क्रमोन्नति के मामले में शिक्षाकर्मियों को एक और लगा झटका, आदेश हुआ निरस्त…… कई जिलों के आदेश हो चुके हैं निरस्त… पढ़िए आखिर क्यों बन रही है ऐसी स्थिति….क्रमोन्नति की लड़ाई में आखिर कहां हो रही है चूक ??

रायपुर 7 जनवरी 2020। जैजैपुर अंतागढ़ और दुर्ग समेत कई जगहों के बाद अब बलरामपुर के भी शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति वेतनमान के मामले में बड़ा झटका लगा है जो आदेश जनपद पंचायत बलरामपुर से जारी किया गया था और स्थानीय निधि संपरीक्षा से कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए जल्द से जल्द सेवा पुस्तिका के सत्यापन की बात कही गई थी उसी आदेश को अब मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बलरामपुर ने निरस्त कर दिया है और इसके पीछे की वजह पंचायत संचालनालय से जारी हुए आदेशों को बताया गया है । पंचायत के जिस आदेश का हवाला दिया गया है वह आदेश 23 सितंबर को जारी हुआ था जबकि बलरामपुर जनपद पंचायत द्वारा जो आदेश जारी किया गया था वह 6 दिसम्बर का था और विकास खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जो पत्र जारी किया गया था वह 20 दिसम्बर का है इसका सीधा सा मतलब है कि उच्च कार्यालय द्वारा जारी किए गए निर्देशों की अवहेलना करते हुए 3 माह बाद जनपद और विकासखंड बलरामपुर द्वारा आदेश जारी किया गया था जिसे अब निरस्त किया गया है ।

आखिर क्यों बन रही है बार-बार ऐसी स्थिति

दरअसल निम्न कार्यालय के अधिकारी बिना हाईकोर्ट के आदेश का ढंग से अवलोकन किए बिना आनन-फानन में आदेश जारी कर देते हैं और बाद में जब बात राज्य कार्यालय तक पहुंचती है तो आदेश निरस्त करना पड़ता है । इसका सबसे बड़ा नुकसान उन शिक्षाकर्मियों को हो रहा है जो क्रमोन्नति की राह देख रहे हैं और लगातार न्यायालय के जरिये क्रमोन्नति की लड़ाई लड़ रहे हैं , उनकी उम्मीदें जगा कर विभाग बार-बार अपने आदेश निरस्त कर रहा है जिससे भ्रम की स्थिति भी पैदा हो रही है और शिक्षाकर्मियों की नेतागिरी करने वाले आम शिक्षाकर्मियों को इन्हीं आदेशों का हवाला देकर बार-बार चंदा वसूली कर न्यायालय पहुंचने का खेल खेल रहे हैं जबकि अब तक दायर हुए कई दर्जन केस में से किसी में भी कोई अलग आदेश जारी नहीं हुआ है सभी केस में अभ्यावेदन सौंपने का ही आदेश जारी हुआ है और विभाग इस पर अपनी स्थिति पहले ही क्लियर कर चुका है ।

आखिर क्यों नहीं मिल पा रहा शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नत वेतनमान

प्रदेश में शिक्षाकर्मियों ने एक लंबी लड़ाई लड़कर क्रमोन्नत वेतनमान हासिल किया था लेकिन जैसे ही शिक्षाकर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान मिला उसी समय यह विभाग द्वारा स्पष्ट उल्लेख कर दिया गया था की पुनरीक्षित वेतनमान दिए जाने के कारण क्रमोन्नत वेतनमान को भूतलक्षी प्रभाव से निरस्त किया जाता है और यही निरस्तीकरण आदेश कोर्ट के मामले में भी शासन के लिए बड़ा आधार साबित हुआ है कोर्ट में जितनी भी याचिकाएं क्रमोन्नत वेतनमान के संबंध में दायर हुई सभी में एक ही आदेश हुआ है की शासन के समक्ष याचिकाकर्ता अपना अभ्यावेदन सौंपे और क्रमोन्नत वेतनमान निरस्तीकरण आदेश को आधार बनाकर ही पंचायत विभाग ने फिलहाल क्रमोन्नत वेतनमान देने से अपना पल्ला झाड़ लिया है । जिला शिक्षा अधिकारियों से भी स्पष्ट आदेश जारी होना कहीं न कहीं क्रमोन्नत वेतनमान की राह देख रहे शिक्षाकर्मियों के लिए झटका है और साथ ही इस बात का संकेत भी की क्रमोन्नति की लड़ाई में शिक्षाकर्मी कम से कम सही पटरी पर नहीं है और उन्हें जो भी लाभ मिलेगा वह स्कूल शिक्षा विभाग से नहीं बल्कि पंचायत विभाग से मिलेगा और स्कूल शिक्षा विभाग ने संविलियन देते समय ही सहमति पत्र भरा कर और उनकी पूर्व सेवा की गणना न करके खुद को पूर्व के सारे विवादों से दूर कर लिया है ।

बड़ा सवाल – क्या शिक्षाकर्मी संघ ही गुमराह कर रहे शिक्षाकर्मियों को ?

सोशल मीडिया में कुछ नेता अपने नाम से लगातार कुछ महीनों से जिस प्रकार आम शिक्षाकर्मियों के लिए पोस्ट डाल रहे हैं और जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है उससे कहीं न कहीं यह लगता है की शिक्षाकर्मी नेता ही नहीं चाहते कि आम शिक्षाकर्मी वास्तविकता को समझें । पहले आम शिक्षाकर्मियों को इस बात को लेकर गुमराह किया गया कि स्कूल शिक्षा सचिव ने पंचायत सचिव को आदेश जारी किया है की शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति वेतनमान का भुगतान करें जबकि इसके पीछे की वास्तविकता यह है कि एक विभाग के सचिव लेवल का अधिकारी दूसरे विभाग के सचिव लेवल के अधिकारी को निर्देशित कर ही नहीं सकता दोनों समकक्ष अधिकारी हैं । वास्तव में स्कूल शिक्षा विभाग ने जो आदेश जारी किया था उसमें उन्होंने बताया था की पंचायत विभाग से उनकी सहमति बन चुकी है और पुराने सभी देय राशियों का भुगतान वही करेंगे यह कहकर स्कूल शिक्षा विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया था लेकिन स्वाभाविक सी बात है कि पंचायत विभाग कोई भी देय राशि का भुगतान तभी करेगा जब वह इस बात के लिए सहमत हो की इस राशि का भुगतान करना है और बार-बार पंचायत विभाग जनपद से जारी किए गए आदेशों को इसी आधार पर निरस्त करवा रहा है कि शिक्षाकर्मियों को क्रमोन्नति वेतनमान देने का कोई आदेश विद्यमान है ही नहीं और पूर्व में जो आदेश जारी हुआ था उसे तत्कालीन सरकार ने पुनरीक्षित वेतनमान देते समय निरस्त कर दिया था इसी तथ्य को विभाग ने न्यायालय के सामने भी रखा था जिसके चलते उच्च न्यायालय ने भी शिक्षाकर्मियों के पक्ष में कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया बल्कि शासन को ही अभ्यावेदन सौंपने का आदेश जारी कर दिया जिसका क्या हाल है यह किसी से छिपा नहीं है सैकड़ों क्रमोन्नति के केस न्यायालय में दायर होने और उनमें फैसला आने के बावजूद किसी शिक्षाकर्मी को लाभ नहीं मिल सका और शिक्षाकर्मी बिना पूर्व के आदेशों के निर्णय का अध्ययन किए लगातार याचिका दायर करते रहे इन सबके बावजूद कुछ नेताओं द्वारा जिस प्रकार शिक्षाकर्मियों से फॉर्म भरवाने का खेल खेला जा रहा है और अधिकारियों से मिलकर जल्दी क्रमोन्नति वेतनमान मिलने का दावा किया जाता है उससे साफ समझ में आता है कि कहीं न कहीं हकीकत कुछ और है और राजनीति कुछ और ।

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