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Travel Astrology: यात्रा से पहले छोड़ दे ये सब,जानिए इससे जुड़ी धार्मिक बातें और अपने यात्रा को बनाये सुखद

Travel Astrology:यात्रा से जुड़ी कुछ बाते ज्योतिष में कही गई है, उसे मानकर चलने से यात्रा सुख हो सकती है, जानिए कैसे....

Travel Astrology: यात्रा से  पहले छोड़ दे ये सब,जानिए इससे जुड़ी धार्मिक बातें और अपने यात्रा को बनाये सुखद
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By Shanti Suman

Travel Astrology: यात्रा का हमारे जीवन में खास महत्व है..अक्सर हम किसी विशेष अभिप्राय के साथ ही कहीं के लिए यात्रा करते हैं । इसीलिए जब भी कोई घर से बाहर यात्रा के लिए प्रस्थान करता है तो उसे शुभकामनाएं दी जाती हैं ताकि उस यात्रा के साथ उसका अभिप्राय भी सफल हो। शास्त्रों में यात्रा में सम्बन्धित कई महत्वपूर्ण बाते बतायी गई हैं। शास्त्रों में बताई गईं इन बातों का पालन करने से हमारी यात्रा सुखद और सफल बन सकती है। आज हम आपको यात्रा से सम्बन्धित ऐसी महत्वपूर्ण बात बता रहे हैं ।

यात्रा से पहले भूलकर भी ना करें ऐसा

किसी भी महत्वपूर्ण यात्रा से पहले गलत या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। घर से बाहर कदम रखते हुए शुभ, पवित्र और मंगलकारी मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। यात्रा पर निकलने से पहले गलती से भी नदी, हवा, पर्वत, आग, धरती के बारे में अपशब्द ना कहें। यह ईश्वर की पवित्र देन हैं, इनका कभी भी मजाक नहीं करना चाहिए। साथ ही किसी भी रूप में प्राकृतिक संपति को भी हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। इनके अपमान से धन, मन, तन की ही नहीं बल्कि जीवन की हानि भी हो सकती है।

शुभ चौघड़िया मुहूर्त को ऐसे पहचानेंबहुत जल्दबाजी में यात्रा करना है तो ऐसी स्थिति में सबसे अच्‍छा है चौघड़िया या दुघड़िया मुहूर्त निकालकर उसके अनुसार यात्रा करें।चौघड़िया तथा दुघड़िया दोनों में बहुत ही सामान्य से नियम को माना जाता है- जैसे, जो सांस चल रही हो, वही पैर यात्रा के लिए आगे बढ़ाना चाहिए। इसके बारे में गांवों में एक कहावत काफी प्रचलित है – जेहि सुर चले वही पग दीजै, काहे को पोथी-पत्रा लीजै।। अर्थात- जो स्वर चल रहा हो, उसी के अनुसार कदम आगे बढ़ाकर यात्रा पर जाना चाहिए।

यदि किन्हीं जरूरी कारणों से यात्रा शुभ मुहूर्त में न की जा सकें तो उसी मुहूर्त में ब्राह्मण जनेऊ-माला, क्षत्रिय शस्त्र, वैश्य शहद-घी, शूद्र फल को अपने वस्त्र में बांधकर किसी के घर में एवं नगर से बाहर जाने की दिशा में रखें।

यात्रा के दौरान योगिनी वास का भी विचार किया जाना चाहिए। योगिनी का अलग-अलग तिथियों को भिन्न-भिन्न दिशाओं में वास होता है। योगिनी का वास परिबा को पूर्व दिशा में, दूज को उत्तर में, तीज को आग्नेय कोण में, पंचमी को दक्षिण, षष्ठी को पश्चिम, सप्तमी को ईशान में होता है। फिर नवमी से योगिनी का सिलसिला इसी प्रकार दोहराया जाता है।

यात्रा में दिशा का रखें ध्यान

उषाकाल में पूरब को, गोधू‍लि में पश्चिम को, अर्धरात्रि में उत्तर को और मध्याह्नकाल में दक्षिण को नहीं जाना चाहिए। वहीं राशि के अनुसार कुंभ और मीन के चन्द्रमा में अर्थात पंचक में दक्षिण कदापि न जाएं। मेष, सिंह और धनु राशि का चंद्रमा पूर्व में, वृष, कन्या और मकर राशि का दक्षिण में, मिथुन, तुला और कुम्भ का पश्चिम में, कर्क, वृश्चिक, मीन का चन्द्रमा उत्तर में रहता है। यात्रा में चन्द्रमा सम्मुख या दाहिने शुभ होता है। पीछे होने से मरणतुल्य कष्टऔर बाईं ओर होने से धनहानि होती है।

यदि किन्हीं जरूरी कारणों से यात्रा शुभ मुहूर्त में न की जा सकें तो उसी मुहूर्त में ब्राह्मण जनेऊ-माला, क्षत्रिय शस्त्र, वैश्य शहद-घी, शूद्र फल को अपने वस्त्र में बांधकर किसी के घर में एवं नगर से बाहर जाने की दिशा में रखें।

यात्रा से पहले छोड़ दे ये

शास्त्रों के अनुसार यात्रा के तीन दिन पहले दूध, पांच दिन पहले हजामत, तीन पहले तेल, सात दिन पहले मैथुन त्याग देना चाहिए। यदि इतना न हो सके तो कम से कम एक दिन पहले तो ऊपर की सब त्याज्य वस्तुओं को अवश्य ही छोड़ देना चाहिए।

उपर्युक्त चीजों के बजाए मन की सबसे प्रिय वस्तु को भी रखा जा सकता है। वैसे यात्रा के उत्तम समय को ऐसे जाना जाता है-समयशूल- उषाकाल में पूरब को, गोधू‍लि में पश्चिम को, अर्धरात्रि में उत्तर को और मध्याह्नकाल में दक्षिण को नहीं जाना चाहिए।घर से निकलने से पहले स्वर का ध्यान रखें। जो स्वर चल रहा हो सबसे पहले उसी पैर को बाहर निकालें। * घर से निकलने से पहले शुभ चौघडि़या जरूर देखें।

निकलते समय कुछ शब्दों का उच्चारण वर्जित है- जैसे जूता, चप्पल, लकड़ी, ‍किसी भी प्रकार की गाली, ताला, रावण, पत्थर, नहीं, मरना, डूबना, फेंकना, छोड़कर आना, और कोई भी नकारात्मक शब्द।




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