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अंग्रेजों द्वारा बसाए ग्राम खल्लारी में बिराजी है माँ कालिका…. महिमा है अदभुत, 1981में हुई थी माँ की उत्पत्ति… जानिए इस मंदिर की खासियत

धमतरी 19 अप्रैल 2021. नक्सल प्रभावित इलाके के सुदूर वनांचल क्षेत्र में 1915 में अंग्रेजों के द्वारा बसाए ग्राम खल्लारी में बिराजे स्वयं-भू माँ कालिका की महिमा अदभुत है. गाँव के ग्रामीण फगनुराम ने बताया कि सन 1981 में यहाँ पर एक फॉरेस्टर रहा करता था, जिसकी इसी क्षेत्र में ड्यूटी था. इस स्थान पर उन्हें जमीन से चिंगारी जैसा कुछ जलते हुए अक्सर दिखाई देता था. जिसकी जानकारी एक दिन उन्होंने ग्रामीणों को दी, जिसके बाद ग्रामीणों ने वहाँ जाकर उस स्थान की खुदाई शुरू की तो माता कालिका का प्रतिमा जमीन से निकली. ग्रामीणों ने माँ की प्रतिमा को उसी किनारे में रख हवन- पूजन कर माता की मूर्ति स्थापित की और रोजाना माता के सेवा में लग गए.

बताया गया कि जिस स्थान से माता की उत्पत्ति हुई. वहीँ पर खप्पर से धुआं भी जलता था. क्वांर और चैत्र नवरात्रि में पूजा भी करते थे. वहीँ चैत्र नवरात्र में तीज के दिन जब ग्रामीण अक्ति का पर्व मानते थे उसी दिन माता के खप्पर से ज्वाला भी निकलती थी. बताये कि जहाँ पर माता की उत्पत्ति हुई थी उस स्थान पर आज भी घी के समान खुशबू आती है. साथ ही ग्राम खल्लारी में माँ कालिका की उत्पत्ति हुई इसलिये ग्रामीण माता को माँ खल्लारी भी बोलते है. माता के सेवा के लिए 20 गाँव के ग्रामीणों ने समिति भी बनाई है. जो रोजाना सुबह शाम माता की पूजा, आरती कर सेवा में लगे रहते है. माता के दर्शन करने और मनोकामना ज्योति जलाने लोग उड़ीसा, बस्तर, छत्तीसगढ़ के अलग -अलग हिस्से, और दूर-दराज से यहाँ पहुँचते है. लेकिन वर्तमान में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लागू है, इस वजह से यहाँ 40 मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की गयी है. सामान्य समय में यहाँ जोत की संख्या भी ज्यादा होती है. माता की कृपा से ही क्षेत्र में हमेशा सुख, शांति और खुशहाली बनी रहती है. माता किसी भी बाधा से क्षेत्र के लोगों की रक्षा करती है. बताया कि जो कोई भी सच्चे मन माता के दरबार में आता है माता उसकी मुरादे अवश्य ही पूरी करती है.

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