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Ram Lala Aarti Live 1 Jan 2026 : रामलला की मनमोहक मंगला आरती के साथ नए साल का स्वागत, दिव्य श्रृंगार देख भाव-विभोर हुए भक्त, लाइव दर्शन यहां

Ram Lala Aarti Live 1 Jan 2026 : अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में आज नए साल 2026 का आगाज बेहद आध्यात्मिक और भव्य रहा।

Ram Lala Aarti Live 1 Jan 2026 : रामलला की मनमोहक मंगला आरती के साथ नए साल का स्वागत, दिव्य श्रृंगार देख भाव-विभोर हुए भक्त, लाइव दर्शन यहां
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Ram Lala Aarti Live 1 Jan 2026 : रामलला की मनमोहक मंगला आरती के साथ नए साल का स्वागत, दिव्य श्रृंगार देख भाव-विभोर हुए भक्त, लाइव दर्शन यहां

By UMA

Ayodhya Ram Mandir Aarti Live 1 Jan 2026 : अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में आज नए साल 2026 का आगाज बेहद आध्यात्मिक और भव्य रहा। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद, भोर होते ही हजारों श्रद्धालु राम जन्मभूमि परिसर पहुँचे। नए साल के पहले दिन प्रभु रामलला के दर्शनों के लिए मंगला आरती में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। वेद मंत्रों के उच्चारण और शंखनाद के बीच जब प्रभु की आरती उतारी गई, तो पूरी अयोध्या नगरी जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठी।

Ayodhya Ram Mandir Aarti Live 1 Jan 2026 : भोर की पहली पूजा, ऐसे शुरू हुई रामलला की दिनचर्या? राम मंदिर में आज सुबह की शुरुआत प्रभु को जगाने की पारंपरिक रस्मों के साथ हुई। सबसे पहले प्रभु को प्रेमपूर्वक जगाया गया। इसके बाद दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक कर आरती उतारी गई। उसके बाद श्रृंगार आरती सुबह 6:15 - 6:30 बजे भोर की पहली किरण के साथ रामलला का दिव्य श्रृंगार किया गया। प्रभु को रेशमी वस्त्र पहनाए गए और आभूषणों से सजाया गया। फूलों की सुगंध और धूप के बीच भक्तों ने प्रभु के बाल स्वरूप के दर्शन किए।

आज दिनभर की आरतियों का समय

अब दिन के अगले पहर में, भगवान को विशेष राजभोग अर्पित करने के लिए दोपहर 12:00 बजे भोग आरती होगी, जिसमें रामलला को नाना प्रकार के सात्विक व्यंजनों का नैवेद्य लगाया जाएगा। जैसे ही दिन ढलेगा और सूर्यास्त की बेला आएगी, पूरा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी से जगमगा उठेगा और शाम 7:00 से 7:30 बजे के बीच भव्य संध्या आरती होगी। अंत में, दिनभर की सेवा और दर्शनों के बाद प्रभु को सुखद निद्रा और विश्राम कराने के लिए रात 10:00 बजे शयन आरती होगी, जिसके साथ ही नए साल के पहले दिन का यह मंगलकारी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण होगा।

दर्शन का समय और श्रद्धालुओं की भीड़

नए साल के पहले दिन को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विशेष इंतजाम किए हैं। आम भक्तों के लिए दर्शन सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और फिर दोपहर 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुले रहेंगे। दोपहर में दो घंटे के लिए मंदिर के कपाट बंद रहेंगे, जिस दौरान प्रभु विश्राम और भोजन ग्रहण करेंगे। मंदिर परिसर में सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए गर्म पानी और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है।

सरयू तट पर भी उत्सव का माहौल

राम मंदिर के साथ-साथ सरयू के घाटों पर भी आज सुबह से ही भक्तों की भीड़ है। लोग सरयू स्नान के बाद हनुमानगढ़ी के दर्शन कर रहे हैं और फिर रामलला के दरबार पहुँच रहे हैं। आज शाम को सरयू तट पर विशेष दीपदान और भव्य सरयू आरती का आयोजन भी किया जाएगा, जो नए साल की शाम को और भी ज्यादा भक्तिमय बना देगा।


श्री राम जन्मभूमि का इतिहास

उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या, जिसे ईश्वर का नगर कहा जाता है, प्रभु श्री राम की जन्मस्थली के रूप में अनादि काल से पूजनीय है। सरयू नदी के तट पर बसी यह नगरी न केवल आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति के 'मर्यादा पुरुषोत्तम' आदर्शों की साक्षी भी है। राम मंदिर का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही यह न्याय और सत्य की जीत का प्रतीक भी है।

प्राचीन काल और महाराजा विक्रमादित्य का योगदान

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या नगरी को विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु ने बसाया था। रामायण काल के बाद, समय के साथ मंदिर जर्जर हो गया था। कहा जाता है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने करीब 2000 साल पहले अयोध्या की खोज की और यहाँ एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था। उस समय मंदिर के स्तंभों को कसौटी के पत्थरों से बनाया गया था और इसकी सुंदरता देखते ही बनती थी।

मुगल काल और संघर्ष की शुरुआत

इतिहास के काले पन्नों के अनुसार, 16वीं शताब्दी 1528 ई. में मुगल आक्रांता बाबर के सेनापति मीर बाकी ने इस प्राचीन मंदिर को ढहाकर एक विवादित ढांचे का निर्माण कराया था। तब से ही हिंदू समाज ने अपनी इस पवित्र भूमि को वापस पाने के लिए निरंतर संघर्ष किया। इतिहासकारों के अनुसार, जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए सैकड़ों वर्षों में कई युद्ध लड़े गए और अनगिनत भक्तों ने अपना बलिदान दिया।

आधुनिक भारत और कानूनी लड़ाई

राम मंदिर का मामला आधुनिक भारत की सबसे लंबी कानूनी लड़ाइयों में से एक रहा। साल 1949 में विवादित ढांचे के भीतर रामलला की मूर्तियाँ प्रकट हुईं, जिसके बाद इसे कानूनी रूप से कुर्क कर दिया गया। 1980 के दशक में 'राम जन्मभूमि आंदोलन' ने जन-जन को एकजुट किया। अंततः, 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें पूरी भूमि रामलला को सौंप दी गई और भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

दिव्य वास्तुकला और आधुनिक राम मंदिर

आज जो भव्य मंदिर हम देख रहे हैं, वह ' नागर शैली में बनाया गया है। यह मंदिर दुनिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने में लोहे या स्टील का प्रयोग नहीं किया गया है, बल्कि पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों और इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर के खंभों और दीवारों पर देवी-देवताओं की सुंदर नक्काशी की गई है, जो हमारी प्राचीन स्थापत्य कला की याद दिलाती है।

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