सर्दियों में खाइए ये रोटियाँ: मक्का, बाजरा, कुट्टू, रागी, बथुआ और बेसन... इनसे बनी रोटियों का ज़ायका है कमाल और फायदे बेमिसाल

NPG DESK
सर्दियों में खाइए ये रोटियाँ: सर्दियों से भारतीय रसोई में सर्दियों के मौसम में तरह-तरह के अनाजों और भाजियों से रोटी-पराठे बनाने का चलन है। इनका स्वाद तो निराला होता ही है, फायदे भी इनसे भरपूर मिलते हैं। मेथी, पालक के रोटी-पराठे तो प्रायः हर घर में बनते हैं लेकिन बाजरा, बथुआ, मक्का, कुट्टू और रागी, बेसन आदि की रोटियाँ भी स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद हैं। आइए आज अपेक्षाकृत कम बनाई जाने वाली इन्हीं रोटियों के फायदे जानते हैं।
मक्के की रोटी
मक्के की रोटी स्वाद में तो भरपूर होती ही है, सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। इसमें मैगनीज, पोटेशियम, जिंक, आयरन, फॉस्फोरस, कॉपर, सेलेनियम, विटामिन-ए और दूसरे एंटी-ऑक्सीडेन्ट्स भी पाये जाते हैं।जो हमारी इम्यूनिटी मजबूत बनाने के साथ ही हमारी आंखों के लिये भी बहुत फ़ायदेमंद है।मक्के में विटामिन्स और मिनरल्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है और यह फाइबर से भी भरपूर होता है।मक्के के आटे से बनी रोटी में कैरोटिनॉयड और विटामिन-ए की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसलिये यह हमारी सेहत और खासकर आंखों के लिये बहुत फ़ायदेमंद है।
मक्के में पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो हमारे ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने नहीं देता। इस तरह मक्के के आटे की रोटी हृदय-रोगों में भी बहुत कारगर है। साथ ही मक्के में फाइबर पाये जाने की वज़ह से इसे खाने से हमें कब्ज यानी कांस्टीपेशन की समस्या से भी काफी राहत मिलती है।मक्के की रोटी में पाया जाने वाला विटामिन-बी ब्लड-प्रेशर और हाइपरटेंशन जैसी समस्याएं भी दूर करता है।
बाजरे की रोटी
बाजरे में काफी मात्रा में कैल्शियम, मैगनीज, फास्फोरस, फाइबर, विटामिन बी, मैग्नीशियम और कई तरह के एंटीआक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। बाजरे से बनी रोटियां और पराठे खाने से आपके शरीर को पोषण और ऊर्जा तो मिलती ही है। इसमें कैल्शियम की मात्रा काफी होने की वजह से हड्डियां भी मज़बूत होती हैं।इसके साथ ही बाजरे में नियासिन नाम का विटामिन भी पाया जाता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है,जिससे दिल की बीमारी होने का खतरा भी कम होता है। क्योंकि इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम की मात्रा भी पायी जाती है, इसलिए ये ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी सहायता करता है। पाचन क्रिया को भी ये दुरुस्त रखता है, जिससे गैस और कब्ज़ जैसी दिक्कत भी नहीं होने पाती है।
बेसन की रोटी
बेसन को गेहूं के आटे के साथ मिला कर रोटी बनाई जाती है। जो लोग अपने दैनिक जीवन में बेसन का सेवन करते हैं, उनके शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट इकट्ठा नहीं होता है। असल में बेसन में मौजूद फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन और कॉपर वजन को नियंत्रित रखने में मददगार होते हैं। बेसन का सेवन करने से आंतों की कमज़ोरी भी दूर होती है, जिससे पाचन तंत्र सही प्रकार से काम करता है।
इसके साथ ही बेसन की रोटी दिल के मरीजों के लिए भी फायदेमंद होती है। एनीमिया, आयरन की कमी से होता है। बेसन में फाइबर, प्रोटीन, फोलेट और आयरन होता है। एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है और बेसन का सेवन करने से आपको पर्याप्त आयरन मिलता है। इसके साथ ही ये लाल रक्त कोशिकाओं को भी बेहतर बनाता है।
बथुआ की रोटी
जिन लोगों को वजन कम करना है उन्हें बथुआ रोटी बनाकर खाना चाहिए। बथुए में फाइबर की अच्छी मात्रा मौजूद होती है। इसका सेवन करने से आपका वजन नहीं बढ़ेगा। बथुआ रोटी का सेवन करने से आपकी आंखों की रौशनी भी अच्छी रहती है। बथुआ में विटामिन ए, जिंक, आयरन मौजूद होता है जिसका सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। इसका साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ में जिंक होता है जो शुक्राणुवर्धक है। है। बथुआ कब्ज दूर करता है और अगर पेट साफ रहेगा तो कोई भी बीमारी होगी ही नहीं, ताकत और स्फूर्ति बनी रहेगी। इसलिए जब तक इस मौसम में बथुए का साग मिलता रहे, रोज़ इसकी सब्जी खाएं। बथुए में नमक, जीरा और नींबू को उबाल कर उसके सेवन से यूरीन से जुड़ी समस्याओं का निवारण होता है।
रागी की रोटी
रागी में आयरन, कैल्शियम, मेथोनाइन, अमीनो अम्ल, सोडियम, जिंक, मैग्नीशियम, विटामिन B1, विटामिन B2, विटामिन B3, कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, फाइबर, फॉस्फोरस, प्रोटीन, आयोडीन और कैरोटीन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। कैल्शियम की मात्रा काफी होने की वजह से इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं।साथ ही एमिनो एसिड होने की वजह से ये स्किन को एजिंग से बचाता है।इसमें मौजूद आयरन शरीर में खून की कमी नहीं होने देता है। मानसिक तनाव की स्थिति में भी ये राहत पहुंचाता है।रागी का आटा वजन कम करने और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में भी सहायक है।
कुट्टू की रोटी
आमतौर पर फलाहार के लिए कुट्टू के आटे का प्रयोग होता है। लेकिन आम दिनों में भी इसे भोजन में शामिल करना चाहिए। कुट्टू में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, जिंक, कॉपर, आयरन, फास्फोरस, फाइबर, फोलेट, पोटैशियम, प्रोटीन, नियासिन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं।ये हड्डियों और दांतों को तो मज़बूती देते ही हैं, इसके साथ ही इसमें मौजूद अल्फा लाइनोलेनिक एसिड होता है,जो बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाकर गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट रूटीन ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक होता है। इसमें अघुलनशील फाइबर भी काफी मात्रा में होता है, जो गॉलब्लैडर में पथरी होने की दिक्कत कम करता है।
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