शिरडी में अनिश्चकालीन बंद….सांई के जन्मस्थान को लेकर विवाद…. पाथरी को जन्मस्थान बताने पर शिरडी के लोग नाराज़

शिरडी 19 जनवरी 2020।हिंदू और मुस्लिमों की आस्‍था के प्रतीक साईं बाबा कभी अपने चमत्‍कारों को लेकर चर्चा में रहते हैं तो कभी उनकी जाति को लेकर तरह-तरह की बातें होती है। इस बार विवाद का विषय है साईं बाबा का जन्‍म स्‍थान। उनके कुछ भक्‍त साईं बाबा का जन्‍म स्‍थान शिरडी को मानते हैं। शिरडी उनकी कर्मस्‍थली रही और यहीं उनका देहावसान भी हुआ। वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो उनका जन्‍म स्‍थान शिरडी को नहीं मानते। उन्‍हीं में से एक हैं महाराष्‍ट्र के नए मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे। उन्‍होंने अपने भाषण में साईं बाबा का जन्‍मस्‍थान पाथरी को बताकर नए विवाद को जन्‍म दे दिया है। शिरडी से 275 किमी दूर पाथरी के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये देने का भी ऐलान किया है। बस यहीं से विवाद शुरू हो गया है। शिरडी के साईं ट्रस्‍ट के कार्यकर्ता मुख्‍यमंत्री के इस बयान का विरोध कर रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार के पाथरी गांव में तीर्थस्थल विकसित करने के फैसले पर विवाद पैदा हो गया है।मुख्यमंत्री के बयान के बाद शिर्डी समेत आसपास के 25 गांव के लोग आंदोलित हैं। उनका कहना है- ‘‘पाथरी के विकास से आपत्ति नहीं है, लेकिन उसे साईं की जन्मभूमि कहना ठीक नहीं है। इससे पहले भी साईं बाबा और उनके माता-पिता के बारे में कई गलत दावे किए जा चुके हैं।’’ उन्होंने चेतावनी दी- जब तक सीएम अपने बयान को वापस नहीं लेते, तब तक वह आंदोलित रहेंगे।

 

साईं बाबा के जन्‍म स्‍थल विवाद के कारण 19 जनवरी से साईं मंदिर के भी अनिश्चित काल तक बंद रहने की खबर आई थी। इस बारे में शिरडी में साईं मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया है कि मंदिर पर बन्द का असर नहीं होगा।

साईं ट्रस्ट का बंद को समर्थन जरूर है लेकिन एक अहम बात जो ट्रस्ट ने साफ की है वो ये कि शिरडी बंद के दौरान मंदिर बंद नहीं रहेगा. मंदिर में आम दिनों की तरह आरती, पूजापाठ होता रहेगा और श्रद्धालुओं को साईं बाबा के दर्शन भी मिलेंगे, लेकिन शहर में बंद के चलते होटल और बाकी सुविधाओं के लिए श्रद्धालुओं को मुसीबत झेलनी पड़ सकती है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 9 जनवरी को अपने एक भाषण में परभणी जिले में स्थित पाथरी को साईं बाबा का जन्मस्थान बताते हुए उसके विकास के लिए 100 करोड़ रुपए की निधि देने का ऐलान किया था। सीएम ठाकरे के इस फैसले से शिरडी के लोग नाराज हो गए हैं। इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी साईं बाबा के जन्मस्थान को लेकर ऐसा ही एक बयान दिया था। राष्ट्रपति 1 अक्टूबर 2018 को साईं बाबा समाधि शताब्दी समारोह का उद्धघाटन करने आए थे। उस वक्त उन्होंने कहा था कि पाथरी गांव साईंबाबा का जन्मस्थान है और इसके विकास के लिए मैं काम करूंगा।

बाबा ने नहीं बताया था अपना जन्मस्थान
शिरडी के विधायक राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि इतने वर्षों से शिरडी साईं बाबा की भूमि रही है। राज्य सरकार के इस फैसले से करोड़ों साईं भक्तों को ठेस पहुंची है। बाबा के जन्मस्थान का यह विवाद बेबुनियाद है। शिरडी के लोगों का कहना है कि साईंबाबा ने कभी नहीं बताया उनका जन्म कहा हुआ था।

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