लालू कहते थे राजनीति के मौसम वैज्ञानिक रामविलास बाबू……कभी DSP के लिए हुए थे सेलेक्ट, लेकिन ज्वाइन करने के बजाय चुनाव लड़ा…. 29 सालों से हर प्रधानमंत्री के साथ किया काम.. जानिये उनके बारे में

नयी दिल्ली 8 अक्टूबर 2020। लंबी बीमारी के बाद आज शाम केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन हो गया। 74 साल के इस दलित नेता के साथ राजनीति के बहुत सारे संयोग जुड़े हुए हैं। पिछले 29 सालों से देश में जितने भी प्रधानमंत्री हुए, वो हर किसी के साथ मंत्रिमंडल में शामिल रहे। फिर चाहे रेल मंत्री हो या फिर सूचना मंत्री, केंद्रीय खाद्य मंत्री हो या फिर कोई अन्य मंत्रालय रामविलास पासवान हर राजनीति फार्मूला के साथ सटीक कदम बनाकर चलने वाले नेताओं में शामिल रहे। आइये जानते हैं उनके बारे में कुछ ऐसी बातें, जो बेहद खास है…

राम विलास का कभी पुलिस फोर्स में जाने वाले थे। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वह आ गए पॉलिटिक्स में। खगड़िया के एक दलित परिवार में जन्मे रामविलास पासवान ने एमए औऱ एलएलबी करने के बाद बीपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने बीपीएससी क्लियर भी कर लिया और उनका चयन डीएसपी पद के लिए हो गया था।

जब उनका चयन बीपीएससी में हुआ तभी वह समाजवादी नेता राम सजीवन के संपर्क में आए और राजनीति का रुख कर लिया। 1969 में वह अलौली विधानसभा से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद पासवान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1977 में वह जनता पार्टी के टिकट पर हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव लड़े औऱ सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीतने का विश्व रिकॉर्ड बना लिया। 1989 में रामविलास ने इसी सीट से अपना ही रिकॉर्ड तोड़ नया कीर्तिमान बनाया। बाद में उनका ये रिकॉर्ड भी नरसिम्हा राव समेत दूसरे नेताओं ने तोड़ा।

पासवान पिछले 29 सालों में करीब हर प्रधानमंत्री के साथ काम कर चुके हैं। नरसिम्हा राव की कैबिनेट में वह नहीं थे।राम विलास पासवान ने साल 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी का गठन किया। राम विलास पासवान पार्टी के अध्यक्ष बने और लंबे अरसे तक रहे।साल 2019 में लोकसभा चुनावों से पहले राम विलास पासवान ने अपने बेटे चिराग पासवान को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया।

 

राजनीति की नब्ज पकड़ने वाले रामविलास पासवान पहली बार 1969 में एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में बिहार विधानसभा पहुंचे थे। 1974 में राज नारायण और जेपी के प्रबल अनुयायी के रूप में लोकदल के महासचिव बने थे। वे व्यक्तिगत रूप से राज नारायण, कर्पूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा जैसे आपातकाल के प्रमुख नेताओं के करीबी रहे हैं।

लगभग पांच दशक तक बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे

1946 में बिहार के खगड़िया में जन्मे रामविलास पासवान ने एक छोटे से इलाके से निकलकर दिल्ली की सत्ता तक का सफर अपने संघर्ष के बूते तय किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग पांच दशक तक वो बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने लालू प्रसाद यादव ने रामविलास पासवान को ‘मौसम वैज्ञानिक’ का नाम दिया था। रामविलास पासवान हवा के रुख के साथ राजनीति के अपने फैसले बदलने में माहिर थे। इसमें वो कामयाब भी रहे। इसी का नतीजा रहा कि उन्होंने छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया। ‘ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर’ इस कहावत को रामविलास पासवान ने चरितार्थ किया। वह बेहत सरल और मृदुभाषी थे। बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार चुनाव जीते, लेकिन दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

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