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Mahakal Bhasm Aarti Live Today : भस्म आरती में दिखा त्रिकालदर्शी का अलौकिक रूप, घर बैठे देखें आज का भव्य श्रृंगार...

Mahakal Bhasm Aarti Live Today 20 Feb : आज फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि दिन शुक्रवार है. विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर के दरबार में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती अद्भुत और आलौकिक होती है. ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली इस आरती में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने देश-दुनिया से श्रद्धालु उज्जैन पहुँचते हैं.

Mahakal Bhasm Aarti Live Today : भस्म आरती में दिखा त्रिकालदर्शी का अलौकिक रूप, घर बैठे देखें आज का भव्य श्रृंगार...
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Mahakal Bhasm Aarti Live Today : भस्म आरती में दिखा त्रिकालदर्शी का अलौकिक रूप, घर बैठे देखें आज का भव्य श्रृंगार...

By Uma Verma

Mahakal Bhasm Aarti Live 20 February 2026 : उज्जैन : आज फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि दिन शुक्रवार है. आज सुबह से महाकाल मंदिर में भक्ति का एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है. महाकाल के दरबार में लाखों भक्तो की भारी भीड़ है. श्रद्धालु आधी रात से ही लंबी लाईनों में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रहें, आज सुबह जब मंदिर का पट खोला गया तो जय महाकाल के जय घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा भक्तो ने साक्षात् त्रिकालदर्शी बाबा महाकाल के दर्शन किए फिर महाकाल का खास श्रृंगार शुरू किया गया.


महाकाल श्रृंगार आरती

महाकाल मंदिर में आज सुबह 4 बजे जब मंदिर का पट खोला गया तो रोज की तरह आज भी सबसे पहले भोलेनाथ का दूध दही घी शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया फिर भोलेनाथ को गर्म निर्मल जल से स्नान कराया गया उसके बाद मंत्रो के उच्चारण के साथ भोलेनाथ का मनमोहक श्रृंगार किया गया. भगवान भोलेनाथ को फूलो की माला पहनाई गई बेल पत्र चढ़ाया गया भांग अर्पित की गई और राजसी सुंदर मुकुट पहनाया गया, चन्दन सिंदूर और बंदन का टिका लगाया गया नए वस्त्र धारण कराये गए गले में पीले और बैगनी रंग के फूलो के साथ रुद्राक्ष की माला और नाग की माला पहनाई गई फलो और कई प्रकार के मिठाईयों का भोग लगाया गया महाकाल मंदिर में भोलेनाथ को दिन भर अलग-अलग सिंगार के साथ अनेको रूपों में सजाया जाता है भगवान महाकाल के एक ही दिन में कई रूपों के दर्शन होते है.

महाकाल भस्म आरती

फिर कपूर आरती की गई उसके बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाया गया फिर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म की पोटली बनाकर एक महीन सुभी कपडे में बांधकर भोलेनाथ पर हल्के हाथों से बिखेरा जाता है जिसे भस्म आरती कहा जाता है यह भस्म आरती करीब 2 घंटे तक की जाती है ढोल नगाड़ो की थाप और मधुर मंत्रो से मंदिर परीसर भक्तिमय हो जाता है त्रिकालदर्शी महाकाल के दर्शन कर भक्त निहाल हो जाते है मान्यता ऐसी है की इस भस्म आरती के दौरान साक्षात् महाकाल के दर्शन होते है ये जो भस्म की वर्षा भोलेनाथ पर की जाती उसे कपिला गाय के गोबर से बने कंडे शमी पीपल पलास और बेर पेड़ के लकड़ियों को एक साथ जलाकर तैयार किया जाता है.

दिनभर महाकाल की सेवा

आरती का समय : सबसे पहले भस्म आरती 4 से 6 बजे तक की जाती है उसके बाद दद्योतक आरती 7:30 से 8:15 बजे तक चलती है उसके बाद भोग आरती 10:30 से 11:15 बजे तक की जाती है जिसमे मौसम के अनुसार भोलेनाथ को भोग लगाया जाता है भोग की पूरी थाल सजाई जाती है उसके बाद शाम को संध्या आरती होती है जो 6:30 से 7:15 बजे तक की जाती है उसके बाद अंत में शयन आरती रात 10:30 से 11:00 बजे तक की जाती है फिर दूसरे दिन तक के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाते है इसी तरह दिन भर महाकाल अपने भक्तो को अलग-अलग रूपों में दर्शन देते है.

खास मान्यता

महाकाल मंदिर की एक और खास मान्यता है की अगर आप महाकाल दर्शन पर आ रहे है तो जुना महाकाल के दर्शन जरुर करे मतलब यहाँ मंदिर परिसर में ही जुना महाकाल का मंदिर है कहा जाता है की जुना महाकाल के दर्शन बिना महाकाल दर्शन अधुरा माना जाता है इसलिए जब भी आप उज्जैन महाकाल दर्शन पर आये तो जुना महाकाल के दर्शन जरुर करें और अपनी धर्मिक यात्रा को पूरी करें.

मंदिर से जुड़ी जरुरी जानकारी

उज्जैन महाकाल मंदिर से जुडी कोई भी जानकारी के लिए आप इस टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 18002331008 में फोन कर सकते है महाकाल मंदिर में दर्शन आदि की जानकारी पूजा पाठ दान आदि की पूरी जानकारी के लिए आप इन नंबरों 0734-2559272, 2559277, 2559276, 2559275 पर फोन कर घर बैठे पा सकते है.

महाकाल मंदिर का इतिहास

मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास सदियों पुराना और बेहद गौरवशाली है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर स्वयंभू है, यानी यहाँ शिवलिंग प्रकट हुआ था. प्राचीन काल से ही महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता रहा है. पुराने ग्रंथों और कालिदास की रचनाओं में भी इस भव्य मंदिर का जिक्र मिलता है. इतिहास गवाह है कि समय-समय पर कई राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार कराया, लेकिन 13वीं शताब्दी में इल्तुतमिश के आक्रमण के दौरान मंदिर को काफी नुकसान पहुँचाया गया था.

करीब 500 साल पहले मराठा साम्राज्य के दौरान इस मंदिर का आधुनिक स्वरूप तैयार हुआ. पेशवा बाजीराव के सेनापति राणोजी सिंधिया ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया और इसे दोबारा वही भव्यता दी जो आज हम देखते हैं. महाकाल मंदिर की सबसे खास बात इसका दक्षिणमुखी होना है, जिसे तंत्र साधना और मोक्ष की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यहाँ होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती और महाकाल लोक का निर्माण इस मंदिर के ऐतिहासिक सफर में एक नया और आधुनिक अध्याय है.

Uma Verma

Uma Verma is a postgraduate media professional holding MA, PGDCA, and MSc IT degrees from PTRSU. She has gained newsroom experience with prominent media organizations including Dabang Duniya Press, Channel India, Jandhara, and Asian News. Currently she is working with NPG News as acontent writer.

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