राज्यपाल उइके ने कहा- भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान देने वाले सभी मनीषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है आज… छत्तीसगढ़ सरकार ने गांव-गांव में स्वावलंबन और विकास की अलख जगाई

रायपुर, 26 जनवरी 2020। राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आज यहां पुलिस परेड ग्राउंड में 71वें गणतंत्र दिवस के अवसर आयोजित मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज का दिन हम सभी भारतवासियों के लिए अपार गौरव का है। जिन मनीषियों एवं महान नेताओं के कारण भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान मिला, आज उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।

राज्यपाल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर नेहरू, प्रथम विधि मंत्री बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को विशेष तौर पर याद करते हुए भारत को आजादी दिलाने के लिए त्याग और बलिदान करने वाले सभी भारतवासियों, शहीदों और पुरखों को भी नमन किया। साथ ही देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों, अपनी अमिट आस्था से संविधान के अनुसार देश को चलाने में सहयोग करने वाले महानुभावों को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान की प्रस्तावना ‘हम भारत के लोग’ से शुरू होती है, अर्थात गणतंत्र में गण का सर्वाधिक महत्व है। राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ के जन-जन का अभिवादन किया, जिनके कारण छत्तीसगढ़ प्रदेश का विकास और यश लगातार बढ़ रहा है।

राज्यपाल उइके ने कहा कि आज इस महान राष्ट्रीय त्यौहार के अवसर पर हमें संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर की अपेक्षाओं और कसौटियों पर भी गौर करना होगा। उन्होंने कहा था- संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो लेकिन जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाए, वे यदि कसौटी पर खरे न उतरें तो संविधान भी गलत सिद्ध हो जायेगा। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि हम अपने संविधान के अनुरूप समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता दिलाने के लिए एक बार फिर अपना संकल्प दोहराएं, व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्र की एकता व अखण्डता सुनिश्चित करने के लिए पूरे मनोयोग से कार्य करें। उन्होंने कहा कि आज यह कहते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मेरी सरकार ने विगत वर्षों में ऐसी नई पहल की है, जिसके कारण प्रत्येक नागरिक को समान अवसर और न्याय मिलने का विश्वास हुआ है।
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के सबसे पिछड़े अंचलों, सबसे कमजोर तबकों और सबसे जरूरतमंद लोगों को सबसे पहले राहत देने की शुरूआत की है। लोहंडीगुड़ा में जमीन वापसी, 4 हजार रू. प्रति मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक, निरस्त वन अधिकार दावों की समीक्षा, सामुदायिक वन अधिकार पट्टों की स्वीकृति मंे तेजी, निर्दाेष आदिवासियों को आपराधिक प्रकरणों से मुक्ति, 22 लघु-वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना जैसे अनेक फैसलों का अच्छा असर हुआ है।

उइके ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने गांव-गांव में स्वावलंबन और विकास की अलख जगाकर किसानों, ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं के लिए कार्य करने का प्रयास किया है। 25 सौ रूपये में धान खरीदी तथा कर्ज माफी जैसे फैसलों से किसानों का मनोबल बढ़ा है। ‘‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’’ के विकास हेतु बहुआयामी पहल करते हुये छत्तीसगढ़ ने पर्यावरण-सम्मत विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। ऐसी पहल से राज्य की छवि तथा प्रतिष्ठा बढ़ी है। नई औद्योगिक नीति में ऐसे प्रावधान किए गये हैं कि स्थानीय संसाधनों, खनिजों और स्थानीय उपजों का ‘वेल्यू एडीशन’ अर्थात मूल्य संवर्द्धन हो और लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

राज्यपाल ने कहा कि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के बच्चों को शिक्षा की बेहतर सुविधाएं देते हुए प्री-मेट्रिक छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों सहित आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति दर बढ़ाकर 1000 रू. प्रतिमाह कर दी गई है। मेट्रिकोत्तर छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भोजन सहायता की राशि बढ़ाकर 700 रू. प्रतिमाह कर दी गई है। 17 नये एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शुरू किये गये हैं। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगभग 15 हजार स्थाई शिक्षक-शिक्षिकाआंे की भर्ती कर रही है जिससे 7 हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकायें आदिवासी अंचलों की शालाओं को मिलंेगे।
सुश्री उइके ने कहा कि युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए बहु-आयामी प्रयासों पर बल दिया गया है, जिसके तहत् प्रदेश में 10 आदर्श महाविद्यालयों की स्थापना, 54 महाविद्यालयों में अधो-संरचना विकास हेतु आर्थिक सहायता दी गई है, वहीं दूसरी ओर सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, क्रीड़ा अधिकारी के लगभग 1500 पदों पर भर्ती की जा रही है। 34 सरकारी कॉलेजों में लगभग चार हजार तथा 56 अशासकीय कॉलेजों में छह हजार सीटें बढ़ाई गई हैं। हर जिले में कन्या छात्रावास की उपलब्धता को अनिवार्य बनाया गया है।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने युवाओं के कैरियर के अवसरों को बढ़ाने के लिए पढ़ाई के साथ खेल और अन्य विधाओं पर भी ध्यान दिया है। छत्तीसगढ़ खेल प्राधिकरण का गठन, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक विजेताओं को मिलने वाली पुरस्कार राशि में वृद्धि और राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन इसी दिशा में किए गए प्रयास हैं। जिसका असर युवाओं के उत्साह और उनकी रचनात्मक सोच में वृद्धि के रूप में दिखाई पड़ रहा है। सरकारी-गैर सरकारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए गए हैं। बस्तर व सरगुजा संभाग के साथ कोरबा जिले में अनुसूचित जनजाति युवाओं की बहुलता को देखते हुए जिला संवर्ग के तहत तृतीय, चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों में भर्ती की अवधि 31 दिसम्बर 2021 तक बढ़ा दी गई है। बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर संभाग में स्थानीय लोगों की भर्ती में तेजी लाने के लिए कनिष्ठ सेवा चयन बोर्ड का गठन, कौशल उन्नयन और रोजगारपरक प्रशिक्षण के अनेक उपाय किये जा रहे हैं।

उइके ने कहा कि राज्य सरकार ने सर्वभौम पीडीएस के माध्यम से 26 लाख से अधिक अन्त्योदय, प्राथमिकता, अन्नपूर्णा राशन कार्डों के माध्यम से 1 रूपये की दर पर चावल देने का इंतजाम किया है। इसे मिलाकर 56 लाख 40 हजार परिवारों को खाद्यान्न और पोषण सुरक्षा दी गई है। आदिवासी अंचलों में पोषण सुरक्षा के लिए प्रतिमाह 2 किलोग्राम चना 5 रूपये प्रति किलो की दर पर प्रदाय किया जा रहा है। बस्तर संभाग में महिलाओं एवं बच्चों में आयरन की कमी दूर करने के लिए पात्रतानुसार प्रति राशन कार्ड, दो किलो गुड़ 17 रूपये प्रतिकिलो की दर से देना शुरू किया गया है। प्रदेश में श्रमिकों को सम्मान-सुरक्षा और सुविधा का जीवन मुहैया कराने के लिए अनेक प्रयास किये गए हैं। औद्योगिक स्थापनाओं में सेवारत कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई है। मासिक पेंशन योजना के तहत् तीन हजार रूपये प्रदाय के लिए छत्तीसगढ़ सरकार प्रतिबद्ध है। असंगठित श्रमिकों के कल्याण हेतु समग्र नीति का निर्माण किया जा रहा है। संगठित श्रमिकों तथा निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु नए कदम उठाए जा रहे हैं।

राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार ने समाज के कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक समस्याओं को हल करने का वायदा भी निभाया है। छोटे भूखण्डों की खरीदी-बिक्री पर लगी रोक हटाने, गाइड लाइन दरों में 30 प्रतिशत की कमी, पंजीयन शुल्क में 2 प्रतिशत की कमी जैसे जमीनी फैसलों से लाखों लोगों को राहत मिली। नगरीय क्षेत्रों में सात हजार पांच सौ वर्गफीट तक की सरकारी जमीन के 30 वर्षीय पट्टे, फ्री-होल्ड अधिकार, भू-भाटक से छूट, नामांतरण-डायवर्सन में सरलता, भुइयां सॉफ्टवेयर से जन सुविधा जैसे अनेक फैसलों से प्रदेशवासियों को लाभ हो रहा है। सरकार ने आवासीय तथा निर्माण संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी सार्थक कदम उठाये हैं। कॉलोनी-टाउनशिप के विकास हेतु अनापत्तियां-अनुमतियां ‘सिंगल विंडो’ से देने की प्रणाली विकसित की गई है। ऑनलाइन भवन तथा विकास अनुज्ञा की व्यवस्था से पारदर्शिता और सुगमता बढ़ेगी।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी राज्य सरकार ने प्रदेश में निवासरत सभी 65 लाख परिवारों के प्रत्येक सदस्य को कैशलेस उपचार की सुविधा देने का वायदा निभाने के लिए अभिनव पहल की है। ‘डॉ. खूबचन्द बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना’ के तहत् 56 लाख परिवारों को 5 लाख रूपये तक के उपचार की सुविधा मिलेगी। इस योजना में जांच की राशि भी मान्य की जाएगी वहीं ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ के अंतर्गत 20 लाख रूपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इन योजनाओं में जांच पर होने वाले खर्च को भी शामिल किया जायेगा। माताओं तथा शिशुओं की देखरेख में सहायक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का मानदेय सात सौ रूपये से पन्द्रह सौ रूपये तक बढ़ाया गया है। 10 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों को नर्सरी स्कूल के रूप में विकसित करने हेतु कार्यवाही शुरू की गई है। 2 हजार आंगनबाड़ी केन्द्र भवनों के निर्माण की मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत् सहायता राशि 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रूपये की गई हैै। राज्य में महिलाओं को सबला और स्वावलंबी बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गये हैं।

उइके ने कहा कि मेरी सरकार ने सबको पीने का साफ पानी देने के लिए मिनी माता अमृत धारा नल-जल योजना, गिरौधपुरी धाम समूह नल-जल योजना, राजीव गांधी सर्व-जल योजना, मुख्यमंत्री चलित संयंत्र पेयजल योजना, सुपेबेड़ा पेयजल योजना जैसी अनेक पहल की हैं, इसी के साथ जल संसाधन विकास के सारे विकल्पों पर भी सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। समग्र और समन्वित प्रयासों के लिए जल संसाधन नीति तैयार की जा रही है, सिंचाई विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। वर्तमान में निर्मित योजनाओं से 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वास्तविक सिंचाई हो पाती है, इसे बढ़ाकर 5 वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य है। छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता के अनुसार अधोसंरचना विकास का नया युग शुरू हुआ है। ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के अंतर्गत तीन हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। ‘मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना’ के अंतर्गत 263 किलोमीटर और ‘मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना’ के अंतर्गत भी सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि बिजली उत्पादन के साथ बिजली के उपभोग को विकास का पैमाना बनाने की रणनीति अपनाई गई है ताकि समाज के हर वर्ग को गुणवक्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुगमता से हो। प्रति माह 400 यूनिट तक बिजली खपत पर बिजली बिल आधा किया गया है। प्रदेश में विद्युत अधो-संरचना के विस्तार तथा उपभोक्ता सेवा में सुधार का कार्य दु्रतगति से किया जा रहा है। सड़क अधो-संरचना के विस्तार में भी तेजी आई है। एक वर्ष में 28 वृहत पुल के काम पूरे किए गए जबकि 119 का काम प्रगति पर है। प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 10 हजार किलोमीटर लम्बी सड़कों के निर्माण हेतु समयबद्ध कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे इसमें निवेशित राशि का लाभ अतिशीघ्र प्रदेश की जनता को मिले।

राज्यपाल उइके ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा, विश्वास और विकास की त्रिवेणी से कानून और व्यवस्था को संवारा है। पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने की दिशा में सप्ताहिक अवकाश से लेकर रिस्पांस भत्ता देने तक अनेक कदमों ने भूमिका निभाई है। सचेत पुलिस बल और न्याय दिलाने की पहल के कारण नक्सली हिंसा और अपराधों में कमी आई है। राज्य की नक्सल पुनर्वास कार्य-योजना को और अधिक आकर्षक बनाया गया है। प्रदेश में चिट्फण्ड, सायबर अपराध, मानव तस्करी रोकने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अंजोर रथ, जनमित्र, ग्राम रक्षा समितियाँ, सीनियर सिटिजन सेल, महिला हेल्प डेस्क आदि ने सामुदायिक पुलिसिंग के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि मैं चाहूंगी कि देश के सर्वांगीण विकास में छत्तीसगढ़ राज्य तथा आप सबकी अमिट भागीदारी दर्ज हो।

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