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Shirisha ke sevan ke Fayde: माइग्रेन, दमा और मसूड़ों की समस्याओं के लिए है रामबाण औषधि; जानिए शिरीष वृक्ष के चमत्कारिक औषधीय गुण!

Shirisha ke sevan ke Fayde: शिरीष, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एल्बिज़िया लैबेक (Albizia lebbec) कहते हैं। यह एक बड़ा सुंदर फूलों वाला वृक्ष होता है जिसकी छाल, पत्ती, बीज व फूल सभी एक रामबाण औषधि की तरह कार्य करते हैं। यहां तक कि इसके रस को सर्पदंश में भी उपयोग किया जाता है। आईए जानते हैं शिरीष के चमत्कारिक औषधिय गुण।

Shirisha ke sevan ke Fayde: माइग्रेन, दमा और मसूड़ों की समस्याओं के लिए है रामबाण औषधि; जानिए शिरीष वृक्ष के चमत्कारिक औषधीय गुण!
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By Chirag Sahu

Shirisha ke sevan ke Fayde: प्राचीन समय की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में कई ऐसी औषधीयो का वर्णन है जो सामान्य से लेकर कई गंभीर बीमारियों से मुक्ति दिला सकती है। आज हम एक ऐसी औषधि के बारे में बात करने वाले हैं जो आपको रोजमर्रा में होने वाली सिर दर्द साथ ही मसूड़े व त्वचा संबंधित समस्याओं को जड़ से खत्म कर सकती है। इस औषधि का नाम है शिरीष, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एल्बिज़िया लैबेक (Albizia lebbec) कहते हैं। यह एक बड़ा सुंदर फूलों वाला वृक्ष होता है जिसकी छाल, पत्ती, बीज व फूल सभी एक रामबाण औषधि की तरह कार्य करते हैं। यहां तक कि इसके रस को सर्पदंश में भी उपयोग किया जाता है। आईए जानते हैं शिरीष के चमत्कारिक औषधिय गुण।

गंभीर सिरदर्द/माइग्रेन का है रामबाण इलाज

माइग्रेन एक ऐसी समस्या है जो अधिकतर व्यक्तियों को परेशान करती है। ऐसे में शिरीष का सेवन काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर में वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करता है। आयुर्वेद शास्त्रों में इसे अर्धावभेदक के नाम से जाना जाता है जो माइग्रेन के लिए एक रामबाण औषधि है। इसके फलों व जड़ों के दो बूंद रस को नाक में डालने से सिर दर्द व माइग्रेन की समस्या काफी कम हो सकती है।

श्वसन संबंधी बीमारियों में सहायक

वे लोग जिन्हें सांस से संबंधित समस्या जैसे दमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जिक राइनाइटिस आदि है तो उनके लिए इसका सेवन अत्यंत लाभदायक रहेगा। इसके छाल से बने काढ़े के सेवन से श्वास नलियों में आई सूजन दूर होती है और फेफड़ों में जमा कफ भी ढीला होने लगता है। इसमें पाए जाने वाले तत्व, मास्ट सेल्स को नियंत्रित करते हैं जिससे हिस्टामाइन का स्त्राव होता है और हमारा शरीर एलर्जी आदि से बचा रहता है।

जोड़ों के दर्द से मिलती है राहत

60 उम्र होने के बाद अक्सर लोगों को जोड़ों में दर्द की समस्या अवश्य बन जाती है। हड्डियों का लगातार क्षरण होते रहने से जोड़ों में काफी पीड़ा बनी रहती है। शिरीष की छाल और बीज में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो गठिया के दर्द को कम करने में सहायक है। इसके लिए आपको इसके बीजों का एक लेप तैयार करना है और उसे दर्द वाली जगह पर लगाने से सूजन जरूर कम होती है।

इस औषधि के अन्य फायदे

  • त्वचा से संबंधित समस्याओं के लिए है फायदेमंद। यह शरीर के रंग को निखारता है और चर्म रोगों जैसे एक्जिमा, सोरायसिस व खुजली से छुटकारा भी दिलाता है।
  • ऐसे लोग जिन्हें दांतों व मसूड़े की समस्याएं हैं उनके लिए शिरीष का सेवन जरूर फायदेमंद रहेगा। यदि आपको मसूड़ों से खून आना और मुंह में छालों की समस्या लगातार बनी रहती है तो इसके काढ़े से नियमित कुल्ला करें। इसके जड़ का मंजन बनाकर भी घिसा जा सकता है।
  • आंखों में एलर्जी की समस्या से भी मिलता है निदान। कई लोगों में कंजंक्टिवाइटिस अर्थात आंख में जलन की समस्या हो जाती है। ऐसे शिरीष के पत्तियों का रस काजल की तरह आंखों में लगाना चाहिए।
  • दस्त और पाचन को लेकर बनी समस्याओं के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है। इसके छाल में संकोचक गुण (Astringent) पाए जाते हैं, जो आंतों में चल रही पाचन क्रिया को संतुलित करता है।

कैसे करें शिरीष का सेवन

शिरीष एक ऐसा वृक्ष है जिसकी जड़, पत्ती, छाल, फुल और बीज सभी एक औषधि की तरह कार्य करते है। इसका सेवन काढ़ा बनाकर या फिर चूर्ण की तरह भी किया जा सकता है। साथ ही इसके छाल व बीजों का लेप बनाकर भी प्रभावित जगह पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

अस्वीकरण/Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी देने के लिए लिखी गई है। इसके उपयोग से पहले उचित चिकित्सकीय परामर्श जरूर ले। NPG.NEWS इसके लिए किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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