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Jaya Ekadashi Vrat 2026 : जया एकादशी कल ! जया एकादशी पर दान करने से तीन गुना मिलता है ज्यादा फल, जानिए क्यों ?

Jaya Ekadashi Vrat 2026 : माघ मास में पड़ने वाली जया एकादशी पर दान करने पर साधक को तीन गुना ज्यादा फल मिलता है.

Jaya Ekadashi Vrat 2026 : जया एकादशी कल ! जया एकादशी पर दान करने से तीन गुना मिलता है ज्यादा फल, जानिए क्यों ?
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By Meenu Tiwari

Jaya Ekadashi Vrat 2026 : कल जया एकादशी है. नए वर्ष के जनवरी माह की यह अंतिम एकादशी है. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्री विष्णु के व्रत और पूजन से जीवन की सभी परेशानियां दूर होने के साथ ही बाधाओं आदि से भी मुक्ति दिलाता है. यह पुण्यों को प्राप्ति दिलाने वाला व्रत है. मान्यता है कि जया एकादशी व्रत को करने वाले साधक पर पूरे साल श्री हरि की कृपा बरसती है और उसके सारे काम समय पर मनचाहे तरीके से पूरे होते हैं. माघ मास में पड़ने वाली जया एकादशी पर दान करने पर साधक को तीन गुना ज्यादा फल मिलता है. आइए जया एकादशी व्रत की पूजा विधि, कथा, नियम आदि के बारे में विस्तार से जानते हैं.


जया एकादशी व्रत कब है


29 जनवरी 2026, गुरुवार जया एकादशी व्रत का पारण का समय : 30 जनवरी 2026 की सुबह 06:41 से 08:56 बजे के बीच में माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी प्रारंभ : 28 जनवरी 2026, बुधवार की शाम 04:35 बजे माघ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी समाप्त : 29 जनवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 01:55 बजे




जया एकादशी व्रत की विधि (Jaya Ekadashi Vrat Puja Vidhi)


जया एकदशी व्रत वाले दिन प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठ जाएं. इसके बाद तन-मन से पवित्र होने के बाद श्री हरि का ध्यान करते हुए व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लें. इसके बाद घर के पूजा घर या फिर ईशान कोण में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें. एकादशी व्रत की पूजा में श्री हरि को सबसे पहले शुद्ध जल अर्पित करें. इसके बाद उन्हें चंदन, रोली, धूप-दीप, फल-फूल, तुलसी दल, पंचामृत आदि अर्पित करें. इसके बाद जया एकादशी व्रत की कथा कहें या सुने. कथा सुनने के बाद भगवान श्री विष्णु और एकादशी माता की आरती अवश्य करें. पूरे दिन व्रत करने के बाद अगले दिन शुभ मुहूर्त में इसका पारण करें और भगवान विष्णु से स्वयं तथा अपने परिवार के लिए मंगलकामना करें.


जया एकादशी व्रत की कथा (Jaya Ekadashi Vrat Kath)


हिंदू मान्यता के अनुसार एक बार देवताओं के राजा इंद्र ने एक गंधर्व से नाराज होकर उसे उसकी पत्नी समेत पिशाच बनने का श्राप ​दे दिया. जिसके बाद वह गंधर्व अपनी पत्नी के पिशाच योनि में आ गये और पृथ्वी पर जगह-जगह भटकने लगे. पृथ्वी पर कई साल तक भटकते-भटकते उन गंधर्व युगल को एक दिन एक ऋषि मिले. तब उन दोनों ने ऋषि से पिशाच योनि से मुक्ति का उपाय पूंछा. ऋषि ने उन दोनों को पिशाच योनि से मुक्ति पाने के लिए जया एकादशी व्रत करने को कहा.


इसके बाद ऋषि की आज्ञा और बताए गये तरीके से गंधर्व युगल ने पूरे विधि-विधान से जया एकादशी व्रत को किया. मान्यता है कि जया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से गंधर्व युगल को पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई. हिंदू मान्यता के अनुसार जया एकादशी का व्रत को विधि-विधान से करते हुए इस पावन कथा को कहने वाले साधक पर शीघ्र ही श्री हरि की कृपा बरसती है और वह सभी प्रकार के सुख और सौभाग्य को प्राप्त करता हुआ अंत में बैकुंठ लोक को प्राप्त होता है.




जया एकादशी व्रत के 7 नियम (Jaya Ekadashi Vrat Rules)


1. जया एकादशी व्रत करने वाले साधक को इस दिन देर तक नहीं सोना चाहिए, बल्कि भोर में उठकर स्नान-ध्यान करके सूर्य नारायण को अर्घ्य देना चाहिए.

2. एकादशी व्रत वाले दिन पीले रंग या फिर उजले रंग के कपड़े पहनें. भूलकर भी काले रंग के कपड़े पहनने की गलती न करें.

3. एकादशी व्रत वाले दिन भूलकर भी तुलसी न तोड़ें. भगवान विष्णु की पूजा के लिए तुलसी दल पहले से ही तोड़कर रख लें.

4. एकादशी व्रत करने वाले साधक को भूलकर भी चावल और तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.

5. भगवान विष्णु की कृपा बरसाने वाले एकादशी व्रत में उनकी पूजा करते समय कथा का पाठ और आरती जरूर करें. ध्यान रहे कि यह व्रत तब तक अधूरा रहता है जब तक इसका अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण न किया जाए.

6. जया एकादशी व्रत करने वाले साधक को विशेष रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

7. जया एकादशी व्रत वाले दिन खाली समय में किसी की आलोचना या निंदा करने की बजाय भजन, कीर्तन, मंत्र जप आदि करें.



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