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सामान सप्लाई हुआ नहीं, विभाग ने DMF से कर दिया लाखों का पेमेंट …..कलेक्टर ने दिखाये सख्त तेवर, अब जांच के बाद होगा भुगतान

कोरबा 15 जून 2021। कोरबा में जिला खनिज न्यास मद यानि डीएमएफ से करोड़ो रूपये की खरीदी के मामले में अब कई गंभीर शिकायते सामने आ रही है। कलेक्टर रानू साहू से शिकायत की गयी है कि सामान की सप्लाई किये बगैर ही, संबंधित विभाग ने वेन्डर को लाखों रूपये का भुगतान कर दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर रानू साहू ने डीएमएफ फंड से जारी होने वाले भुगतान पर तत्काल रोक  लगाते हुए दूसरी किश्त का भुगतान सामान की गुणवत्ता और भौतिक सत्यापन के बाद करने का आदेश दे दिया है। गौरतलब है कि कोरबा में स्वास्थ, शिक्षा, कृषि और पर्यटन के साथ ही सड़को को दुरूस्त करने की दिशा में विशेष कार्य किये गये थे। संबंधित विभागो में करोड़ो रूपये के सामानों की खरीदी के साथ ही निर्माण कार्य कराये गये। लेकिन कई विभाग के अफसरो ने तात्कालीन कलेक्टर को अंधेरे में रखकर बड़े पैमाने पर फर्जी वाड़े भी किये। कलेक्टर रानू साहू को मिली शिकायतों को माने तो सामानों की सप्लाई करने वाले वेंडरो से मिलीभगत कर आधे-अधूरे और घटिया सामानो की खरीदी कर जवाबदार अधिकारियों ने वेंडर को लाखों-करोड़ो रूपये का भुगतान कर दिया गया। कोरबा की नयी कलेक्टर की पदस्थापना के बाद इस गंभीर मामले की शिकायत सामने आई है। इस पूरे प्रकरण पर कलेक्टर रानू साहू ने गंभीरता दिखाते हुए पहले तो डीएमएफ से पास हुए कार्यो की फाईलों का अवलोकन किया, और अब दूसरी किश्त के भुगतान पर रोक लगाते हुए सप्लाई किये गए सामानो की गुणवत्ता और भौतिक सत्यापन के बाद ही बिल पास करने का आदेश दिया है। कलेक्टर रानू साहू ने एनपीजी से चर्चा करते हुए बताया कि उन्होने क्रय समिति का भी गठन किया है, जिसमें समिति के सदस्य दो दिनो के भीतर सामान की गुणवत्ता और भौतिक सत्यापन का कार्य पूरा कर रिपोर्ट पेश करेगें। जिन वेंडरो का सत्यापन संतुष्ठि पूर्ण होगा, उनके बिलों का तत्काल भुगतान के लिए प्रोसेस किया जायेगा।

–  खरीदी के मामले में स्वास्थ, शिक्षा और आदिवासी विभाग सुर्खियों में

कोरबा में डीएमएफ मद से हुए खरीदी में सबसे ज्यादा सुर्खियों में स्वास्थ विभाग है। कोरोना के पहले और दूसरे लहर में कोरोना मरीजों के उपचार और बेहतर स्वास्थ लाभ के लिए डीएमएफ फंड सहित सार्वजनिक उपक्रमो से सीएसआर मद से मिले करोड़ो रूपये के मेडिकल सामानों की खरीदी की गयी। जानकारों की माने तो जवाबदार अफसरों ने कोरोना महामारी में आपदा को अवसर में तब्दील करने में कोई कसर नही छोड़ी। मरीजों के ईलाज के लिए खरीदे जाने वाले मशीनों से लेकर दूसरे ईक्यूपमेंट के लिए वेंडर को ब्रांडेड कंपनी की दर पर करोड़ो रूपये का भुगतान तो किया गया, लेकिन सामानों की आपूर्ति काफी घटिया स्तर का किया गया। जो कि स्वास्थ विभाग की कार्य प्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। ठीक इसी तरह शिक्षा और आदिवासी विभाग में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर माॅडल स्कूल, इंग्लिश मीडियम स्कूल को तैयार करने में करोड़ो रूपये के शिक्षण सामग्री, फर्नीचर की खरीदी की गयी। लेकिन जवाबदार अफसर तात्कालीन कलेक्टर किरण कौशल को अंधेरे में रखकर गुणवत्ताहीन सामानों की खरीदी पर अपनी मुहर लगाकर वेंडर को क्लीन चीट दे दिया गया और कमीशन के रूप में लाखों रूपये का बंदरबांट कर अपनी जेब गर्म कर लिया गया। ऐेसे में अब कोरबा की नई कलेक्टर रानू साहू के आदेश ने उन अफसरों की नींद उड़ा दी है, जिन्होने उच्च अधिकारियों को अंधेरे में रखकर बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल खेला है। ऐसे में अब उम्मींद जताई जा रही है कि यदि कलेक्टर ने स्वास्थ विभाग सहित दूसरे विभाग में सामानो की गुणवत्ता और भौतिक सत्यापन का कार्य सही ढंग से करा दिया तो कई अफसरो का नपना तय माना जा रहा है।

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