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Kesriya bhat in Basant Panchami: बसंत पंचमी पर पीले चावल क्यों बनाएं जाते हैं ? क्या है इसका मां सरस्वती से संबंध, आइए जाने Recipe से लेकर पौराणिक महत्व

Kesriya bhat in Basant Panchami : पीला चावल (केसरिया चावल) बनाने में केसर का उपयोग किया जाता है, जो सरस्वती का प्रतीक है।

Kesriya bhat in Basant Panchami: बसंत पंचमी पर पीले चावल क्यों बनाएं जाते हैं ? क्या है इसका मां सरस्वती से संबंध, आइए जाने Recipe से लेकर पौराणिक महत्व
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By Meenu Tiwari

Saffron rice on Basant Panchami : बसंत पंचमी पर पीले परिधान पहनने के साथ पीले चावल खाने की भी परंपरा है. इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले फूल चढ़ाना और सबसे खास है पीले चावल (केसरिया चावल या केसर भात) का प्रसाद और भोजन करना प्रमुख माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बसंत पंचमी पर पीले चावल क्यों खाए जाते हैं ? इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण क्या हैं। अगर नहीं, तो आइए जानते हैं।

बसंत पंचमी को सरस्वती जयंती भी कहा जाता है। देवी सरस्वती ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी हैं, और उनका प्रिय रंग पीला है। पीला रंग सूर्य, ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक है। बसंत पंचमी पर पीले चावल बनाकर देवी को प्रसाद चढ़ाया जाता है और फिर परिवार के साथ ग्रहण किया जाता है।




पौराणिक कथा


पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन देवी सरस्वती ने ब्रह्मा जी को वेदों का ज्ञान दिया था। पीला चावल (केसरिया चावल) बनाने में केसर का उपयोग किया जाता है, जो सरस्वती का प्रतीक है। केसर से बने पीले चावल का प्रसाद चढ़ाने से बुद्धि, विद्या और स्मृति में वृद्धि होती है। इसके साथ ही यह पर्व बसंत ऋतु के स्वागत का भी प्रतीक होता है। पीला रंग बसंत के फूलों और फसलों का प्रतीक है। कई जगहों पर मान्यता है कि पीले चावल खाने से सरस्वती देवी प्रसन्न होती हैं और बच्चे पढ़ाई में सफल होते हैं, जीवन में ज्ञान की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

क्या है वैज्ञानिक और मौसमी कारण ?

बसंत पंचमी जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में आती है, जब सर्दी अपने चरम पर होती है और शरीर में ठंडक बढ़ जाती है। इस मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और इम्यूनिटी कम होती है। पीले चावल (केसरिया चावल) में केसर, हल्दी, दूध, घी और इलायची जैसे तत्व मिलाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं।

केसर में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी से बचाते हैं। घी और दूध से ऊर्जा मिलती है और पाचन मजबूत होता है। इस तरह पीले चावल न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि सर्दियों के मौसम में शरीर को पोषण और गर्माहट प्रदान करते हैं।




वसंत पंचमी के दिन मीठे में जरूर बनाएं केसरी भात, बेहद आसान है रेसिपी


सामग्री :

  • 1 कप बासमती चावल
  • 2 कप पानी
  • 1/2 कप चीनी
  • 2 बड़े चम्मच घी
  • 10-12 किशमिश
  • 10-12 काजू
  • 5-6 बादाम
  • 10-12 खोबरे के टुकड़े
  • 5-6 केसर के धागे
  • 1/2 चम्मच इलायची पाउडर
  • 1/2 चम्मच दालचीनी पाउडर
  • 4-5 लौंग

विधि

  • केसरी भात बनाने के लिए सबसे पहले बासमती चावल को अच्छी तरह धोकर 30 मिनट के लिए पानी में भिगो दें।
  • एक नॉन-स्टिक पैन में घी गरम करें और इसमें किशमिश, काजू, बादाम और खोबरे के टुकड़े को हल्का सुनहरा होने तक भून लें।
  • अब एक कुकर में भिगोए हुए चावल, पानी, चीनी, इलायची पाउडर और दालचीनी पाउडर डालें। कुकर को बंद करके 2-3 सीटी आने तक पकाएं।
  • इसके बाद एक छोटे बाउल में केसर के धागे को गर्म दूध या पानी में भिगो दें।
  • कुकर का प्रेशर रिलीज होने के बाद, इसमें केसर का घोल और भूने हुए सूखे मेवे डालें। धीमी आंच पर 2-3 मिनट तक पकाएं।
  • केसरी भात को एक बाउल में निकालें और ऊपर से बचे हुए सूखे मेवों से गार्निश करें और मां सरस्वती को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
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