क्रमोन्नति से होगी वेतन विसंगति की पीड़ा कम, 22 वर्षों की पीड़ा का अंत करो सरकार

जनघोषणा पत्र के क्रियान्वयन हेतु शिक्षकों का भुपेश सरकार से गुहार

दंतेवाड़ा 28 अगस्त 2020। क्रमोन्नति की है दरकार हमारा भी हित करिये सरकार, 22 वर्षों की तपस्या का फल देना होगा। अब तो वेतन विसंगति दूर करना होगा। इस नारे व अभियान के तहत प्रांताध्यक्ष संजय शर्मा जी के नेतृत्व में पूरे छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे चरणबद्ध ज्ञापन के अंतर्गत चतुर्थ चरण का ब्लॉक स्तरीय मांग पत्र ब्लॉक अध्यक्ष सुभाष कोडोपी सचिव भरत कुमार दुबे उपाध्यक्ष खेमलाल सिन्हा व पंकज नेताम के नेतृत्व में तहसीलदार कटेकल्याण विजय कोठार जी के माध्यम से मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन व मुख्य सचिव के नाम से ज्ञापन सौंपा गया। ब्लॉक मीडिया प्रभारी कुमार परचाकी व नरेश साहू ने बताया कि प्रथम चरण में प्रांतीय कार्यकारणी द्वारा राज्य स्तर पर ज्ञापन द्वितीय चरण में सम्भाग मुख्यालयों में तृतीय चरण में जिलाध्यक्ष उदय शुक्ला व नोहर सिंह साहू जिला सचिव के नेतृत्व में ज्ञापन कलेक्टर महोदय को सौपा गया था।

आगे ब्लॉक प्रवक्ता योगेश पटेल ने बताया कि एक ही पद पर 22 वर्षों से बिना क्रमोन्नति, बिना पदोन्नति के सहायक शिक्षकों के गलत वेतन निर्धारण से उपजी वेतन विसंगति की समस्याओं को लेकर छह सूत्री मांग पदोन्नति, क्रमोन्नति, वेतन विसंगति, पुरानी पेंशन बहाली, अनुकम्पा नियुक्ति, लंबित महंगाई भत्ता,जुलाई 2020 से संविलियन, व दो वर्ष की प्रत्येक सेवा अवधि पर वेटेज निर्धारण की मांगों को पूरा कराने हेतु मांग स्मरण पत्र सौपा गया, शिक्षा कर्मी से लेकर शिक्षक बनने तक का हमारा 22 वर्षों के संघर्ष के बाद भी हम अन्य कर्मचारियों को प्राप्त होने वाले विभिन्न सुविधाओं से वंचित है। आज भी सभी विभागों में पदोन्नति क्रमोन्नति जारी है, लेकिन शिक्षा विभाग में शिक्षक एल.बी.संवर्ग के साथ ही ऐसा भेदभाव क्यो 1998 से लेकर 2020 तक एक ही पद में बिना पदोन्नति के सेवा दे रहे है।

2004 से बंद की गई पुरानी पेंशन के जगह कर्मचारियों को NPS रूपी अभिशाप दे दिया गया जो आज अंशदायी पेंशन योजना कर्मचारियों के लिए दुःखदायी साबित हो रही है,वेतन निर्धारण में की गई त्रुटियों की वजह से सहायक शिक्षक 2013 से वेतन विसंगति की दंश झेल रहा है। 2018 में संविलियन के पश्चात यह अंतर अब गहरे खाई का रूप ले लिया है जिससे एक वर्ग हमेशा नाखुश व सरकार के निर्णयों से असंतुष्ट है। शिक्षा कर्मी के पद पर रहते हुए सेवा देते मृत्य के गाल में समा गए उन शिक्षकों के परिजन आज भी अनुकम्पा नियुक्ति की जटिलताओं में उलझे है अनुकम्पा का मतलब होता है। दया लेकिन योग्यताओं का इतना भार परिजनों के कंधों पर डाल दिया गया है जैसे प्रथम श्रेणी में हायर सेकंडरी, डी. एड./बी.एड. व शिक्षक पात्रता परीक्षा TET जिससे अनुकम्पा नियमित के लाभ से सभी वंचित है,सरकार से विधानसभा के बजट सत्र में विधानसभा पटल पर जुलाई 2020 से संविलियन की घोषणा की थी व शिक्षा कर्मी प्रथा को समाप्त करने की पहल की थी लेकिन सरकार ने नवम्बर 2020 से संविलियन का आदेश जारी किया जिससे सभी शिक्षकों को निरशाव्याप्त है। सरकार से आग्रह किया गया कि अपने घोषणा अनुरूप जुलाई 2020 से ही संविलियन किया जाए व प्रत्येक 2 बर्ष की पूर्ण अवधि पर वेटेज दिया जाए।

आज के इस कार्यक्रम दिनेश गवेल,परमानन्द ध्रुव,सूर्यकान्त सिन्हा, संजय देवांगन, अनिल ठाकुर ,टांके लाल मरकाम,शिव नेताम,अनिल यादव,जानू राम पोयाम, शंकर मरकाम,जिजोधन बढ़ाई, रामानन्द कुलदीप, माधुरी सिन्हा,शशि पोयाम, मल्लिका श्रीरांगे, करन सिंह नेताम,प्रतिमा लकड़ा,अश्वनी साहू,मीरा साहू,भोजेन्द्र ठाकुर,यामिनी कोर्राम, प्रीति यादव,जागेश्वर फरदिया, प्रतिमा लकड़ा, शंकुतला दर्रो,प्रेम सिंह ठाकुर व अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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