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MP Burhanpur Gold Coins: यहाँ मिल रहे मुगलकालीन सोने के सिक्के!, ग्रामीणों ने टॉर्च की रोशनी में खोदे गड्ढे

MP Burhanpur Gold Coins: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के असीरगढ़ गांव में मुगलकालीन सोने के सिक्के मिलने की अफवाह फैलने के बाद ग्रामीण रात के समय खेतों में खुदाई कर रहे हैं. इस दौरान, लोग आधुनिक उपकरण और टॉर्च की रोशनी में सिक्के ढूंढ रहे हैं, जिन पर उर्दू और अरबी में कुछ लिखा हुआ है, जो मुगलकालीन प्रतीत होते हैं. असीरगढ़ का ऐतिहासिक महत्व भी इस तलाश से जुड़ा है, क्योंकि यह क्षेत्र कभी सैनिक छावनी और खजाने को छिपाने के लिए प्रसिद्ध था. हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने सख्ती से इस गतिविधि पर रोक लगाने की चेतावनी दी है, ताकि अवैध खुदाई से पुरातात्विक सामग्री को नुकसान न हो.

MP Burhanpur Gold Coins: यहाँ मिल रहे मुगलकालीन सोने के सिक्के!, ग्रामीणों ने टॉर्च की रोशनी में खोदे गड्ढे
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By Anjali Vaishnav

MP Burhanpur Gold Coins: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के असीरगढ़ गांव में इन दिनों एक अजीबो-गरीब घटना सामने आई है, जहां गांववाले मुगलकालीन सोने के सिक्के खोजने के लिए रात के समय खेतों में खुदाई कर रहे हैं. यह घटना तब हुई जब यहां कुछ दिनों पहले यह अफवाह फैल गई कि इस इलाके में मुगलकालीन सोने के सिक्के दबे हुए हैं.

बुरहानपुर जिले के असीरगढ़ गांव में मुगलकालीन सोने के सिक्के मिलने की अफवाह तेजी से फैल गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग रात के समय खेतों में टॉर्च की रोशनी में खुदाई करने पहुंच गए. इस दौरान अज्ञात लोगों ने खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे खोद डाले, लेकिन सिक्कों के मिलने की पुष्टि अभी तक प्रशासन से नहीं हुई है. इस मामले पर बुरहानपुर के एसपी देवेंद्र कुमार पाटीदार ने कहा कि वे इस घटना की जानकारी में हैं और जांच करके नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी

असीरगढ़ में पहले भी मिल चुका है सोने का सिक्का

असीरगढ़ में पहले भी मुगलकालीन सिक्कों के मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. हालांकि, पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बाद यह गतिविधियां कुछ समय के लिए बंद हो गई थीं, लेकिन अब गेहूं की कटाई के बाद खेतों में फिर से लोग सोने के सिक्के खोजने के लिए इकट्ठा हो गए हैं. यह नजारा रात के समय देखा गया, जब लोग अपने हाथों में आधुनिक उपकरण और टॉर्च लेकर खेतों में खोदाई करने लगे. इस दौरान कई लोग बाहर से भी आए थे और वे भी इस उत्साह में भाग ले रहे थे.

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले कई लोग सिक्के ढूंढने आए थे और उन्होंने पाया था कि कुछ सिक्कों पर उर्दू और अरबी में कुछ शब्द लिखे हुए थे, जो मुगलकालीन प्रतीत होते हैं. प्रत्यक्षदर्शी जयप्रकाश ने बताया कि उन्होंने भी असीरगढ़ में जाकर यह देखा कि लोग टॉर्च की रोशनी में सिक्के ढूंढ रहे थे. कई लोगों ने बताया कि उन्होंने पीतल के सिक्के देखे थे, जिन पर उर्दू और अरबी में कुछ लिखा हुआ था. यह संकेत करता है कि यह सिक्के मुगलकालीन हो सकते हैं, जो उस समय के शासन के प्रतीक हो सकते हैं.

फिल्म 'छावा' में हुआ बुरहानपुर का जिक्र

विकी कौशल की फिल्म 'छावा' में बुरहानपुर का जिक्र होने के बाद से यहां मुगलकालीन सिक्कों की अफवाह फैल गई. फिल्म में बुरहानपुर में सिक्कों का होना दिखाया गया है, जिसके बाद ग्रामीणों में उत्सुकता बढ़ी और उन्होंने इंदौर-हैदराबाद हाईवे पर खुदाई शुरू कर दी. दरअसल, इस हाईवे के निर्माण के लिए खुदाई का काम चल रहा था और करीब तीन महीने पहले सिक्कों की अफवाह सुनकर ग्रामीण यहां खुदाई करने पहुंच गए. इस घटना ने बुरहानपुर में एक नए विवाद को जन्म दिया है.

सड़क निर्माण के दौरान मिले थे सिक्के

एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि हाल ही में बुरहानपुर में फोरलेन सड़क का निर्माण किया गया था, जिसके लिए बड़े पैमाने पर खुदाई की गई थी. इस खुदाई से निकली मिट्टी को खेतों में डाला गया था. खेत के मालिक ने इसे अपने खेतों में बिछा दिया था, जहां कपास की फसल लगी थी. बाद में कुछ महिलाएं खेतों में निराई-गुड़ाई करने पहुंची और वहां उन्हें पीतल और सोने के सिक्के मिले, जिन पर उर्दू और अरबी में कुछ लिखा हुआ था. इस घटना के बाद से असीरगढ़ में सिक्के ढूंढने का सिलसिला शुरू हो गया था.

इस मामले में जिला पुरातत्व संघ के सदस्य डॉ. मनोज अग्रवाल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बताया कि असीरगढ़ क्षेत्र एक ऐतिहासिक केंद्र हुआ करता था और यहां पर मुगलों, ब्रिटिशों, नादिर शाह और अकबर का शासन था. इस क्षेत्र में प्राचीन समय में खजाने छिपाने की परंपरा रही थी. डॉ. अग्रवाल के अनुसार, इस क्षेत्र में पुराने सिक्के मिल सकते हैं.

पुलिस और प्रशासन की सख्ती

हालांकि, बुरहानपुर जिले की पुलिस और प्रशासन ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है और लोगों को खेतों में खुदाई करने से रोकने के लिए कदम उठाए हैं. स्थानीय प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे बिना अनुमति के पुरातात्विक खुदाई न करें, क्योंकि यह भारतीय पुरातत्व विभाग के नियमों का उल्लंघन हो सकता है.

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