Begin typing your search above and press return to search.

famous food of Chhattisgarh: क्या आपने कभी इन व्यंजनों को चखा है? जानिए ठंड में बनाए जाने वाले स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनो के बारे में!

Famous Food of Chhattisgarh: जब भी मौसम में बदलाव होता है तो छत्तीसगढ़ की रसोई में भी कुछ बदलाव नजर आते हैं अर्थात जब ठंडी का सीजन आता है तो छत्तीसगढ़ के रसोई में बनने वाली स्थानीय भोजन भी बदल जाते हैं। वैसे तो छत्तीसगढ़ अपने पर्यटन स्थलों के लिए विश्व विख्यात है लेकिन यहां के पकवान भी किसी से कम नहीं है!

famous food of Chhattisgarh: क्या आपने कभी इन व्यंजनों को चखा है? जानिए ठंड में बनाए जाने वाले स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनो के बारे में!
X
By Chirag Sahu

Famous Food of Chhattisgarh: जब भी मौसम में बदलाव होता है तो छत्तीसगढ़ की रसोई में भी कुछ बदलाव नजर आते हैं अर्थात जब ठंडी का सीजन आता है तो छत्तीसगढ़ के रसोई में बनने वाली स्थानीय भोजन भी बदल जाते हैं। वैसे तो छत्तीसगढ़ अपने पर्यटन स्थलों के लिए विश्व विख्यात है लेकिन यहां के पकवान भी किसी से कम नहीं है! चावल, महुआ, कोदो–कुटकी और देसी मसालो से बनने वाले ये व्यंजन छत्तीसगढ़ के अनोखे स्वाद को बताते है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ठंड के समय में छत्तीसगढ़ में अधिकतर कौन से स्थानीय व्यंजन बनाए जाते हैं।

1. अंगाकर रोटी

जब भी छत्तीसगढ़ में सर्दियों की शुरुआत होती है तो अक्सर अंगाकर रोटी जरूर बनाया जाता है। यह मोटी, मुलायम और काफी सुगंधित होती है, जिसे छत्तीसगढ़ का पहचान भी माना जाता है। इसे बनाने के लिए चावल या गेहूं के आटे को अच्छे से गूथकर हथेली से थपथपाते हुए मिट्टी के चूल्हे की आंच पर पकाया जाता है और और ऊपर से केले आदि के पत्तों द्वारा ढक दिया जाता है। जब यह रोटी गरमा गरम पकती है तो इसे देसी घी और लहसुन– मिर्ची की चटनी के साथ परोसा जाता है।

2. तिलगुड़ और पिठा

ठंड के मौसम में तिल गुड़ के लड्डू और पिठा लगभग सभी के घर में बनता है। छत्तीसगढ़ में इसे एक रिवाज की तरह अपनाया गया है क्योंकि जब भी ठंड आती है तो हमारी त्वचा को गुड़ और तिल से गर्मी महसूस होती है और त्वचा में नमी बनी रहती है। सरगुजा और जशपुर जिले के गांव में तिल पिठा और गुड़ पिठा खूब बनाया जाता है। पिठा जब बनाया जाता है तो इसके अंदर गुड़, तिल और नारियल की भरावन की जाती है और भाप द्वारा इसे पकाया जाता है जिस वजह से यह पचाने में भी आसान है।

3. सर्दियों में गर्म करने वाली सब्जियां

  • कोचई भाजी(अरवी पत्ता)– यह सब्जी सर्दियों की खास पहचान होती है। इसे बेसन या चावल के घोल में लपेटकर पकोड़े की तरह बनाया जाता है।
  • सुरन(जिमीकंद)– यह सब्जी शरीर को काफी ऊर्जा प्रदान करता है साथ ही कोलेस्ट्रॉल, शुगर नियंत्रण और खून बढ़ाने में भी इसका काफी योगदान है।
  • लाल भाजी– लाल भाजी का सेवन लगभग छत्तीसगढ़ के हर घर में किया जाता है। इसे पकाने पर इसका रंग लाल होता है और इसे लोहे की कढ़ाई में बनाना सबसे ज्यादा फायदेमंद है, क्योंकि इससे आयरन की मात्रा और बढ़ जाती है।

4. दाल फरा

भाप में पकने वाला चावल आटे की लोई का यह पकवान हर छत्तीसगढ़ी घर की पहचान है। पकने के बाद इसे हरी मिर्च,प्याज और लहसुन के तड़के के साथ मिलाया जाता है। यह हल्का और पौष्टिक भोजन ठंड के मौसम में बेहद पसंद किया जाता है। इसे छत्तीसगढ़ का हेल्दी मोमोज भी कहते है, जो बिलासपुर और रायपुर के ग्रामीण अंचलों में अधिक खाया जाता है।

5. महुआ लड्डू

छत्तीसगढ़ आदिवासियों की ही धरती रही रही है, यहां का महुआ फल उनके लिए एक आजीविका का साधन है। खासकर बस्तर और कोरब के आदिवासी इलाकों में महुआ के लड्डू काफी फेमस है। यह महुआ के फूलों से बनता है और इससे बना पेय पदार्थ भी शरीर को गर्म रखने में सहायक है। महुआ का रस और सूखे फूलों से बने पकवान शरीर को माल न्यूट्रीशन भी प्रदान करते है।

6. कोदो कुटकी खिचड़ी और मडिया अम्बिल

कोदो कुटकी यानी मिलेट्स से बने भोजन खाने में काफी स्वादिष्ट और पचाने में हल्के होते है। ठंड के मौसम में बनने वाला कोदो खिचड़ी– मूंगदाल, लहसुन और देसी घी के तड़के के साथ बनाया जाता है और साथ में मडिया अम्बिल, एक रागी से बना पेय पदार्थ है, जो शरीर को गर्मी और हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। सरगुजा क्षेत्र में इस भोजन का चलन अधिक देखने को मिलता है।

Next Story