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गुस्से में सरकार?

संजय के. दीक्षित
तरकश, 27 जून 2021
राज्य सरकार ने 2018 बैच के 23 प्रोबेशनर डीएसपी को बहुप्रतीक्षित पोस्टिंग दे दी। सभी को एकमुश्त बस्तर रवाना कर दिया गया। अब सबको बस्तर भेजा गया है तो सवाल उठते ही हैं। सभी अफसरों की बस्तर रवानगी के पीछे एक बड़ी वजह अच्छी पोस्टिंग के लिए हद से ज्यादा सिफारिश बताई जा रही है। इस बैच के कई डीएसपी रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग रेंज में पोस्टिंग के लिए सरकार पर भांति-भांति के लोगों से फोन करवा रहे थे। इससे सरकार का मूड भन्नाया और आदेश हुआ कि भेजो सबको बस्तर। गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय से डीजीपी को जो प्रपोजल आया था, उसे तुरंत हरी झंडी देते हुए आदेश निकाल दिया। दरअसल, पीएचक्यू हर बार प्रोबेशनर अफसरों को पहली पोस्टिंग के रूप में बस्तर भेजने का प्रस्ताव भेजता है। लेकिन, अफसर उपर में जोड़-तोड़ लगाकर प्रस्ताव में तब्दीली करा लेते थे। मगर इस बार मामला गड़बड़ा गया। बहरहाल, सरकार के गुस्से के लपेटे में पारुल अग्रवाल और प्रशांत खांडे भी आ गए। दोनों ने तीन महीने पहिले तगड़ा जैक़ लगाकर बिलासपुर और सूरजपुर में अपनी पोस्टिंग करा ली थी। उन्हें भी बस्तर जाने का आदेश थमा दिया गया। पारुल को सुकमा भेजा गया है और प्रशांत को नारायणपुर। अब ये अलग बात है कि 23 में से कई डीएसपी बस्तर न जाना पड़ा, इसका रास्ता तलाशने में जुट गए हैं।

डीडी की पोस्टिंग

आदिवासी कल्याण, जीएडी और जनसंपर्क विभाग के सिकरेट्री डीडी ंिसंह 30 जून को रिटायर हो जाएंगे। पता चला है, अफसरों की दिक्कतों के चलते डीडी की सेवाओं को सरकार कंटीन्यू रखना चाहती है। लिहाजा, रिटायरमेंट के बाद उन्हें संविदा नियुक्ति दी जा रही है। हो सकता है आजकल में उनका आदेश निकल जाए। संविदा नियुक्ति में उनके विभाग यथावत रहेंगे। प्रमोटी आईएएस में डीडी की गिनती बैलेंस अधिकारी के रूप में होती है। वे सूबे के दूसरे प्रमोटी आईएएस हैं, जो भारत सरकार में ज्वाइंट सिकरेट्री के रूप में इम्पेनल हुए हैं। उनसे पहिले दिनेश श्रीवास्तव को यह मौका मिला था। संविदा में सिकरेट्री बनने वाले डीडी सिंह छठवें अफसर होंगे। उनसे पहिले सूबे में अमन सिंह, मुनिश कुमार त्यागी, एसके जायसवाल, हेमंत पहाड़े और आलोक शुक्ला को सचिव के तौर पर संविदा नियुक्ति मिल चुकी है।

आईपीएस अवार्ड

राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस अवार्ड के लिए 28 जून को डीपीसी होने जा रही है। दो पदो ंके लिए होने वाली डीपीसी के लिए छह नामों का पेनल बनाया गया है। इनमें 96 बैच के धर्मेंद्र छवई और 97 बैच के डीएस मरावी का नाम सबसे उपर है। पिछली डीपीसी में सीआर क्लियर नहीं होने के कारण इनका प्रमोशन नहीं हो पाया था। उसके बाद उमेश चैधरी, मनोज खिलाड़ी, रवि कुर्रे और सीडी टंडन का नाम है। हालांकि बीएसएफ से छत्तीसगढ़ पुलिस में मर्ज हुए वायपी सिंह का लिफाफा भी बंद है। छवई और मरावी में से किसी का नाम अगर कटा तो कमेटी वायपी सिंह के बंद लिफाफे पर विचार कर सकती है। उधर, वायपी के खिलाफ बिलासपुर के एडिशनल एसपी रोहित झा ने एहतियातन यूपीएससी को शिकायत भेजी है कि उन्हें आईपीएस अवार्ड न किया जाए। असल में, रापुसे अधिकारी नहीं चाहते कि ऐसी कोई परंपरा बनें, जिससे दूसरे कैडर के अफसर आईपीएस बनने लगे। इससे खतरा यह होगा कि केंद्रीय आम्र्स फोर्स के अधिकारियों में राज्य पुलिस में संविलयन कराके आईपीएस बनने की होड़ मच जाएगी। रापुसे अधिकरी इसको लेकर कोर्ट-कचहरी सब कर चुके हैं। मगर कहीं से भी राहत नहीं मिली।

वेटिंग क्लियर

2013 बैच के सात में से पांच आईएएस कलेक्टर बन गए हैं। पिछली सूची में अजीत बसंत और इंद्रनील च्रदवाल का नम्बर लगा था। अब दो बच गए हैं। डाॅ0 जगदीश सोनकर और राजेंद्र कटारा। चूकि यह बैच कलेक्टर बनने में काफी लेट हो गया है। लिहाजा, सरकार की कोशिश है कि किसी तरह इस बैच की वेटिंग क्लियर की जाए। भले ही बाद पारफारमेंस ठीक न होने पर छह महीने में वापिस बुला लिया जाए, मगर कलेक्टर बनने का एक मौका दिया जाएगा। इसके लिए कुछ प्रमोटी कलेक्टरों को वापिस रायपुर बुलाने की खबर है। इस तारतम्य में अगली लिस्ट तीन-चार कलेक्टरों की निकल सकती है।

एसपी भी…

एसपी की लिस्ट अब ऐसी हो गई है कि लोग बीरबल को याद करने लगे हैं। छह महीने से ज्यादा हो गया, कई अफसर एसपी बनने की खुशी में दोस्तो को पार्टी-वार्टी भी दे डाली। लेकिन, खाए पीये कुछ नहीं, गिलास फोड़े बारह आना हो गया। अब सुनते हैं छोटी लिस्ट आ सकती है बाकी दिवाली के बाद देखा जाएगा।

गोल्डन पीरियड

राज्य वन सेवा के छह अफसरों को आईएफएस अवार्ड करने के लिए 28 जून को डीपीसी होने जा रही है। ये अफसर नौ-दस साल में एसीएफ से आईएफएस बन जाएंगे। जबकि, पहले 15 साल से ज्यादा लग जाता था। राप्रसे और रापुस अधिकारियों को आज भी इतना वक्त लग जाता है आईएएस और आईपीएस अवार्ड होने में। मगर आईएफएस में पोस्ट काफी वैकेंट हैं, इसलिए उन्हें आईएफएस बनने समय से पहले असवर मिल जा रहा।

मरवाही का इनाम या…?

जय सिंह अग्रवाल को सरकार ने दंतेवाड़ा, सुकमा से चेंज कर बिलासपुर, जांजगीर और जीपीएम जिले का प्रभारी मंत्री बना दिया। उनसे पहिले ताम्रध्वज साहू बिलासपुर और टीएस सिंहदेव जांजगीर के प्रभारी मंत्री थे। दोनों को अपेक्षाकृत बेहद छोटे जिले का प्रभार देकर उनकी जगह पर जयसिंह को बिठाया गया है। अब इसे मारवाही इलेक्शन में जीत का ईनाम माना जाए या कुछ और….?

पांचवें आईएएस

रायपुर कलेक्टर रहे एस भारतीदास ने मुख्यमंत्री सचिवालय में अपना कामकाज संभाल लिया है। वे सूबे के सबसे ताकतवर सचिवालय का हिस्सा बनने वाले रायपुर के पांचवे कलेक्टर हैं। उनसे पहिले सुनिल कुमार मुख्यमंत्री स्व0 अजीत जोगी के सिकरेट्री रहे। याद होगा, जोगी के शपथ लेने के बाद पहली नियुक्ति सुनिल कुमार की हुई थी। उनके बाद सुबोध सिंह रमन सिंह की दूसरी पारी में सिकरेट्री अपाइंट हुए। फिर डाॅ0 रोहित यादव को रमन सिंह ने अपना स्पेशल नियुक्त किया। कांग्रेस की सरकार आई तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले साल सिद्धार्थ कोमल परदेसी सिकरेट्री को अपना सचिव बनाया और अब भारतीदासन को। हालांकि, इन पांचों में अंतर यह है कि सुबोध और भारतीदासन रायपुर कलेक्टर से सीधे सीएम सचिवालय में जंप लगाए। बाकी कुछ समय बाद। दरअसल, राजधानी के कलेक्टर का फायदा यह होता है कि रिलेशन सबसे अच्छे बन जाते हैं….सीएम हाउस आना जाना लगा रहता है। इस दौरान मुख्यमंत्री भी परख लेते हैं, कौन उनके काम का है।

गैर आईएएस चेयरमैन

हेमंत वर्मा बिजली नियामक आयोग के नए चेयरमैन होंगे। इसी स्तंभ में हमने बताया था कि अबकी नाॅन आईएएस नियामक आयोग के प्रमुख बन सकते हैं। और ऐसा ही हुआ। रिटायर आईएएस डीएस मिश्रा इस पद से 2 अप्रैल को रिटायर हुए थे। उसके बाद से यह पद खाली था। हेमंत वर्मा से पहले मनोज डे गैर आईएएस के तौर पर इस आयोग को संभाल चुके हैं। आईएएस से एसके मिश्रा, नारायण सिंह और डीएस मिश्रा इस आयोग के चेयरमैन रह चुके हैं।

शोे मैन नहीं

किसी भी पार्टी में उपाध्यक्ष शोभा का पद माना जाता है…उसके पास कोई खास दायित्व नहीं होते। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल में पहली बार बीजेपी के उपाध्यक्षों की बैठक बुलाकर इस पद की अहमियत बढ़़ा दी। हालांकि, इस चक्कर में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह को रायपुर की एक अहम बैठक छोड़कर दिल्ली जाना पड़ा। उनकी गैर मौजूदगी में राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश ने यहां पार्टी की बैठक ली। रमन सिंह अलबत्ता जूम के जरिये दिल्ली से इस बैठक में कनेक्ट हुए।

लाल बत्ती

लाल बत्ती की लिस्ट सुप्रीम अनुमोदन के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास पहुंच गई है। रायपुर से गहन मंथन के बाद चूकि प्रदेश प्रभारी महासचिव पीएल पुलिया, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का हस्ताक्षर हो चुका है, इसलिए दिल्ली में सूची रुकने की कोई आशंका नहीं है। इसमें अभी तक जो जानकारी आ रही है, उसमें बिलासपुर से अटल श्रीवास्तव को पर्यटन बोर्ड, प्रवक्ता आरपी सिंह को व्रेबरेज कारपोरेशन और उत्तम वासुदेव को युवा आयोग की कमान मिल सकती है।

अच्छी बात

डीजीपी डीएम अवस्थी के बेटे की पिछले हफ्ते शादी हुई। उसमें मुख्यमंत्री आए और गिनकर चार मंत्री। आईएएस से दो, आईएफएस से एक और अपने कैडर आईपीएस से तीन अफसरों को उन्होंने आमंत्रित किया था। कोरोना प्रोटोकाॅल के तहत 50 लोगों को बुलाया जा सकता है। उनके यहां बमुश्किल 40 लोग जुटे। बढ़ियां है। जब तक कोरोना का खतरा है, लोगों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. बिलासपुर और कोरबा एसपी एक्सचेंज होंगे, इस खबर में कितनी सत्यता है?
2. आईएएस की आने वाली लिस्ट में किस बड़े जिले के कलेक्टर पर खतरा मंडरा रहा है?

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