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Mauni Amavasya 2026 : क्या है मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने का रहस्य ! जान लें इस व्रत के नियम-महत्व, शुभ मुहूर्त-तिथि और कौन रख सकता है ?

Mauni Amavasya 2026 : मौनी अमावस्या आपको एक ऐसा अवसर प्रदान करता है कि आप शांत चित्त से ईश्वर और स्वयं की खोज कर सकते हैं.

Mauni Amavasya 2026 : क्या है मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने का रहस्य ! जान लें इस व्रत के नियम-महत्व, शुभ मुहूर्त-तिथि और कौन रख सकता है ?
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By Meenu Tiwari

Mauni Amavasya subh tithi muhurt : इस साल की मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है. मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान और दान तो होता है, लेकिन इस दिन मौन व्रत रखने का भी विधान है. अब बहुत से लोगों के मन में प्रश्न होगा कि मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत कैसे रखते हैं ? मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने का नियम क्या है ? मौन व्रत रखने की विधि क्या है और इसका पारण कैसे करते हैं ? मौन व्रत पूरे दिन रखना होता है या कुछ समय के लिए ? आज के समय में पूरे दिन मौन व्रत रखना भी मुश्किल है.


वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह की अमावस्या तिथि 17 जनवरी को देर रात 12 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी और 18 जनवरी को देर रात 1 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी.

आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर रखने वाले मौन व्रत के बारे में.




मौनी अमावस्या पर मौन व्रत के नियम और विधि


मौन व्रत रखना कठिन होता है, सभी लोगों के लिए यह आसान काम नहीं है. मौन व्रत रखने का उद्देश्य मानव जीवन की सार्थकता, उच्च चेतनावस्था और आध्यात्मिक विकास को प्राप्त करना है. यह समझना है कि मानव जीवन क्यों प्राप्त हुआ है? लोभ, मद, मोह, काम, क्रोध जैसी नकारात्मकता को स्वयं से दूर करके अपना आत्मिक विकास करना मौन व्रत का उद्देश्य है. पूरे वर्ष आप भौतिक जीवन के भाग-दौड़ में व्यतीत कर देते हैं, मौनी अमावस्या आपको एक ऐसा अवसर प्रदान करता है कि आप शांत चित्त से ईश्वर और स्वयं की खोज कर सकते हैं.


मौन व्रत के दो नियम


जो लोग मौन व्रत रखना चाहते हैं, वे जान लें कि मौन व्रत के लिए दो नियम हैं. पहला नियम आसान है, जबकि दूसरा सामान्य लोगों के लिए काफी कठिन हो सकता है.

पहला नियम : मौन व्रत स्नान करने तक रखा जाता है. उठने और स्नान करने तक के बीच के समय में आपको कुछ भी नहीं बोलना होता है. मौन व्रत रखना होता है. स्नान के बाद आप बोलें, हरि का भजन करें.

दूसरा नियम : मौन व्रत का यह नियम पूरे दिन के लिए होता है. व्रत रखने वाला व्यक्ति संकल्प करके मौन व्रत रखता है. वह सुबह उठने से लेकर अगले दिन पारण करने तक मौन रहता है. एक शब्द नहीं बोलता है. यदि आप इस बीच में बोलते हैं तो आपका व्रत टूट जाता है. यह व्रत बिना संकल्प के पूर्ण नहीं होता है. संकल्प करके मौन व्रत करते हैं और वो टूट जाता है तो दोष लगता है.




मौन व्रत की विधि


मौनी अमावस्या से पहली रात यानि 17 जनवरी की रात जब आप सोने जाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि 18 जनवरी को सुबह उठने पर कुछ न बोलें. अपनी दैनिक क्रिया करें. स्नान करके सूर्य को अर्घ्य, पितरों को तर्पण दें और दान करें. उसके बाद बोलें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौन व्रत के बाद जब बोलें तो अपने इष्ट देव का नाम लें या भजन कर लें. यह मौन व्रत उठने से लेकर स्नान करने तक का है.

जो लोग पूरे दिन मौन व्रत रखना चाहते हैं, उनको पहले की प्रक्रिया का पालन करना है. स्नान करने के बाद आप हाथ में जल लेकर मौन व्रत का संकल्प करें. फिर पितरों के लिए तर्पण, दान आदि करें. दिनभर मौन रहें. यह एक कठिन कार्य है, इसके लिए एकांत की आवश्यकता होगी. मौन के समय में आप अपने इष्ट देव के नाम का मानसिक जाप करें. मानसिक जाप में मुंह से शब्द नहीं बोले जाते, मन में जाप करते हैं. आध्यात्म, ईश्वर और आत्मा के संबंध का विचार करें. जीवन के उद्देश्य को समझने का प्रयास करें.

मौन व्रत का पारण कैसे करें?


रात्रि के समय में शयन करने के बाद जब अगले दिन उठें, तो दैनिक क्रिया से निवृत होकर स्नान करें. उसके बाद आप सबसे पहले अपने गुरु मंत्र, इष्ट देव के नाम या किसी भजन से पहला शब्द बोलना शुरू करें. जब हम कोई व्रत रखते हैं तो वह सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है, उसके बाद अन्न, फल, तुलसी दल आदि खाकर पारण करते हैं. यह मौन व्रत है, तो इसका पारण आपके भजन, मंत्र जाप के प्रारंभ से होगा क्योंकि आप पूरे दिन मौन रहते हैं और मौन की प्रक्रिया शुभ शब्दों के उच्चारण से पूर्ण होनी चाहिए. जब आप मंत्र, नाम जाप, भजन आदि करेंगे तो आपका मौन व्रत पूर्ण हो जाएगा.


कौन रख सकता है मौन व्रत?


मौनी अमावस्या पर मौन व्रत सभी लोग रख सकते हैं, लेकिन बच्चों को नहीं रखना चाहिए. बच्चे चंचल होते हैं, उनसे पूरे एक दिन व्रत रखना संभव नहीं है. वे बोल ही देते हैं. वे काफी समय तक चुप नहीं रह सकते हैं.


मौनी अमावस्या 2026 तिथि


वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह की अमावस्या तिथि 17 जनवरी को देर रात 12 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी और 18 जनवरी को देर रात 1 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी.




मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का महत्व


मौनी अमावस्या के दिन केवल स्नान-दान का ही महत्व नहीं होता, बल्कि इस दिन मौन व्रत रखना बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. धर्म ग्रंथों में कहा गया है कि मनुष्य को अपनी इन्द्रियों को वश में रखना चाहिए. धीरे-धीरे अपनी वाणी को संयत करके अपने वश में करना ही मौन व्रत है. इसलिए मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने से इंद्रियों को वश में किया जाता है और सुविचार मन में लाए जाते हैं. इस दिन मौन व्रत धारण करके ही स्नान करना चाहिए.

मौन व्रत के नियम


मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करना चाहिए. स्नान करने से लेकर दान करने तक मौन रहना चाहिए और ध्यान रखें कि मौन व्रत रखते समय मन में भी अच्छे विचार लाएं और भगवान के नाम का जाप करते रहें. यदि संभव हो तो मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत करके किसी एकांत स्थान पर रहें. इससे मन की शुद्धि होती है और आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है. इस दिन मौन व्रत करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है. यदि संभव हो तो मौनी अमावस्या पर पूरे दिन मौन व्रत रखना चाहिए.

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