राज्य स्त्रोत नि:शक्तजन संस्थान में वित्तीय अनियमितता मामला, कुछ शिकायतें निराधार साढ़े छ:सौ करोड़ की शिकायत पर आबंटन सिर्फ 18 करोड़!

कमेटी ने जांच के बाद सरकार को सौंपी थी रिपोर्ट

रायपुर ,01 फरवरी 2020। छत्तीसगढ़ के चर्चित राष्ट्रीय स्त्रोत नि:शक्तजन संस्थान में हुए घोटाले से स्थिति अब स्पष्ट और साफ होने लगी है। सूत्रों का कहना है, कि कुंदनलाल ठाकुर की शिकायत की जांच करने के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई थी। जिसमें उक्त संस्थान को मात्र 18 करोड़ की राशि आबंटित की गई थी, साढ़े 6 सौ करोड़ की राशि के आबंटन को निराधार बताया गया है, सूत्रों का मानना है, कि इस संबंध में संबंधित चार अफसरों को नोटिस जारी भी की गई थी। पूरी जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है, कि कुछ शिकायतें निराधार थी, चूंकि अब मामला हाईकोर्ट में लंबित है, अत: इस पर किसी तरह की रायशुमारी के लिए संबंधित अधिकारी परहेज कर रहे है।
राज्य स्त्रोत नि:शक्तजन संस्थान की जांच के लिए करीब डेढ़ साल पहले कमेटी बनाई गई थी। जांच प्रतिवेदन में कई शिकायतों को निराधार पाया गया था। साथ ही साथ वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार 4 अफसरों को नोटिस जारी किया गया था।
तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह के निर्देश पर याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ठाकुर की शिकायत की पड़ताल कराई गई थी। करीब सवा साल पहले जांच अधिकारी तत्कालीन वित्त सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने अपना प्रतिवेदन सरकार को दिया था। जांच प्रतिवेदन के आधार पर चार अफसरों को संस्थान में अनियमितता के लिए नोटिस भी जारी किया गया था।
संस्थान के फर्जी होने की शिकायत पर जांच प्रतिवेदन में यह कहा गया कि निशक्त जन संस्थान के द्वारा संचालित फिजिकल रिहेबिलीटेशन सेंटर भौतिक रूप से समाज कल्याण के माना परिसर में नियमित रूप से संचालित है। अभी तक 4341 मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रतिवेदन में यह भी कहा गया कि कुल 31 विभिन्न प्रकार की वित्तीय अनियमितता पाई गई है। जिसमें सक्षम स्वीकृति के बिना 25 लाख का आहरण करने और सवा चार करोड़ की राशि अन्य खाते में स्थानांतरित करने के लिए वित्तीय अनुमोदन नहीं लिया गया।
कर्मचारियों की सूची को फर्जी बताने की शिकायत पर प्रतिवेदन में यह कहा गया था रिहेबिलीटेशन सेंटर की स्थापना के लिए समाज कल्याण विभाग और इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेडक्रॉस के साथ एमओयू किया गया था। कर्मचारियों का वेतन भी आईसीआरसी द्वारा ही किया गया था। यह भी कहा गया है कि आईसीआरसी द्वारा मूल रूप से नियुक्त कर्मचारियों में से केवल एक कर्मचारी सेंटर में कार्यरत हैं। वर्तमान में कुल 21 कर्मचारियों द्वारा केंद्र में नियमित रूप से सेवाएं दी जा रही है।
यह भी कहा गया कि संस्थान में आउट सोर्सिंग के माध्यम से नियुक्ति कर निराश्रित निधि की राशि से भुगतान किया जा रहा है। शेष 10 कर्मचारियों को राज्य शासन से पीआरसी से वेतन भुगतान किया जा रहा है।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर विभाग के चार अफसर राजेश तिवारी, संयुक्त संचालक, हेरमन खलको, संयुक्त संचालक पंकज वर्मा और अनिल सौमित्र को प्रारंभिक रूप से नोटिस जारी किया गया है। मुख्य सचिव ने शपथ पत्र में भविष्य में संस्थान में सुधारात्मक कदम उठाने की भी जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि निशक्तजन संस्थान के कार्यों के स्पेशल ऑडिट में पाई गई वित्तीय अनियमितताएं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए विभाग के निर्देश में सोसायटी की नियमित बैठके, आंतरिक ऑडिट स्पष्ट वित्तीय शक्तियों के निर्धारण सहित अन्य सुसंगत कदम उठाएं जाएंगे।

साढ़े 6 सौ करोड़ घोटाले की शिकायत पर आबंटन सिर्फ 18 करोड़ !!!

राज्य स्त्रोत निशक्त जन संस्थान के नाम पर साढ़े 6 सौ करोड़ के घोटाले का आरोप है। पूर्व मुख्य सचिव अजय सिंह के जांच प्रतिवेदन में संस्थान के गठन को सही ठहराया गया है और कोई बड़े घोटाले का जिक्र नहीं है। यह भी बात सामने आई है कि पिछले 10 साल में संस्थान को सैकड़ों करोड़ तो दूर, सिर्फ 18 करोड़ का आबंटन हुआ है।
तत्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह के निर्देश पर याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ठाकुर की शिकायत की पड़ताल कराई गई थी। करीब सवा साल पहले जांच अधिकारी तत्कालीन वित्त सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने अपना प्रतिवेदन सरकार को दिया था।
संस्थान के फर्जी होने की शिकायत पर जांच प्रतिवेदन में यह कहा गया कि निशक्त जन संस्थान के द्वारा संचालित फिजिकल रिहेबिलीटेशन सेंटर भौतिक रूप से समाज कल्याण के माना परिसर में नियमित रूप से संचालित है। 4 हजार से मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। प्रतिवेदन में यह भी कहा गया कि कुल 31 विभिन्न प्रकार की वित्तीय अनियमितता पाई गई है। जिसमें सक्षम स्वीकृति के बिना 25 लाख का आहरण करने और सवा चार करोड़ की राशि अन्य खाते में स्थानांतरित करने के लिए वित्तीय अनुमोदन नहीं लिया गया था।

Spread the love