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Indore Water Contamination : 2450 करोड़ का पानी बजट फिर भी घरों में पहुंचा जहर, 20 लोगों की मौत और 3200 बीमार, सवालों के घेरे में नंबर 1 शहर

Indore Water Contamination : देश का सबसे साफ-सुथरा शहर कहा जाने वाला इंदौर आज अपनी सबसे बड़ी विफलता और जन स्वास्थ्य संकट के दौर से गुजर रहा है।

Indore Water Contamination : 2450 करोड़ का पानी बजट फिर भी घरों में पहुंचा जहर, 20 लोगों की मौत और 3200 बीमार, सवालों के घेरे में नंबर 1 शहर
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Indore Water Contamination : 2450 करोड़ का पानी बजट फिर भी घरों में पहुंचा जहर, 20 लोगों की मौत और 3200 बीमार, सवालों के घेरे में नंबर 1 शहर

By UMA

इंदौर : Indore Water Contamination : देश का सबसे साफ-सुथरा शहर कहा जाने वाला इंदौर आज अपनी सबसे बड़ी विफलता और जन स्वास्थ्य संकट के दौर से गुजर रहा है। शहर के भागीरथपुरा और उसके आसपास के इलाकों में नगर निगम की पाइपलाइनों के जरिए पहुंचे दूषित पानी ने तहलका मचा दिया है। इस जहरीले पानी को पीने से अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है, और वही 3,200 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं। जबकि इंदौर में स्वच्छ जल की पूर्ति के लिए सरकारी खजाने से करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

Indore Water Contamination : अस्पतालों में चीख-पुकार और डर का माहौल

स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, दूषित पानी का कहर ऐसा हैं की अस्पतालों में मरीजों के लिए जगह कम पड़ने लगी है। अब तक कुल 446 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया जा चुका है, जिसमे से कई की हालत बेहद नाजुक है। बीते गुरुवार को 10 मरीजों की स्थिति जायदा बिगड़ने पर उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया, और 50 मरीजों का इलाज अभी भी अस्पतालों में जारी है। स्थानीय लोगों में पीने के पानी को लेकर इस कदर डरे हुए है की वो प्यास बुझाने के लिए भी सोच में पड़ हैं

भारी-भरकम बजट और दावों की खुली पोल

इस हादसे ने इंदौर नगर निगम के उन दावों की पोल खोली हैं जिनमें विश्व स्तरीय जल आपूर्ति का वादा किया जाता है। पिछले पांच सालों में जल आपूर्ति और साफ सफाई पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता ही गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, निगम ने 2021-22 में इसके लिए 1,680 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो साल 2025-26 के बजट में बढ़कर 2,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, सोचने वाली बात यह है कि नगर निगम का कुल बजट भी 5,135 करोड़ से बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये के पार हो गया, फिर भी जनता को पीने के लिए साफ पानी नही मिला

करोड़ो का फंड, फिर भी पाइपलाइनों में गंदा पानी

शहर को 24 घंटे सुरक्षित पानी देने के नाम पर न केवल नगर निगम का बजट, बल्कि एशियन डेवलपमेंट बैंक अमृत योजना और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए, इसके बावजूद भी दूषित पानी का पाइपलाइनों में मिलना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था का अपमान करने जैसा हैं, सवाल ये उठ रहा है की आखिर इतना पैसा गया कहां, जब आज भी पाइपलाइनों गंदा पानी हैं, और कई घरों के चिराग बुझ गए।

जिम्मेदार अफसरों पर FIR की मांग

इस घटना के बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस त्रासदी को जनस्वास्थ्य आपातकाल बताया, संगठन ने मांग की है कि पूरे शहर की जल वितरण प्रणाली का पुनर्गठन किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, और वहीं भागीरथपुरा निवासी रामू सिंह ने अदालत में याचिका लगाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की, याचिका में साफ कहा गया है कि लोग पिछले दो सालों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया

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