Makar Sankranti 2026 : सात योगों की प्रभावशाली मकर संक्रांति 14 को ! जानिए इस बार किस वाहन और वर्ण में आएंगे संक्रांति
Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति का वाहन और वर्ण इत्यादि इस प्रकार होंगे. वाहन : व्याघ्र, उपवाहन : अश्व वस्त्र का वर्ण : पीला हाथ मे गदा लिए,खीर भक्षण करती हुई , कुमकुम का देह मे लेप किये हुए, भूत जाती वाली, चमेली का फूल हाथ मे लिए हुए आएगी|

Makar Sankranti 2026 : 14 तारीख को दोपहर 3.05 बजे सूर्य के मकर राशी में प्रवेश करते ही सूर्य उत्तरायण का हो जायेगा, अर्थात सूर्य पृथ्वी के उत्तरी भाग में अपना अधिकाधिक प्रकाश उत्सर्जित करेगा| अत: 14 तारीख को संक्रांति मनाई जायेगी| ज्योतिषाचार्य डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार लगभग पाँच माह तक यही स्थिती बनी रहेगी और उसके पश्चात मई माह में कर्क राशी में प्रवेश करते ही सूर्य दक्षिणायन का हो जायेगा|
"मुहुर्त चिंतामणी" ग्रंथ के अनुसार दिन के करण के आधार पर मकर संक्रांति की सवारी, वर्ण, स्वरूप इत्यादि का निर्धारण किया जाता है। 14 तारीख को “बालव ” करण है अत: मकर संक्रांति का वाहन और वर्ण इत्यादि इस प्रकार होंगे: वाहन : व्याघ्र उपवाहन : अश्व वस्त्र का वर्ण: पीला हाथ मे गदा लिए,खीर भक्षण करती हुई , कुमकुम का देह मे लेप किये हुए, भूत जाती वाली, चमेली का फूल हाथ मे लिए हुए आएगी|
"मुहुर्त चिंतामणी" ग्रंथ के अनुसार जब सूर्य मकर राशी में प्रवेश करता है तो प्रवेश करने के पूर्व और पश्चात, 16 घटी याने लगभग 384 मिनट का पूण्य काल होता है| और यह भी लिखा है की जब दोपहर में सूर्य मकर राशी में प्रवेश करे तो सूर्यास्त तक पुण्यकाल होता है|
मकर संक्रांति 2024 पुण्यकाल
14 जनवरी को मकर संक्रांति का पुण्यकाल दोपहर 3.03 मिनट से प्रारंभ हो रहा है और यह सायंकाल 05 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. सूर्य का यह संक्रमण शनि प्रधान अनुराधा नक्षत्र के मध्य में 7 महत्वपूर्ण योगों में हो रहा है जो की सभी के लिए अत्यंत लाभप्रद है|
सात महत्वपूर्ण योग
- सूर्य-शनि का दुर्लभ संयोग : सूर्य देव का अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश, जब चन्द्र भी शनि प्रधान राशि मे होगा| जो भाग्य, धन और करियर के लिए बड़ा बदलाव लाता है।
- षट्तिला एकादशी : मकर संक्रांति का षट्तिला एकादशी के संयोग में पड़ना, जो हरि-हर (विष्णु और शिव) की कृपा दिलाता है और कष्टों को दूर करता है।
- सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग : ये योग सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं और स्वास्थ्य व समृद्धि बढ़ाते हैं, इनका प्रभाव 14 जनवरी को सुबह से अगले दिन तक रहेगा।
- वृद्धि और ध्रुव योग : वृद्धि योग नए कार्यों में सफलता और धन लाभ देता है, वहीं ध्रुव योग स्थिरता और मानसिक शांति प्रदान करता है।
- ज्येष्ठा नक्षत्र : पूरे दिन ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिससे नेतृत्व क्षमता और बुद्धि बढ़ती है, जो सूर्य पूजा के लिए शुभ है।
- गुरुवार का दिन: मकर संक्रांति का गुरुवार को पड़ना भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ है।
- तिल द्वादशी: यह तिथि पितरों के तर्पण और तिल दान के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे पारिवारिक सुख-समृद्धि बढ़ती है।
प्रगति के नए अवसर प्राप्त होंगे
चन्द्र के शनि प्रधान अनुराधा और बुध प्रधान ज्येष्ठा नक्षत्र में रहते हुए सूर्य का राशी परिवर्तन सभी के लिये लाभदायक होगा। सूर्य का यह संक्रमण सभी के लिए लाभ्दायक होगा, क्यों कि यह संयोग सभी की एकरूपता को भंग करेगा, जिससे नए विचार और नया दृष्टिकोण विकसित होगा| नए अवसर भी प्राप्त होंगे| वे लोग जो प्रगति नही कर पा रहे उन्हें प्रगति की नई इच्छा शक्ति प्राप्त होगी| धन धान्य की परिपूर्ति भी होगी |
सूर्य सम्बन्धी दोषों से मुक्त होंगे आप
सूर्य सम्बंधी दोषों के समाधान के लिये यह संक्रांती अत्यंत कारक समय होगा| यदि आप रक्त,संतान,मस्तिष्क सम्बंधी समस्या या उच्च पक्तचाप से परेशान है, तो यह लक्षण है, कि आप की कुंडली में सूर्य या तो नीच का होकर तुला राशी में स्थित है या वृषभ, धनु या मीन राशी में है।
उपाय
स्वास्थ्य सम्बंधी इन समास्याओं के समाधान हेतु बुधवार 14 तारीख को प्रात:काल एक ताम्बे के पात्र में जल लेकर उस में कुंकुम,शक्कर और एक बेलपत्र डालें और इस मंत्र से सुर्य को सात बार जल दे| प्रत्येक रविवार को सूर्य को इसी तरह जल दें।
मंत्र : " नमो नम: सहस्रांशु आदित्याय नमो नम: ह्रीं सूर्याय नम:"
तिल,लाल वस्त्र,हरे फल और शक्कर या गुड का दान करें|
ऐसे होगा आर्थिक समस्या का समाधान
यदि आप रोजगार की स्थिती से परेशान है और आर्थिक समस्या,ऋण सम्बंधी समस्या से भी ग्रस्त है तो रविवार को यह उपाय करें :
उपाय
||ह्रीं श्रीं आदित्य वर्णे तपसोधि जातों ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:॥लाल आसन पर बैठ कर इस मंत्र का जाप करें| तत्पश्चात शिवालय में जाकर शिव मंत्रों का जाप करते हुए जल चढाये| साय्ंकाल लक्ष्मी नारायण के मन्दिर में जाकर एक नारियल पर हल्दी से स्वास्तिक बनाकर अर्पित करें| अवश्य लाभ होगा|
