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गदगद नौकरशाह

संजय के. दीक्षित
तरकश, 13 जून 2021
नवा रायपुर में सरकार ने मितव्ययिता का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बंगले के निर्माण पर रोक लगा दी है। इस फैसले से एक वर्ग सबसे अधिक प्रसन्न है तो वो हैं राजधानी के नौकरशाह। उनका परिवार भी गदगद है…चलो अब नवा रायपुर जाने का बला टला। दरअसल, नवा रायपुर में अफसरों क लिए हाउसिंग बोर्ड ने 120 लग्जरी बंगले बनाए हैं। लेकिन, वहां जाने के लिए कोई तैयार नहीं। जिनके बच्चे बड़े हो गए वे भी नहीं और जिनके छोटे हैं वे तो बिल्कुल नहीं। चीफ सिकरेट्री रहते आरपी मंडल पिछले साल खुद नवा रायपुर शिफ्थ हुए और बाकी अफसरों को वहां ले जाने के लिए प्रयास किए थे लेकिन, कोई टस-से-मस नहीं हुआ। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इस पर सवाल हुआ तो उन्होंने दो टूक कहा था…जाएंगे कैसे नहीं, मैं जाउंगा तो अफसरों को भी जाना पड़ेगा। चूकि, इस साल के अंत तक नवा रायपुर में सीएम और मंत्रियों के बंगले कंप्लीट हो जाना था। लिहाजा, ब्यूरोक्रेट्स और उनकी फेमिली मन मारकर तैयार हो गई थी कि अब तो रायपुर से 25 किमी दूर जाना ही होगा…क्योंकि ये मुख्यमंत्री अपने कहे से पीछे नहीं हटते। लेकिन, अब तो लगता है कई अफसर नवा रायपुर से ही रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में, अफसरों का खुश होना लाजिमी है।

कलेक्टरों का टेस्ट!

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने कैबिनेट के साथियों के साथ जिलों के विकास कार्यों का वर्चुअल शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं। 8 जून से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 21 जून तक चलेगा। सीएम सचिवालय ने हर दिन दो-दो जिलों का प्रोग्राम तय किया है। सिर्फ एक दिन….21 जून को तीन जिलों का होगा। कहा जा रहा है कि इसके जरिये मुख्यमंत्री कलेक्टरों को परख भी रहे हैं…किसमें कितना दम है। इस कार्यक्रम में सीएम हाउस में सीएम के साथ कैबिनेट के कई मंत्री होते हैं और सीएम सचिवालय के अफसर भी। उधर, जिले सांसद, विधायक के साथ कलेक्टर और उनकी टीम होती है। कलेक्टर इस प्रोग्राम का पूरा संचालन करते हैं। कलेक्टरों के प्रेजेंटेशन के जरिये सरकार जानना चाहती है कि जिले के विकास को लेकर उनके पास किस तरह का ब्लूप्रिंट है।

एक लिस्ट और

सरकार ने पिछले हफ्ते नौ जिलों के कलेक्टर्स बदल दिए। लेकिन, इससे बाकी कलेक्टरों की धुकधुकी अभी बंद नहीं हुई है। खबर है, अभी एक लिस्ट और आ सकती है। इस लिस्ट में चार-पांच नाम हो सकते हैं। पिछली सूची में कई ऐसे कलेक्टरों के नाम छूट गए, जिनका बदला जाना तय माना जा रहा था। बस्तर संभाग से पिछली लिस्ट में एक भी नाम नहीं था। जबकि, रायपुर संभाग से रायपुर और धमतरी, दुर्ग डिवीजन से राजनांदगांव और बेमेतरा के कलेक्ट बदले गए। सबसे अधिक बिलासपुर संभाग से तीन कलेक्टर चेंज हुए। मुंगेली, जांजगीर और कोरबा। सरगुजा संभाग से भी दो कलेक्टर बदले…कोरिया और बलरामपुर। नई सूची में सरगुजा संभाग से एकाध विकेट और गिर जाए तो आश्चर्य नहीं।

एसपी भी…

कलेक्टरों के बाद पुलिस अधीक्षकों के ट्रांसफर की अटकलें अब तेज हो गई हंै। एसपी की लिस्ट तो कलेक्टरों के पहिले से प्रतीक्षित है। पिछले महीने एक बार ऐसा हुआ कि सूची बस आज निकलने ही वाली है। एक आईपीएस तो एसपी बनने के एक्साइटमेंट में करीबी लोगों में मिठाई बंटवा डाले। बहरहाल, चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है कि पहली सूची में सात-से-आठ पुलिस अधीक्षकों का ट्रांसफर हो सकता है। बिलासपुर, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बालोद, सूरजपुर, जशपुर एसपी का नाम बदलने वालों में चर्चा में है। इनमें से कुछ को प्रमोट कर बड़ा जिला मिलेगा तो कुछ को रायपुर वापिस बुलाया जाएगा।

बड़ी उठापटक?

पुलिस महकमे में आईपीएस के प्रमोशन के साथ ही कुछ बड़ा होने की खबरें आ रही है। प्रमोशन के बाद पीएचक्यू के भी कुछ चेहरे बदले जाएंगे। दुर्ग रेंज आईजी विवेकानंद प्रमोट होकर एडीजी बनेंगे। चूकि आईजी लेवल पर अफसरों का काफी टोटा है। बिलासपुर और बस्तर में अभी पूर्णकालिक आईजी नहीं हैं। दोनों जगहों पर डीआईजी को प्रभारी आईजी बनाया गया है। ऐसे में, दुर्ग में विवेकानंद की जगह किसी डीआईजी को वहां का प्रभारी डीआईजी बनाने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन, ये तभी होगा जब सरकार विवेकानंद को पुलिस मुख्यालय में नक्सल प्रभारी बनाएं। क्योंकि, विवेकानंद की पोस्टिंग का तार पुलिस मुख्यालय के फेरबदल से जुड़ा हुआ है।

डीडी को पोस्टिंग?

ट्राईबल, जीएडी और जनसंपर्क सचिव डीडी सिंह इस महीने रिटायर हो जाएंगे। डीडी छत्तीसगढ़ के पहले प्रमोटी आईएएएस हैं, जो भारत सरकार में ज्वाइंट सिकरेट्री इम्पेनल हैं। वे कई विभागों के सिकरेट्री रहने के साथ ही ज्वाइंट सीईओ के तौर पर निर्वाचन में भी काम कर चुके हैं। सरकार के पास जीएडी और जनसंपर्क के लायक अफसरों की कमी भी है। ऐसे में, डीडी सिंह के रिटायरमेंट के बाद पोस्टिंग की चर्चा अस्वभाविक नहीं है। उन्हें मंत्रालय में संविदा नियुक्ति मिलेगी और खुदा न खास्ता ऐसा नहीं हुआ तो पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग तय है।

ओपी का विरोध क्यों?

पूर्व आईएएस ओपी चैधरी की सक्रियता भाजपा के कुछ बड़़े नेताओं को परेशान करने लगी है। यही वजह है कि उनके राह में अब ब्रेकर लगाए जाने लगे हैं। प्रदेश चुनाव समिति में उन्हें सदस्य बनाए जाने पर एक पूर्व मंत्री ने विरोध कर दिया है। पूर्व मंत्री का तर्क है, ओपी अभी नए हैं, अनुभव भी नहीं है। जबकि, प्रदेश प्रभारी डी0 पुरंदेश्वरी चाहती हैं कि ओपी चुनाव समिति में सदस्य बनें। दरअसल, रायपुर कलेक्टर रहते आईएएस से वीआरएस लेने वाले ओपी खरसिया से भले ही अपना पहला चुनाव हार गए लेकिन, इससे हतोत्साहित होकर उनके कदम रुके नहीं। जशपुर से दंतेवाड़ा तक वे लगातार दौरे कर रहे हैं। रायगढ़, जांजगीर, जशपुर जिले मे उन्होंने अच्छी-खासी एक टीम खड़ी कर ली है। ओपी पिछड़े वर्ग से हैं। आईएएस रहे हैं। छत्तीसगढ़ी अस्मिता की बात भी करते हैं। इस वजह से सिर्फ युवा ही नहीं, आम वर्ग भी ओपी के साथ जुड़ रहा है। हो सकता है लोगों को लग रहा होगा, ओपी छत्तीसगढ़ में बीजेपी के भविष्य हैं।

आईएएस कमिश्नर

नगर निगमों में आईएएस कमिश्नर बनाने की शुरूआत अजीत जोगी शासन काल में हुई थी। जोगी ने रायपुर में सोनमणि बोरा और बिलासपुर में डाॅ0 एसके राजू को फस्र्ट आईएएस कमिश्नर बनाया था। बाद में रमन सरकार ने भिलाई में राजेश टोप्पो को आयुक्त बनाया। लेकिन, अब ये संख्या बढ़कर चार हो गई है। भूपेश सरकार ने कोरबा में आईएएस को बिठाया और अब रायगढ़ भी आईएएस कमिश्नर हो गया है। कोरबा आयुक्त जयवर्द्धने को इसी पद पर रायगढ़ भेजा गया है। जयवर्द्धने छत्तीसगढ़ के तीसरे आईएएस होंगे, जो दो नगर निगमों में कमिश्नर होंगे। सबसे पहिले अवनीश शरण बिलासपुर के बाद रायपुर के आयुक्त बनाए गए थे और उसके बाद सौरव कुमार बिलासपुर के बाद रायपुर नगर निगम कमिश्नर रहे।

सोनमणि का क्या?

आईएएस सोनमणि बोरा को भारत सरकार में सिंचाई संसाधन में ज्वाइंट सिकरेट्री की पोस्टिंग मिल गई है। लेकिन, राज्य सरकार से अभी तक उनकी रिलीविंग नहीं हो पाई है। हालांकि, रिलीविंग में ज्यादा टाईम लगता नहीं। कुछ घंटे में कई बार ऐसी फाइल ओके हो चुकी हैं। लेकिन, बोरा का महीना से ज्यादा हो गया। बोरा को कब तक ज्वाइनिंग देनी है, इसकी जानकारी नहीं। लेकिन, टाईम निकलने पर भारत सरकार उन्हें सेंट्रल डेपुटेशन की पोस्टिंग से डिबार कर देगी। केंद्र का नियम है पोस्टिंग आर्डर निकलने के बाद ज्वाईन करना होगा। पिछली सरकार में ऐसा ही आईएएस निधि छिब्बर के साथ हुआ था। सरकार ने सहमति देने के बाद भारत सरकार के लिए रिलीव करने से इंकार कर दिया था। इस पर केंद्र ने निधि को पंाच बरस के लिए डिबार कर दिया था। निधि फिर कैट में याचिका लगाई। कैट ने निधि के पक्ष में फैसला दिया तब जाकर करीब डेढ़ साल बाद वे दिल्ली जा पाईं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस पुलिस अधीक्षक के चलते एसपी की लिस्ट उलझ रही है?
2. एल्डरमैन की नियुक्ति में बोली लगने की बात क्या सही है?

 

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