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बड़ी खबर: MP में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर ब्रेक, हाईकोर्ट ने रिजल्ट पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर के 40 पदों पर की जा रही सीधी भर्ती पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। जबलपुर की 13 नर्सिंग अधिकारियों ने 21 मार्च 2024 की अधिसूचना को चुनौती देते हुए पदोन्नति के अधिकार प्रभावित होने का आरोप लगाया। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 18 मार्च को अगली सुनवाई तय की है.

बड़ी खबर: MP में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर ब्रेक, हाईकोर्ट ने रिजल्ट पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब
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By Meenu Tiwari

जबलपुर। मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर के 40 पदों पर की जा रही सीधी भर्ती फिलहाल कानूनी विवाद में फंस गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस भर्ती के परिणाम जारी करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश संजीव सराफ की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद पारित किया। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गई है।

मामला क्या है?

विवाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की उस नई भर्ती प्रक्रिया को लेकर है, जिसके तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 40 पद सीधे भर्ती (Direct Recruitment) से भरे जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को जबलपुर की निशा चंदेल सहित 13 नर्सिंग अधिकारियों ने चुनौती दी है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई भर्ती व्यवस्था उनके पदोन्नति (Promotion) के अधिकारों को प्रभावित करती है। वे वर्ष 2004 से 2014 के बीच स्टाफ नर्स या नर्सिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त हुई थीं और सेवा नियमों के अनुसार सिस्टर ट्यूटर का पद उनके लिए फीडर कैडर माना जाता है।

कब और कैसे उठा विवाद?

21 मार्च 2024 को जारी राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से भर्ती नियमों में संशोधन किया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस संशोधन के जरिए असिस्टेंट प्रोफेसर के पद सीधे भर्ती से भरने का रास्ता खोला गया, जिससे पदोन्नति की पारंपरिक व्यवस्था कमजोर हो गई।

उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे नर्सिंग अधिकारियों को प्रमोशन का अवसर मिलना चाहिए था, लेकिन नई नीति से उनकी वरिष्ठता और कैरियर संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु ने अदालत में तर्क दिया कि:
  • भर्ती नियमों में किया गया संशोधन सेवा नियमों की मूल भावना के विपरीत है।
  • यह संशोधन कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों का हनन करता है।
  • जब तक मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक भर्ती परिणाम पर रोक लगाई जानी चाहिए।

अदालत का रुख

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के तर्कों को गंभीरता से लेते हुए भर्ती परिणाम पर अस्थायी रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। जवाब दाखिल होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह आदेश अंतरिम है, लेकिन इससे भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव पड़ा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह मामला केवल 40 पदों की भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी सेवा नियमों, पदोन्नति अधिकारों और नई भर्ती नीतियों की वैधता से जुड़ा है। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देती है, तो भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं और सेवा नियमों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें 18 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी और अदालत आगे की दिशा तय करेगी।



Meenu Tiwari

मीनू तिवारी 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया में अनुभव रखती हैं। उन्होंने हरिभूमि, पत्रिका, पेज 9 सहित क्लिपर 28, लल्लूराम, न्यूज टर्मिनल, बोल छत्तीसगढ़ और माई के कोरा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। वर्तमान में वे एनपीजी न्यूज में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।

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