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चिराग पासवान एक्शन में , चाचा पशुपति पारस, भाई प्रिंस राज सहित पांच सांसद को किया LJP से सस्पेंड

चिराग पासवान एक्शन में , चाचा पशुपति पारस, भाई प्रिंस राज सहित पांच सांसद को किया LJP से सस्पेंड
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By NPG News

पटना 15 जून 2021. लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अब एलानिया दो हिस्‍सों में बंटती दिख रही है. इसी के साथ पार्टी पर कब्जे को लेकर पशुपति कुमार पारस और चिराग पासवान खेमे में लड़ाई तेज हो गई. लोजपा संसदीय दल के नये नेता पशुपति कुमार पारस ने मंगलवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक दिल्ली में अपने आवास पर बुलायी और चिराग पासवान को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से भी हटा दिया. पारस खेमा ने पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सूरज सिंह उर्फ सूरज भान सिंह को लोजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष व चुनाव प्रभारी की जिम्मेवारी दी. इस फैसले के तत्काल बाद चिराग पासवान ने पलटवार करते हुए देर शाम राष्ट्रीय कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक की और बागी पांचों सांसद (पशुपति कुमार पारस, चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी, प्रिंस राज और चंदन सिंह) को पार्टी से निकाल दिया.

वहीं, शाम को चिराग पासवान ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई और पांचों सांसदों को निलंबित कर दिया. बैठक से पहले पटना में चिराग के समर्थकों ने चाचा पशुपति कुमार पारस के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा किया. समर्थकों ने पशुपति पारस समेत सभी 5 सांसदों और नीतीश कुमार की तस्वीरें भी जलाईं.

चिराग ने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस के नाम इस साल होली के पहले जारी एक पत्र को ट्वीटर पर साझा किया है. पार्टी सूत्रों ने बताया कि चिराग पासवान ने कहा कि अगल साल 2022 में यूपी समेत जिन चार राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, वहां लोजपा पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरेगी.

जानकारी के मुताबिक चिराग पासवान ने मंगलावर को लोजपा कार्यसमिति की वर्चुअल बैठक कर बगावत करने वाले अपने चाचा पशुपति पारस समेत सभी 5 सांसदों को पार्टी से बाहर कर दिया. इसके बाद उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद पर अपना दावा पेश किया. इसके साथ ही उन्होंने साफ कहा कि उनका बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट कार्यक्रम चलता रहेगा और बिहार सरकार के खिलाफ वह अपने आंदोलन को चलाते रहेंगे.

इधर, बागी गुट ने एलजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में सूरजभान सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष चुना है. सूरज भान सिंह को पांच दिन के भीतर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करवाने को भी कहा गया है. बताया जा रहा है कि चुनाव में पशुपति पारस की ताजपोशी की जाएगी.

बताते चलें कि चिराग की तरफ से पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारणी की वर्चुअल बैठक की गयी. बैठक में पारस की ओर से लिए गये निर्णय को पार्टी संविधान के खिलाफ बताया गया. गौरतलब है कि सुलह-समझौते की सारी कोशिशों के विफल होने के बाद भी चिराग ने हार नहीं मानी है. वह हर हाल में पार्टी पर अपना कंट्रोल बनाए रखना चाहते हैं.

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