने जीता गोल्ड मेडल, स्टेज पर राज्यपाल भी रह गए हैरान, जानें सुषमा मोघे की कहानी

Sushma Moghe Biography : उम्र सिर्फ एक नंबर है, इस बात को 78 साल की सुषमा प्रदीप मोघे ने सच कर दिखाया है. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने एम.ए. मराठी में टॉप कर गोल्ड मेडल जीता, जिसे देख राज्यपाल भी हैरान रह गए. रिटायर्ड टीचर सुषमा ने साबित कर दिया कि अगर सीखने का जज्बा हो, तो रिटायरमेंट के बाद भी इतिहास रचा जा सकता है.

इंदौर: 78 की उम्र में MA टॉप! सुषमा मोघे ने जीता गोल्ड मेडल, स्टेज पर राज्यपाल भी रह गए हैरान, जानें सुषमा मोघे की कहानी
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इंदौर: 78 की उम्र में MA टॉप! सुषमा मोघे ने जीता गोल्ड मेडल, स्टेज पर राज्यपाल भी रह गए हैरान, जानें सुषमा मोघे की कहानी

By Uma Verma

Sushma Moghe Biography : इंदौर : कहते हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, और इस बात को सच कर दिखाया है इंदौर की 78 वर्षीय सुषमा प्रदीप मोघे ने. मंगलवार को जब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह चल रहा था, तो सबकी निगाहें उस वक्त ठहर सी गईं जब सफेद बालों वाली एक बुजुर्ग महिला मंच पर स्वर्ण पदक लेने पहुंचीं. उन्होंने एम.ए. मराठी साहित्य में पूरे विश्वविद्यालय में टॉप किया है. राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने जब उन्हें गोल्ड मेडल पहनाया, तो वे खुद भी हैरान रह गए और उनके सम्मान में पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

रिटायरमेंट के बाद का खालीपन और नया सफर

सुषमा मोघे मूल रूप से एक शिक्षिका रही हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ के चिरमिरी के एक केंद्रीय विद्यालय में लगभग 40 सालों तक अपनी सेवाएं दीं. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने जीवाजी यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में एम.एससी. किया था. साल 2000 में रिटायर होने के बाद वे इंदौर शिफ्ट हो गईं. रिटायरमेंट के बाद अक्सर लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, लेकिन सुषमा को पढ़ने-लिखने का बेहद शौक था. वे कहती हैं कि घर पर खाली बैठने से उनकी जिंदगी में एक सूनापन आ गया था, जिसे सिर्फ किताबों ने ही भरा.

विज्ञापन देखकर जागा जज्बा

करीब तीन साल पहले सुषमा ने एक ऑनलाइन लिटरेचर ग्रुप पर एम.ए. मराठी के एडमिशन का विज्ञापन देखा. शुरुआत में उन्होंने अपनी 44 साल की बेटी नंदिनी को इस कोर्स के लिए प्रेरित किया, लेकिन जब बेटी ने व्यस्तता के कारण मना कर दिया, तो सुषमा ने सोचा क्यों न मैं खुद ही यह पढ़ाई पूरी करूँ जो मैं हमेशा से करना चाहती थी. उन्होंने तुरंत फॉर्म भरा और एडमिशन ले लिया.

ऑनलाइन क्लास और शिक्षकों का साथ

सुषमा बताती हैं कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था. तकनीक बदल गई थी, लेकिन उनके हौसले ने हार नहीं मानी. उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन,दोनों तरीको से पढ़ाई की. वे अपने शिक्षकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहती हैं कि उन्होंने कभी भी उम्र के कारण उन्हें अलग महसूस नहीं होने दिया और हर कदम पर उनकी मदद की. मराठी उनकी मातृभाषा है, इसलिए उन्हें विषय को गहराई से समझने में और आनंद आया. आज वे हिंदी के प्रसिद्ध लेखकों की रचनाओं का मराठी में अनुवाद भी कर रही हैं.

युवाओं और बुजुर्गों के लिए संदेश

गोल्ड मेडल जीतने के बाद सुषमा मोघे ने युवाओं और बुजुर्गों को एक बहुत ही सरल लेकिन गहरा संदेश दिया है. उन्होंने कहा अपने खाली समय का सदुपयोग करें और निरंतर पढ़ें. दुनिया में सीखने के लिए बहुत कुछ हैं. पढ़ाई कभी भी व्यर्थ नहीं जाती.

यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने भी उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि सुषमा जी ने न केवल गोल्ड मेडल जीता है, बल्कि समाज के सामने एक मिसाल पेश किया है, कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती. दीक्षांत समारोह में सुषमा के साथ बेटा गौरव, बहू पूजा और पोता रेयांश भी शामिल हुए थे.

ऐसा ही एक कारनामा 2017 में बिहार में हुआ था

बिहार के राज कुमार वैश्य ने वह कर दिखाया था जो दुनिया भर के युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया था. साल 2017 में, जब उनकी उम्र 98 साल थी, तब उन्होंने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एम.ए. की डिग्री हासिल की. रिटायरमेंट के दशकों बाद जब लोग आराम करते हैं, तब राज कुमार ने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करने की ठानी. उनकी इस मेहनत का फल तब मिला जब दीक्षांत समारोह में उन्हें डिग्री दी गई, और उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सबसे उम्रदराज छात्र के रूप में दर्ज किया गया.

राज कुमार का मानना था कि इंसान को कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि वह बूढ़ा हो गया है और अब कुछ नया नहीं सीख सकता. उन्होंने बिना किसी की मदद लिए खुद पढ़ाई की और पूरी परीक्षा भी खुद लिखी. उनका कहना था कि नई पीढ़ी को केवल डिग्री के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान पाने के लिए पढ़ना चाहिए. उनकी यह कहानी आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती है कि अगर मन में सच्चा जज्बा हो, तो उम्र का हर आंकड़ा छोटा पड़ जाता है और सफलता कदम चूमती है.

Uma Verma

Uma Verma is a postgraduate media professional holding MA, PGDCA, and MSc IT degrees from PTRSU. She has gained newsroom experience with prominent media organizations including Dabang Duniya Press, Channel India, Jandhara, and Asian News. Currently she is working with NPG News as acontent writer.

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