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Bangladesh Violence : बांग्लादेश में मजहबी हैवानियत : पहले हिंदू युवक को पीट-पीटकर मारा, फिर पेड़ से बांधकर जिंदा जलाया, कोर्ट में कातिलों का कबूलनामा

Bangladesh Violence : बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद फैली अराजकता थमने का नाम नहीं ले रही है। शेख हसीना सरकार के पतन और उस्मान हादी की हत्या के बाद से शुरू हुई हिंसा अब अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के लिए काल बन गई है।

Bangladesh Violence : बांग्लादेश में मजहबी हैवानियत : पहले हिंदू युवक को पीट-पीटकर मारा, फिर पेड़ से बांधकर जिंदा जलाया, कोर्ट में कातिलों का कबूलनामा
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Bangladesh Violence : बांग्लादेश में मजहबी हैवानियत : पहले हिंदू युवक को पीट-पीटकर मारा, फिर पेड़ से बांधकर जिंदा जलाया, कोर्ट में कातिलों का कबूलनामा

By Uma Verma

Bangladesh Violence : ढाका/मयमनसिंह : बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद फैली अराजकता थमने का नाम नहीं ले रही है। शेख हसीना सरकार के पतन और उस्मान हादी की हत्या के बाद से शुरू हुई हिंसा अब अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के लिए काल बन गई है। पिछले कुछ दिनों में मानवता को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने सभ्य समाज को झकझोर कर रख दिया है। मजहबी कट्टरपंथियों ने महज 10 दिनों के भीतर दो हिंदू युवकों को मौत के घाट उतार दिया है।

Bangladesh Violence : दीपू चंद्र दास: पहले पीट-पीटकर मारा, फिर पेड़ से बांधकर शव को फूंका बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले से रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले एक साधारण हिंदू युवक दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा (पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी) का झूठा आरोप लगाया गया। इसके बाद जो हुआ, वह बर्बरता की सारी हदें पार कर गया।

Bangladesh Violence : रात के अंधेरे में स्क्वायर मास्टर बारी डुबालिया पाड़ा इलाके में सैकड़ों की उन्मादी भीड़ ने दीपू को घेर लिया। बिना किसी सबूत या जांच के, भीड़ ने दीपू पर जानलेवा हमला कर दिया। चीखते-चिल्लाते दीपू को तब तक पीटा गया जब तक उसकी सांसें नहीं थम गईं। लेकिन कट्टरपंथियों की हैवानियत यहीं खत्म नहीं हुई; उन्होंने दीपू के बेजान शरीर को एक पेड़ से बांधा और उसे आग के हवाले कर दिया। यह घटना न केवल एक हत्या थी, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के मन में खौफ पैदा करने का एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी।

अदालत में कातिलों का कबूलनामा

इस जघन्य हत्याकांड में पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों—तारिक हुसैन, मानिक मिया, निजामुल हक और अजमल छागिर को गिरफ्तार किया है। ये चारों आरोपी उसी फैक्ट्री में काम करते थे, जहाँ दीपू कार्यरत था। गुरुवार को मयमनसिंह की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। वरिष्ठ न्यायिक मजिस्ट्रेट तहमिना अख्तर टोमर की अदालत में दिए गए बयानों में आरोपियों ने विस्तार से बताया कि कैसे उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। मयमनसिंह के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अब्दुल्लाह अल मामुन के मुताबिक, यह घटना पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से की गई थी, जिसमें कई अन्य लोग भी शामिल थे।

अमृत मंडल की हत्या: जबरन वसूली का आरोप लगाकर ली जान

अभी दीपू चंद्र दास की हत्या का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि कट्टरपंथियों ने एक और हिंदू युवक अमृत मंडल उर्फ सम्राट को अपना निशाना बना लिया। 29 वर्षीय अमृत को भीड़ ने घेरकर बुरी तरह पीटा, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस बार भीड़ ने हत्या को जायज ठहराने के लिए अमृत पर 'जबरन वसूली' का झूठा आरोप लगाया। यह पैटर्न साफ बताता है कि बांग्लादेश में किसी भी हिंदू को निशाना बनाने के लिए पहले उन पर कोई आरोप मढ़ा जाता है और फिर भीड़ को उकसाकर उनकी हत्या कर दी जाती है।

खौफ के साए में अल्पसंख्यक समुदाय

इन लगातार हो रही हत्याओं ने बांग्लादेश में रह रहे हिंदू परिवारों को दहशत में डाल दिया है। मयमनसिंह और आसपास के इलाकों में रहने वाले अल्पसंख्यक अब अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और पुलिस प्रशासन कट्टरपंथियों के सामने लाचार नजर आ रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी तो हो रही है, लेकिन जिस तरह से भीड़ तंत्र हावी है, उसने न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

साजिश या अचानक भड़का गुस्सा?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हालांकि यह अचानक हुई भीड़ की हिंसा जैसा दिखता है, लेकिन इसके पीछे गहरी साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच में यह बात सामने आई है कि दीपू के साथ काम करने वाले कुछ सहकर्मी ही उसे निशाना बनाने की फिराक में थे। अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर निशाना बनाना यह दर्शाता है कि कट्टरपंथी ताकतें बांग्लादेश के सामाजिक ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना चाहती हैं।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रही यह क्रूरता अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चेतावनी है। अगर समय रहते इन कट्टरपंथी ताकतों पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाले समय में स्थितियां और भी भयावह हो सकती हैं।

Uma Verma

Uma Verma is a postgraduate media professional holding MA, PGDCA, and MSc IT degrees from PTRSU. She has gained newsroom experience with prominent media organizations including Dabang Duniya Press, Channel India, Jandhara, and Asian News. Currently she is working with NPG News as acontent writer.

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