कोरोना वैक्सीन के बेबीनार में बोले स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव…..वैक्सीन ड्रिस्ट्रिब्यूशन से पहले बेहतर वैक्सीन की पहचान जरूरी….. सरकार तय करेगी किन तबके के लोगों को पहले दी जाये वैक्सीन….फरवरी तक वैक्सीन की उपलब्धता की जतायी उम्मीद

रायपुर 22 नवंबर 2020। जैसे-जैसे वैक्सीन का ट्रायल एडवांस स्टेज की तरफ बढ़ रहा है। वैक्सीन के डिस्ट्रिब्यूसन को लेकर भी रणनीति सरकार अपने-अपने स्तर पर तैयार करने लगी है। इसी कड़ी में कांग्रेस की छत्तीसगढ़, दिल्ली, केरल व महाराष्ट्र इकाइयों द्वारा “पारदर्शी और सही ढंग से लोगों में कोविड 19 वैक्सीन का वितरण” विषय पर एक ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया।

वेबीनार की शुरुआत प्रोफेशनक्स कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष क्षितिज चंद्राकर ने बताया कि कैसे लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार ने किस तरह से प्रवासी लोगों की मदद की। उनके खाने-पीने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं का ख्याल रखा। वहीं प्रदेश में लौटे मजदूरों को स्वावलंबी तथा रोज़गार प्रदान करने हेतु प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार की राजीव गांधी न्याय योजना तथा गोधन न्याय योजना की कामयाबी तथा लोगों के मध्य उसकी स्वीकारता और सरहाना को भी बताया। उन्होंने इस महामारी के समय में प्रदेश सरकार का पोषण अभियान, स्लम स्वास्थ्य योजना तथा दाई-दीदी क्लिनिक के बारे में भी उपस्थित सहभागियों को अवगत कराया तथा छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता और कोविड 19 वैक्सीन को प्रदेश के हर घर तक पहुंचाने की तैयारी का भी भरोसा दिया। इसके उपरांत प्रदेश के स्वास्थ मंत्री ने भी अपने अनुभवों, महामारी के दौरान कार्यों के बारे में बताया।

मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि कोरोना वैक्सीन ही कोरोना से बचने का उपाय नहीं है। बल्कि सतर्कता के जरिये भी कोरोना के बचा जा सकता है।  नियमित रूप से हाथ धोना, मास्क पहनना और शारीरिक दूरी बनाकर रखना भी कोरोना की दवा के समान ही है इतने समय तक कोरोना से लड़ने में हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर्याप्त रही है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व में दवाओं का सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल है। इसके लिए दवा का उत्पादन इतनी चिंता का उतना ही है जितना दवा को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विश्व की अलग-अलग कंपनियों द्वारा दवा बनाने में लगी हुई है और इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। इन दवाओं के बाजार में लाने से पहले हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अभी तक किसी भी दवा को कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है।  उन्होंने आगे कहा कि दवा के वितरण से पूर्व में धैर्यपूर्वक यह निर्धारण करना होगा कि कौन सी दवा देशवासियों के लिए सबसे बेहतर है।जहां एक से कुछ दवा के 70C तापमान पर वातावरण निर्धारित है, वही कोई दवा है, ऐसे ही जो हमारे देश की स्थिति के अनुकूल नहीं है।

मंत्री सिहदेव ने कहा कि हमें यह मानकर चलना होगा कि फरवरी के अंत तक कोरोना की वैक्सिन बाजार में उपलब्ध होगी और उस समय तक हमें पूरी तरह से कोविड प्रोटोकॉल पर चलना होगा इसके साथ ही सरकार द्वारा निर्धारित करना होगा कि किस वर्ग के लोगों को वैक्सीन पहले दी जाएगी। हमें फ्रंटलाइन और स्वास्थ्य वर्कर को पहली प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। देश के सभी लोगों को वैक्सिन देने की इस पूरी प्रक्रिया में 6 महीने से 3 साल तक का समय लगेगा।जिस समय में धैर्य और संयम के साथ ही पूर्व निर्धारित योजना की अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी।

 

कार्यक्रम में प्रोफेशनल्स कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष क्षितिज चंद्राकर के साथ उनकी टीम के उपाध्यक्ष प्रत्युष भारद्वाज, सचिव ऐश्वर्या सिंहदेव, मीडिया संयोजक दीप सारस्वत भी उपस्थित रहे

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