जानिए 8 मार्च को ही क्यों सेलिब्रेट करते है Women’s Day….111 साल पुराना है इतिहास…

नई दिल्ली 8 मार्च 2020 दुनिया भर में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. 8 मार्च का दिन पूरे विश्व में महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करने के लिए समर्पित है, खासतौर पर अलग-अलग पृष्ठभूमि और संस्कृति से ताल्लुक रखने वाली उन महिलाओं के लिए जिन्होंने लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों के लिए हमेशा आवाज उठाई है.

इस साल महिला दिवस रविवार के दिन पड़ रहा है और इस बार की थीम भी बहुत खास है. इस विशेष थीम का नाम है- #EachforEqual. इससे पहले कि आप आज का दिन उन महिलाओं को समर्पित करें, जिनसे आप काफी प्रभावित हुए हैं एक नजर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास पर डाल लीजिए. वैसे तो इस खास दिन का इतिहास कई लोग जानते हैं, लेकिन जो नहीं जानते उन्हें इसके इतिहास से आज रू-ब-रू कराते हैं.

क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस?

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा दिए गए उनके योगदान के लिए समर्पित है. यह विशेष दिन लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करता है. साथ ही यह रिसर्चर्स को ये समझाने में मदद करता है कि विशिष्ट क्षेत्रों में समाज कैसे प्रगति कर रहा है, कैसे आगे बढ़ रहा है और इसमें महिलाओं का क्या योगदान है?

भले ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के खास मौके पर ऐसा माना जाता हो कि महिलाएं कितना आगे निकल गई हैं, लेकिन समाज के कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका सुलझना अभी बाकी है. इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि महिलाओं ने कैसे अपने अधिकारों के लिए एकता दिखाते हुए एक बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया था.

कब हुई शुरुआत और 8 मार्च को ही क्यों मनाते हैं?

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का 111 साल पुराना एक समृद्ध इतिहास रहा है. इसकी पहली झलक 1909 में देखने को मिली थी, जब न्यूयॉर्क में करीब 15 हजार महिलाएं सड़क पर उतर गई थीं. इन महिलाओं की मांग थी कि नौकरी करने के घंटे कम किए जाएं और अच्छा वेतन दिया जाए. इतना ही नहीं इन महिलाओं ने वोट करने का अधिकार देने की मांग भी रखी थी. इन महिलाओं की मांगों को माना गया, जिसके एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने उनके संघर्ष की शुरुआत करने वाले दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया.

जब भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बात आती है, तो यह सवाल कई लोगों के मन में उठता है कि आखिर 8 मार्च को ही इस खास दिन को क्यों मनाया जाता है? इस तारीख के पीछे भी अपना एक इतिहास है.

दरअसल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का आइडिया क्लारा जेटकिन ने दिया था, जो कि एक मार्क्सवादी और सामाजिक कार्यकर्ता थीं. क्लारा महिलाओं के हक के लिए हमेशा आवाज उठातीं और उनके अधिकारों के लिए सक्रिय रहती थीं. 1910 में डेनमार्क के कोपेनहेगन में सभी वर्किंग वुमेन की कांफ्रेंस हुई थी. इस कांफ्रेंस में 17 देशों की 100 महिलाओं ने हिस्सा लिया था.

History of Women's Day, 111 साल पुराना है Women’s Day का इतिहास, जानिए 8 मार्च को ही क्यों करते हैं सेलिब्रेट

महिलाओं की हड़ताल से गई निकोलस की गद्दी

कांफ्रेंस के दौरान क्लारा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया, जो कि सभी को पसंद आया. साल 1911 में सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, लेकिन उस समय इसकी कोई तारीख तय नहीं हुई थी.

साल 1917 में रूस की महिलाओं ने बोलेशेविक क्रांति के समय वहां के सम्राट निकोलस के सामने ब्रेड एंड पीस की मांग की. अपनी मांगों को लेकर महिलाएं हड़ताल पर बैठ गई थीं. निकोलस ने महिलाओं की हड़ताल तुड़वाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा और बाद में उसे मजबूरन अपना पद छोड़ना पड़ा. इसके बाद रूस की अंतरिम सरकार ने महिलाओं की मांग को माना और साथ ही उन्हें वोट करने का अधिकार भी दिया.

वह वो दौर था जब रूसी लोग जूलियन कैलेंडर का इस्तेमाल करते थे. महिलाओं ने अपनी हड़ताल जब शुरू की थी, तब 23 फरवरी थी, लेकिन ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार, यह दिन 8 मार्च पड़ता है. रूसी महिलाओं की एकता में वो ताकत थी कि उन्होंने निकोलस को गद्दी छोड़ने पर मजबूर कर दिया. 8 मार्च को रूस में आधिकारिक छुट्टी घोषित की गई और फिर बाद में इसी दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के लिए दर्ज कर लिया गया.

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