अतिथि शिक्षक की मौत से पहले ‘आखिरी चिट्ठी’….. पत्नी को PF का पैसा परिवार को दी ‘नौकरी’…..8 महीने से नहीं मिला था वेतन, फांसी लगाकर दे दी जान….सरकार देती रही बस आश्वासन

उमरिया 12 फरवरी 2020। उमरिया जिले के चंदिया में पदस्थ अतिथि विद्वान संजय कुमार ने खुदकुशी कर ली है. अतिथि विद्वान सरकारी कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर अस्थायी रूप से पढ़ाने का काम करते हैं. संजय कुमार को पिछले आठ महीने से मानदेय नहीं मिला था. सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे संजय ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

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नियमित करने की मांग को लेकर अतिथि विद्वान भोपाल के यादगारे शाहजहांनी पार्क में पिछले दो महीने से धरना दे रहे हैं. इस धरना स्थल पर बीजेपी और कांग्रेस के कई नेता पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं. कॉलेज में प्रोफेसर या असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली होने पर गेस्ट फैकल्टी के तौर पर अतिथि विद्वानों को रखा जाता है. इसके लिए उन्हें 1500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है. लेकिन ये राशि हर महीने देने की बजाय कुछ महीने के अंतराल में एकमुश्त अदा की जाती है.

उनकी पत्नी लालसा ने बताया उन्हें छह महीने से सैलरी नहीं मिली थी. वो कहते थे अब मेरे बच्चों के भविष्य का क्या होगा. सरकार ने हमारे पेट में लात मार दी. हमें कहीं का नहीं छोड़ा. बच्चा 10वीं में पढ़ता है, उसकी फीस नहीं भर पाए हैं. अब मेरे सामने कोई रास्ता नहीं है. मंत्री आएं या फिर मैं मंत्रीजी के पास पति की मिट्टी लेकर जाऊंगी. मेरी तो जिंदगी ही खत्म हो गई है. मैं क्या करुं, कहां जाऊं. अगर मंत्री जी मेरे लिए कुछ नहीं कर सकते तो मैं भी आत्महत्या कर लूंगी, मंत्री जी तभी खुश होंगे. मैं चाहती हूं कि मंत्री जी मुझे और मेरे बच्चे के भविष्य को देखें. अब मंत्री जी को निर्णय लेना है, वरना मैं भी तीनों बच्चों के साथ पति की तरह आत्महत्या कर लूंगी.” लालसा, भी अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने से अस्पताल में भर्ती है.

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, “उमरिया के अतिथि विद्वान श्री संजय कुमार की आत्महत्या के लिए अगर कोई जिम्मेदार है, तो वह है प्रदेश की निकम्मी सरकार. उस बेसहारा विधवा को कांग्रेस सरकार क्या जवाब देगी? मासूम बच्चों की देखभाल कौन करेगा?”

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