अफसर आगे, लोग पीछे

संजय के दीक्षित
तरकश, 27 दिसंबर 2020
आईएएस, आईपीएस अफसरों के बारे में माना जाता है कि जिन इलाकों में वे रहते हैं, वहां डेवलपमेंट अपने आप हो जाता है। आखिर राजधानी का धरमपुरा क्या था…वीआईपी रोड से पीछे झाड़ियों से पटा हुआ जंगल। हाउसिंग बोर्ड ने वहां कौड़ियों के भाव जमीन उन्हें दी और अफसरों ने लपक लिया तो लोगों को लगा सबसे होशियार कहे जाने वाली इस कौम को क्या हो गया है। लेकिन, तत्कालीन पीडब्डूडी सिकरेट्री ने कालोनी के बीच से ऐसा फोर लेन रोड निकाला कि उस इलाके का कायापलट हो गया। रेट इस कदर जंप हुआ कि भोपाल में रहने वाले एक पूर्व चीफ सिकरट्री ने 11 गुना अधिक रेट में 4 हजार स्क्वायर फुट का अपना प्लाट बेचा है। धरमपुर की देखादेखी लोग अब नया रायपुर के सेक्टर 15 में प्लाट लेने टूट पड़े हैं। वजह यह कि इस सेक्टर में अनेक आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अफसरों ने प्लाट लिया है। लोगों को लग रहा कि बड़े अधिकारी अगर सेक्टर 27 को छोड़कर सेक्टर 15 शिफ्थ हो रहे हैं तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में यह सेक्टर सबसे प्राइम हो जाएगा। क्योंकि, बड़े अधिकारी कैलकुलेशन के बिना कोई काम नहीं करते।

ब्यूरोक्रेट्स और 2020

देश की सर्वश्रेष्ठ सर्विस आईएएस, आईपीएस, आईएफएस का 2020 कैसा बीता….यह जानने की उत्सुकता लोगों को रहती है। खासकर आईएएस की….तो उनका व्हाट्सएप ग्रुप बहुत कुछ कह देता है। पहले आईएएस के ग्रुप में क्रांतिकारी बातें होती थी। लाल सलाम जैसा। कमेंट, तंज, फैसलों से सहमत, असहमत सामान्य बात थी। और अभी…..जन्मदिन की बधाई से अधिक कुछ नहीं। इस समय नौकरशाहों की स्थिति नई बहुरिया टाईप हो गई है। नई बहुरिया अपने मेें सिमटी होती है….न अपने कमरे से बाहर निकलना, न ज्यादा बोलना… दूर-दूर रहना। कुछ वैसी स्थिति ब्यूरोक्रसी की हो गई है। शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जब कहा था कि अफसर अब सरकार नहीं चलाएंगे तो अधिकारियों को इस पर एतबार नहीं हुआ। 15 साल सत्ता में रहे अधिकारियों को राजनीति की बात लगी। लेकिन, अब……? बाकी आप समझ जाइये।

सफेद हाथी

एनआरडीए की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि बैंक ने एनपीए घोषित कर दिया है। सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट बनाने के लिए एनआडीए ने 1378 करोड़ रुपए का लोन लिया था, कई महीने से उसका ईएमआई जमा नहीं हो पा रहा। करीब 20 करोड़ उसका ईएमआई है। तीन ठेकेदारों ने पेमेंट न होने के कारण नया रायपुर का काम बीच में ही बंद कर दिया। पौने नौ करोड़ बिजली बिल पहुंच गया है। मंत्रालय और इंद्रावती भवन का महीने का बिजली बिल करीब एक करोड़ आता है। इस सफेद हाथी को अब स्मार्ट सिटी के एक हजार करोड़ का सहारा है। गनीमत है, केंद्र ने इसे स्मार्ट सिटी में शामिल कर लिया। स्मार्ट सिटी के तहत नया रायपुर को दो सौ करोड़ रुपए मिल चुका है। अभी 800 करोड़ और मिलना है। नया रायपुर वैसे भी स्मार्ट सिटी जैसा बना है। इसलिए, उसमें एक्सट्रा काम होना नहीं है। सो, 800 करोड़ में डेवलपमेंट का ही काम होगा। अभी स्मार्ट सिटी के एकाउंट में सौ करोड़ पड़ा है। 800 ओर आ जाएगा। यानी 900 करोड़। एनआरडीए भले ही डिफाल्टर हो जाए, मगर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में तो बल्ले-बल्ले है।

पुनर्वास के लिए आईएएस नहीं

बिजली विनियामक आयोग में नए चेयरमैन की निुयक्ति की हलचल तेज हो गई है। चेयरमैन डीएस मिश्रा के रिटायरमेंट में अभी तीन महीने बचे हैं। लेकिन, नोटिफिकेश्न से लेकर पोस्ट एडवरटाइज और फिर नियुक्ति की प्रक्रिया में वक्त तो लगता ही है। डीएस हालांकि इस पद पर करीब ढाई साल ही रह पाए। चेयरमैन का कार्यकाल पांच साल या फिर 65 वर्ष उम्र है। डीएस 2 अप्रैल को 65 साल के हो जाएंगे। दरअसल, एसीएस से रिटायरमेंट के बाद करीब डेढ़ साल तक उन्हें पोस्टिंग के लिए इंतजार करना पड़ा। फिर पहले उन्हें सहकारिता आयोग का कमिश्नर बनाया गया। उसके बाद सितंबर 2018 में बिजली नियामक आयोग का चेयरमैन। बहरहाल, आयोग का नया चेयरमैन इस बार कोई आईएएस नहीं होगा, इस बात के संकेत मिल रहे हैं। पुनवार्स के लिए इस समय इस लेवल का कोई आईएएस है भी नहीं। चेयरमैन रिटायर चीफ सिकरेट्री या एडिशनल चीफ सिकरेट्री का पद है। केडीपी राव को छोड़कर इस लेवल का कोई रिटायर आईएएस छत्तीसगढ़ में नहीं हैं। केडीपी राव अक्टूबर 2019 में रिटायर हुए थे। अभी तक सरकार ने उन्हें कोई पोस्टिंग दी नहीं। हो सकता है, सरकार किसी गैर आईएएस को आयोग का चेयरमैन अपाइंट कर दे।

अजब-गजब

रेणुका सिंह छत्तीसगढ़ से इकलौती केंद्रीय मंत्री हैं। लेकिन, ताज्जुब यह कि बीजेपी की कोर कमेटी में वे नहीं हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी कोई भूमिका नहीं होती। न वे कभी किसी बड़े मंच पर नजर आतीं न पार्टी कार्यालय की मीटिंग में। वाकई यह विस्मित करती है।

युद्धवीर इसलिए भड़के?

युद्धवीर जूदेव लंबे समय से पार्टी से खफा चल रहे हैं। मरवाही चुनाव के वक्त उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को मरवाही से चुनाव लड़ने के लिए पत्र लिख दिया था। अभी उन्होंने सीएम की तारीफ कर बीजेपी नेताओं के कान खड़े कर दिए। दरअसल, जशपुर की राजनीति से युद्धवीर पहले ही बाहर हो चुके हैं। उन्होंने चंद्रपुर को अपना ठिकाना बना लिया। लेकिन, यह नया इलाका भी उनके हाथ से निकल गया। उनकी पत्नी पिछले चुनाव में एक अल्पज्ञात नेता से पराजित हो गईं। उधर, उनके छोटे भाई प्रबल प्रताप जशपुर में अपनी जमीन मजबूत करने लगे हैं। पार्टी भी प्रबल को प्रमोशन देते हुए उन्हें प्रदेश पदाधिकारी बना दिया। हालांकि, पार्टी ने युद्धवीर को भरपूर मौका दिया…फिर भी हाल की उपेक्षाओं से युद्धवीर आहत हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक बड़े आईएएस का अचानक लो प्रोफाइल में आने की वजह क्या है?
2. कांग्रेस के किस बड़े नेता ने गोवहाटी के एक प्रसिद्ध मंदिर में अनुष्ठान कराया है?

 

Spread the love
error: Content is protected By NPG.NEWS!!