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इनसाइड स्टोरी – आखिर क्या है संविलियन का जगदलपुर कनेक्शन ?…… क्या 25 जनवरी को ही कर ली थी शिक्षाकर्मियों ने जीत दर्ज….. किसके कहने पर 25 जनवरी को मुख्यमंत्री के साथ शिक्षाकर्मियों की तस्वीर नहीं हुई वायरल….पढ़िए पूरी कहानी….

इनसाइड स्टोरी – आखिर क्या है संविलियन का जगदलपुर कनेक्शन ?…… क्या 25 जनवरी को ही कर ली थी शिक्षाकर्मियों ने जीत दर्ज….. किसके कहने पर 25 जनवरी को मुख्यमंत्री के साथ शिक्षाकर्मियों की तस्वीर नहीं हुई वायरल….पढ़िए पूरी कहानी….
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By NPG News

रायपुर 5 मार्च 2020। बजट की शुरुआत हुई भी नहीं थी कि बिलासपुर से संविलियन अधिकार मंच के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे और उनके सहयोगी साथी विधानसभा के लिए रवाना हो चुके थे। यही नहीं पटाखों और मिठाइयों के साथ तैयारी जश्न की ऐसी थी मानो सब कुछ तय हो, इसका संकेत उस समय मिला जब मुख्यमंत्री से मुलाकात कर बधाई देते हुए स्वयं प्रदेश संयोजक विवेक दुबे ने कहा – धन्यवाद भईया.. आप जइसे मोर जगदलपुर के जिला संयोजक ल कहे रहा तइसने होइस। मैं आज तक एकरे कारण ओ फ़ोटो ल वायरल नहीं करें हव, उनकी बात वह सुनकर मुख्यमंत्री उसके बाद मुस्कुराने लगे और वही फोटो प्रदेश के सभी अखबारों की सुर्खियां बनी। विधानसभा में घोषणा होते ही मुख्यमंत्री , पंचायत मंत्री और अन्य विधायकों को जब मिठाई खिलाते हुए शिक्षाकर्मी नजर आए तो वहां सभी चौक गए कि आखिर इतनी जल्दी यह सब हो कैसे रहा है क्या शिक्षाकर्मियों को इतना अधिक भरोसा था। सरकार पर संविलियन के निर्णय लेने का कि वह पहले से पूरी तैयारी के साथ आए थे।

जब हमने इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की तो एक ऐसा सच निकल कर आया है जो आपको हैरत में डाल देगा।

25 को मुख्यमंत्री ने कह दिया था – इसी बजट में करूंगा आप लोगों का संविलियन

बजट के लिए मुख्यमंत्री की 22 जनवरी को स्कूल शिक्षा मंत्री से विभागीय बैठक हुई थी और 23 जनवरी को पंचायत मंत्री टी एस सिंहदेव के साथ मुख्यमंत्री की बैठक हो चुकी थी। इसके बाद 26 जनवरी को मुख्यमंत्री का ध्वजारोहण के लिए जगदलपुर दौरा प्रस्तावित था। इधर स्कूल शिक्षा मंत्री और पंचायत मंत्री के जरिए अपनी बात पहले ही पहुंचा चुके संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों ने जगदलपुर के कार्यक्रम के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था और 60 से 70 लोगों की टीम प्रदेश संयोजक विवेक दुबे के तय की गई। रणनीति का पालन करते हुए सर्किट हाउस पहुंच चुकी थी। जहां मुख्यमंत्री का अल्पकाल के लिए विश्राम का कार्यक्रम था हाई सिक्योरिटी को देखते हुए जब सभी लोगों की मुलाकात मुख्यमंत्री से नहीं हो सकी तो वहां के स्थानीय विधायक राजमन बेंजाम जिन्हें स्वयं शिक्षाकर्मी दो बार अपने संविलियन के लिए ज्ञापन सौंप चुके थे उनसे संपर्क किया गया और वह केवल जिला संयोजक प्रकाश महापात्र को लेकर अंदर गए ।

इसके बाद क्या हुआ जानिए स्वंय जगदलपुर जिला संयोजक प्रकाश महापात्र की जुबानी

मैंने वहीं से विवेक सर को एक बार फिर फोन लगाया और जैसा उन्होंने मुझे बताया बस वैसा ही मैंने किया। जब मुख्यमंत्री बाहर निकल रहे थे तो मैंने उनका पैर छूकर प्रणाम किया और बस इतना कहा कि – भईया प्रणाम , मैं संविलियन अधिकार मंच का जिला संयोजक हूं पूरे प्रदेश के शिक्षाकर्मियों की तरफ से हम लोगों का आपसे बस एक ही निवेदन है कि हम लोगों का संविलियन कर दीजिए जैसा कि जन घोषणा पत्र में आप का वादा है। हम और हमारा परिवार जिंदगी भर आपके आभारी रहेंगे और पूरे समय हाथ जोड़कर खड़ा रहा।

मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए बोले – आभारी होने वाला कोई बात नहीं है, कर दूंगा।
उसके बाद शायद उन्हें मेरे मन मे चल रहे उथलपुथल को पढ़ लिया और मेरे कान में कहा “इसी बजट में कर दूंगा” और फिर प्यार से झिड़की लगाते हुए कहा की – पेपर में मत छपवा देना, सब बात को तुम लोग पेपर में छपवा देते हो और हंस कर चले गए।

बाहर मेरी टीम थी जिसे मुझे जाकर बताना था कि आखिर हुआ क्या मैंने फिर विवेक दुबे सर से बात की और उन्हें पूरा घटनाक्रम बताया उन्होंने मुझे तत्काल कहा कि 101% संविलियन हो रहा है। अब यह तय हो गया है आप बाहर जाइए और बस यह कहिएगा कि मुख्यमंत्री जी बोले हैं देखूंगा बजट में और न तो फोटो बाहर वायरल करना है न किसी अखबार में उनसे मुलाकात की खबर छपवाना है आप भूल जाओ कि हम उनसे मिले भी थे। हमें श्रेय नहीं चाहिए संविलियन चाहिए और यदि खबर छपवाते हैं तो फिर मुख्यमंत्री जी नाराज हो जाएंगे इसलिए किसी प्रकार का कोई खबर ही मत छपवाइए इस मुलाकात का। बाकी कोर ग्रुप और अन्य जिले के साथियों को जो इस मुलाकात का अपडेट का इंतजार कर रहे हैं मैं अपने हिसाब से मैसेज दे दूंगा आप निश्चिंत रहें। मैंने वैसा ही किया और आज मुझको बहुत गर्व होता है कि हम ऐसे रणनीतिकार के साथ जुड़े थे इस लड़ाई में, जो चाहता तो उस दिन ढिंढोरा पीट सकता था श्रेय लेने के लिए, पर उन्होंने खामोशी से इंतजार किया मुझको याद है।

आज भी उनकी लाइन जो उन्होंने मुझसे लास्ट में कहा था – प्रकाश भाई, संविलियन होने दो हमें बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि कौन मेहनत किया है और कौन नहीं, पूरा प्रदेश देख रहा है और आपके जगदलपुर के साथी खुद आपको सर आंखों पर बिठाएंगे। मुख्यमंत्री जी जो बोलते हैं डंके की चोट पर बोलते हैं डांटना होता है तो खुले मंच से डांट देते हैं उन्होंने बोला है इसी बजट में करूंगा तो कोई कुछ भी कर ले वह करेंगे तय है बस अपने को धैर्य रखकर समय का इंतजार करना है उनका बात खाली नहीं जाएगा।

आखिरकार वही हुआ जो उन्होंने सोचा था, आज जगदलपुर और प्रदेश में हर शिक्षाकर्मी साथी संविलियन अधिकार मंच और प्रकाश महापात्र को जानता है और सबको मालूम है कि हमने क्या कर दिखाया है ।

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