नगर पंचायत का देखिए कारनामा , गर्भवती महिला शिक्षाकर्मी का 2 साल पहले रोक दिया 7 माह तक वेतन , मंत्रालय में हुई शिकायत तो मंत्रालय को ही भेज दी झूठी चिट्ठी और बता दिया महिला शिक्षाकर्मी को ही दोषी पर शिक्षाकर्मी नेता विवेक दुबे ने खोल दी दस्तावेजों के साथ पूरी पोल !

रायपुर 22 अक्टूबर 2020। शिक्षाकर्मियों को कार्यालयों के अधिकारियों और बाबू द्वारा घुमाने की खबरें तो लगातार निकल कर सामने आ रही थी लेकिन अब जो मामला निकल कर सामने आया है वह इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि सीधे तौर पर इस मामले में नगर पंचायत के सीएमओ ने मंत्रालय में बैठे संयुक्त संचालक को ही गुमराह करने की कोशिश की है और सीधे तौर पर उस महिला शिक्षाकर्मी को ही दोषी बना दिया है जिसका 7 महीने का वेतन बिना किसी गलती के और वह भी मातृत्व अवकाश के समय का अधिकारी ने रोक दिया था । 7 महीने का वेतन न मिलने की जानकारी जब महिला शिक्षाकर्मी लता कंवर ने संविलियन अधिकार मंच के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे की दी तो उन्होंने मामले से राज्य कार्यालय के अपर संचालक सौमिल रंजन चौबे को दी जिसके बाद इस मामले में जांच शुरू हुई । इधर इसके बाद मामले की लीपापोती शुरू हो गई और आज मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पंचायत सारागांव संयुक्त संचालक को पत्र लिखते हुए महिला शिक्षा कर्मी का 7 महीने का वेतन बकाया होना स्वीकार किया और इसके लिए 1 लाख 35 हजार रुपये आंबटन की मांग भी रखी लेकिन इसी पत्र में उन्होंने यह लिखा है कि महिला शिक्षाकर्मी कार्यभार ग्रहण करते ही दूसरे दिन बिना किसी सूचना के अवकाश पर चली गई और 6 माह बाद कार्यभार ग्रहण किया तब दस्तावेज सौंपा जबकि यह पूरी तरह झूठ है ।

आखिर क्या है मामले की पूरी सच्चाई !

दरअसल महिला शिक्षाकर्मी लता कंवर ने जब नौकरी जॉइन की थी तब 8 महीने की प्रेग्नेंट थी और 65 किलोमीटर दूर से आना-जाना करती थी इसलिए उसने ज्वाइन करने के 10 दिन बाद 6 सितंबर को विधिवत तरीके से प्राचार्य को आवेदन सौंपा जिसमें चिकित्सा प्रमाण पत्र भी शामिल था स्कूल के प्रिंसिपल ने भी उसी दिन आवेदन को मुख्य नगर पालिका के सीएमओ को प्रेषित कर दिया और बकायदा इसकी पावती शिक्षाकर्मी को सौंप दी लेकिन अपने झूठ को छुपाने के चक्कर में मुख्य नगर पालिका ने संयुक्त संचालक को ही झूठी जानकारी भेज दी है ।

महिला शिक्षाकर्मी को दोषी बताना पूरी तरह गलत – विवेक दुबे

सबसे पहले तो 7 महीने तक बेवजह महिला शिक्षाकर्मी का वेतन रोक दिया गया और अब जब वेतन भुगतान करना है तो महिला शिक्षा कर्मी को ही दोषी बताने की कोशिस की जा रही है जबकि उन्होंने विधिवत तरीके से प्राचार्य को आवेदन सौंपा था और प्राचार्य ने विधिवत तरीके से सीएमओ को इन सब के दस्तावेज हमने अपर संचालक सर को सौंपते हुए इस बात से अवगत करा दिया है कि महिला शिक्षाकर्मी की कहीं कोई गलती नहीं है उसके साथ तो अन्याय हुआ है और अब एक बार फिर ऐसी ही कोशिश दोबारा की जा रही है सबसे बड़ी बात यह है कि उच्च कार्यालय को गुमराह करने की कोशिश हो रही है, हम इसके विरोध में हैं और ऐसे अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग हमने उच्च कार्यालय से की है ।

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