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MP में एमपी में भ्रष्टाचार का नमूना: 5 साल में ही NH-45 पर करोड़ों का पुल पुल धंसा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

MP में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा करोड़ों का पुल! जबलपुर-भोपाल NH-45 पर बना पुल मात्र 5 साल में जर्जर। पुल पर हुआ बड़ा गड्ढा, पुलिस ने की बैरिकेडिंग। देखें रूह कंपा देने वाला वायरल वीडियो और ट्रैफिक अपडेट।

MP में एमपी में भ्रष्टाचार का नमूना: 5 साल में ही NH-45 पर करोड़ों का पुल पुल धंसा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
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By Meenu Tiwari

जबलपुर के शाहपुरा क्षेत्र में नेशनल हाईवे-45 पर स्थित शाहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा फरवरी 2026 में अचानक धंस गया। यह ओवरब्रिज रेलवे लाइन के ऊपर बना है और रोजाना भारी व हल्के वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। घटना के समय ट्रैफिक कम था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई।

इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को भी पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। तब एक लेन बंद कर यातायात को वन-वे किया गया था। बताया जा रहा है कि निर्माण लगभग 2020–21 को हुआ है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिस हिस्से में धंसाव हुआ, वहां पहले से दरारें दिखाई दे रही थीं। क्षतिग्रस्त भाग को अस्थायी रूप से सहारा देने के लिए जैक लगाए गए थे और मरम्मत कार्य भी चल रहा था।

प्रारंभिक अनुमान के अनुसार संभावित कारणों में निर्माण गुणवत्ता की कमी, भारी वाहनों का दबाव, समय पर स्थायी मरम्मत न होना और संरचनात्मक कमजोरी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम कारणों का खुलासा तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा।

तत्काल कार्रवाई, कितना हुआ नुकसान?

प्रशासन और रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर यातायात रोक दिया। क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर सुरक्षा घेरा बनाया गया।तकनीकी टीम द्वारा नुकसान का आकलन जारी है। ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया गया। अब तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

  • मामले पर प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की घोषणा की है।
  • वहीं, मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे भ्रष्टाचार और निर्माण में अनियमितताओं का परिणाम बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

पहले से मिल रहे थे संकेत

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। दिसंबर 2025 की घटना के बाद भी स्थायी समाधान नहीं किया गया। खराब हिस्से को अस्थायी सहारे पर छोड़ देने से भविष्य में बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही थी।

पूरे मामले के मुख्य सवाल

  • सिर्फ 5 साल में पुल की हालत खराब कैसे हुई?
  • क्या निर्माण में मानकों का पालन नहीं हुआ?
  • क्या नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट किया गया था?
  • ओवरलोडिंग की मॉनिटरिंग क्यों नहीं हुई?

Meenu Tiwari

मीनू तिवारी 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया में अनुभव रखती हैं। उन्होंने हरिभूमि, पत्रिका, पेज 9 सहित क्लिपर 28, लल्लूराम, न्यूज टर्मिनल, बोल छत्तीसगढ़ और माई के कोरा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। वर्तमान में वे एनपीजी न्यूज में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।

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