MP Sarkari Shikshak E-Attendance Protest: एमपी में ई-अटेंडेंस के खिलाफ लामबंद शिक्षक, अफसरों पर वेतन रोकने का आरोप, 18 जनवरी को भोपाल में जंगी प्रदर्शन का ऐलान
MP Sarkari Shikshak E-Attendance Protest: मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षकों और शिक्षा विभाग के बीच ई-अटेंडेंस ऐप को लेकर टकराव लगातार गहराता जा रहा है...

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MP Sarkari Shikshak E-Attendance Protest: मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस ऐप को लेकर उठता गुस्सा अब आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। सरकारी शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए ऐप में गंभीर तकनीकी खामियां हैं जिनकी वजह से हजारों शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। शिक्षकों का कहना है कि वे अटेंडेंस दर्ज कराने के विरोध में नहीं हैं लेकिन निजी मोबाइल, निजी डेटा और 24 घंटे लोकेशन ऑन रखने की शर्त उन्हें मंजूर नहीं है।
शिक्षक संगठनों के अनुसार ऐप के जरिए उनसे चेहरा पहचान, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, सोशल मीडिया आईडी और पारिवारिक विवरण तक मांगा जा रहा है। ऐसे में डेटा लीक और साइबर ठगी को लेकर डर बना हुआ है। कई शिक्षकों का दावा है कि ऐप डाउनलोड करने के बाद उनके साथ साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं भी हुई हैं।
तकनीकी खामियों पर फूटा गुस्सा
शिक्षकों का कहना है कि दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क कमजोर रहता है। कई बार ऐप खुलता ही नहीं या लॉगिन में समस्या आती है। ऐसे में स्कूल में मौजूद रहने के बावजूद अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती। आरोप है कि नवंबर महीने से सिर्फ इसी आधार पर हजारों शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है।
शिक्षक नेता सतेन्द्र सिंह तिवारी ने प्रदेश के सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे 18 जनवरी को बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचें। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा जिसमें ऐप की तकनीकी खामियां दूर करने और शिक्षकों के रोके गए वेतन को तत्काल जारी करने की मांग की जाएगी।
शिक्षकों का कहना है कि 24 घंटे लोकेशन ऑन रखने की अनिवार्यता उनकी निजी सुरक्षा के लिए खतरा है। खासतौर पर महिला शिक्षकों और ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों में इसको लेकर डर है। उनका कहना है कि सरकार को व्यक्तिगत मोबाइल की जगह स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनें लगानी चाहिए।
अब सवाल ये है क्या सरकार शिक्षकों की मांगों पर पुनर्विचार करेगी या 18 जनवरी का यह प्रदर्शन बड़े आंदोलन की शुरुआत बनेगा? फिलहाल ई-अटेंडेंस को लेकर खींचतान ने प्रदेश की सियासत और प्रशासन दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
