Begin typing your search above and press return to search.

सिकलसेल और स्टेरॉयड इंजेक्शन से बढ़ी समस्या, ऑस्टियोनेक्रोसीस का बोनमेरो से इलाज...संभव, बशर्ते समय पर हो पहचान

सिकलसेल और स्टेरॉयड इंजेक्शन से बढ़ी समस्या, ऑस्टियोनेक्रोसीस का बोनमेरो से इलाज...संभव, बशर्ते समय पर हो पहचान
X
By NPG News

रायपुर 10 दिसम्बर 2021। इन दिनों ऑस्टियोनेक्रोसिस का खतरा बढ़ गया है। बॉडी के किसी भी हिस्से में जब खून रूक जाता है तो ऑस्टियोनेक्रोसिस की प्रॉब्लम होती है। सिकलसेल और दवाओं में स्टेरॉयड के इस्तेमाल से यह समस्या बढ़ रही है। इस बीमारी में कूल्हे की हड‌्डी में ब्लड सर्कुलेशन कम होने लगता है।

खास बात यह कि ये बीमारी यंग एज में होने लगी है। यानी अगर 18 साल में भी हो सकती है। यह कहा शहर के जानेमाने आर्थोपेडिक एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन एवं डायरेक्टर श्री मेडीशाईन हॉस्पिटल डॉ.सुशील शर्मा ने बताया, कोविड के दौरान स्टेरॉयड इंजेक्शन के इस्तेमाल ने कि चिंता बढ़ा दी है। अगर सही समय पर मरीज को हॉस्पिटल लाया जाए तो बोनमेरो टेक्नोलॉजी से इलाज सम्भव हैं। मरीज के बोनमेरो से ऑस्टियोब्लास्ट को लैब में री ग्रो किया जाता है। जिसे वापस मरीज के हिप में ज्वाइंट इंजेक्ट किया जाता है। ऑस्टियोब्लास्ट तकनीक से इलाज कारगर है।

इन लक्षणों से जानिए बीमारी

ज्यादातर एवीएन कूल्हे की हड‌्डी को प्रभावित करता है। शुरूआती तौर पर इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता। हालांकि चलने और वजन उठाने पर ज्वाइंट में पेन हो सकता है। हाडि‌्डयों के कमजोर हाेते ही चलने, उठने और खड़े रहने में तेज दर्द होने लगता है। इसके अलावा लंगड़ापन, पैर छोटा होना जैसे सम्टम्स नजर आते हैं। इसे कोर डिकोप्रेशन से सही किया जाता है। इसके तहत फीब्लूअर स्टुट ग्राफ्ट ड्रिल होल को ह‌ड‌‌्डी से भरा जाता है। मरीज के बोनमैरो से स्टेम सेल नकाली जाती है। जिसे ड्रिल होल में इंजेक्ट किया जाता है।

Next Story