Golden Prashan: बच्चों को स्वर्ण प्राशनः छत्तीसगढ़ के आयुर्वेद अस्पताल में पुष्य नक्षत्र तिथि में 860 बच्चों को कराया गया स्वर्ण प्राशन, जानिये क्या होता है स्वर्ण प्राशन

Golden Prashan: रायपुर. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय रायपुर में आज 860 बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराया गया। आयुर्वेद महाविद्यालय चिकित्सालय में हर पुष्य नक्षत्र तिथि में शून्य से 16 वर्ष के बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराया जाता है। चिकित्सालय के बाल रोग विभाग के डॉक्टरों और अन्य स्टॉफ के साथ आयुर्वेद महाविद्यालय में बाल रोग विभाग में अध्ययनरत पीजी (एमडी) छात्र-छात्राएं भी इसमें सक्रिय भागीदारी करते हैं। इस वर्ष चार अन्य पुष्य नक्षत्र तिथियों 9 जनवरी को 831, 4 फरवरी को 1124, 3 मार्च को 1137 और 29 मार्च को 1290 बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराया गया था।
स्वर्ण प्राशन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, श्वसन संबंधी एवं अन्य रोगों से रक्षा करने के साथ ही एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने में अत्यंत लाभकारी है। यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद करता है। यह हर महीने की पुष्य नक्षत्र तिथि में शून्य से 16 वर्ष के बच्चों को पिलाई जाने वाली औषधि है।
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वर्णप्राशन संस्कार को बहुत महत्व दिया गया है. इसे नवजात बच्चों से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों को दिया जा सकता है. स्वर्णप्राशन बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के साथ ही प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बहुत ही कारगर है.
जानिये क्या होता है स्वर्ण प्राशन
रायपुर आयुर्वेदिक कालेज के प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया स्वर्ण प्राशन कुछ स्वर्ण भस्म,शहद और इम्यूनिटी बूस्टर आयुर्वेद औषधियों का मिश्रण होता है जिसे प्रत्येक महीने के पुष्प नक्षत्र में आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में दिया जाता है।
बच्चों को यदि यह छह महीने तक नियमित दिया जाए तो यह उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बरकरार रखने में बहुत लाभदायक होता है।
