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Holika Dahan Special: होली इस दिन मनाई जायेगी, जानिए इस त्योहार से जुड़ी शिक्षाप्रद कहानियां

Holika Dahan Special:होली कबमनाई जायेगी और होली से जुड़ी कथा क्या है जानिए...

Holika Dahan Special: होली इस दिन मनाई जायेगी, जानिए इस त्योहार से जुड़ी शिक्षाप्रद कहानियां
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By Shanti Suman

Holika Dahan Special: होली सांप्रदायिक सौहार्द का त्योहार है। दीवाली की तरह ही इस त्योहार को भी अच्छाई की बुराई पर जीत का त्योहार माना जाता है। हिंदुओं के लिए होली का पौराणिक महत्व भी है। इस त्योहार को लेकर सबसे प्रचलित है प्रहलाद, होलिका और हिरण्यकश्यप की कहानी। लेकिन इससे केवल यही नहीं बल्कि और भी कई कहानियां प्रचलित है।

इस साल लोगों को होली की डेट को लेकर बहुत बड़ा संशय है आखिर किस दिन मनाई जाएगी।रंग खेलने वाली होली, 24 या 25 मार्च किस दिन खेली जाएगी। होली का पर्व दो दिन मनाया जाता है. पहले दिन छोटी होली मनाई जाती है, इस दिन सूर्यास्त के बाद होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन साल 2024 में 24 मार्च के दिन होगा.पंचांग के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त - 24 मार्च को रात 11.13 मिनट से लेकर 00:27 तक रहेगा।

होलिका दहन भद्रा काल में करना शुभ नहीं माना जाता। साल 2024 में होलिका दहन की शाम को भद्रा का साया है। 24 मार्च को शाम 6.33 मिनट से 10.06 तक भद्रा काल रहेगा। इसके बाद आप शुभ मुहूर्त में होलिका दहन कर सकते हैं। जानते हैं होली और होलिका दहन से जुड़ी कथा

होली की उससे जुड़ी कहानियां

होली की एक कहानी कामदेव की है।मान्यता है कि पार्वती शिव से विवाह करना चाहती थीं लेकिन तपस्या में लीन शिव का ध्यान उनकी ओर गया ही नहीं। ऐसे में प्यार के देवता कामदेव आगे आए और उन्होंने शिव पर पुष्प बाण चला दिया।तपस्या भंग होने से शिव को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और उनके क्रोध की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए। कामदेव के भस्म हो जाने पर उनकी पत्नी रति रोने लगीं और शिव से कामदेव को जीवित करने की गुहार लगाई। अगले दिन तक शिव का क्रोध शांत हो चुका था, उन्होंने कामदेव को पुनर्जीवित किया। कामदेव के भस्म होने के दिन होलिका जलाई जाती है और उनके जीवित होने की खुशी में रंगों का त्योहार मनाया जाता है।

महाभारत के अनुसार युधिष्ठर को श्री कृष्ण ने बताया- एक बार श्री राम के एक पूर्वज रघु, के शासन मे एक असुर महिला धोधी थी। उसे कोई भी नहीं मर सकता था, क्योंकि वह एक वरदान द्वारा संरक्षित थी। उसे गली मे खेल रहे बच्चों, के अलावा किसी से भी डर नहीं था। एक दिन, गुरु वशिष्ठ, ने बताया कि- उसे मारा जा सकता है, यदि बच्चे अपने हाथों में लकड़ी के छोटे टुकड़े लेकर, शहर के बाहरी इलाके के पास चले जाएं और सूखी घास के साथ-साथ उनका ढेर लगाकर जला दे। फिर उसके चारों ओर परिक्रमा दे, नृत्य करे, ताली बजाए, गाना गाएं और ड्रम बजाए। फिर ऐसा ही किया गया। इस दिन को,एक उत्सव के रूप में मनाया गया, जो बुराई पर एक मासूम दिल की जीत का प्रतीक है।

होली का श्रीकृष्ण से गहरा रिश्ता है। जहां इस त्योहार को राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। वहीं,पौराणिक कथा के अनुसार जब कंस को श्रीकृष्ण के गोकुल में होने का पता चला तो उसने पूतना नामक राक्षसी को गोकुल में जन्म लेने वाले हर बच्चे को मारने के लिए भेजा। पूतना स्तनपान के बहाने शिशुओं को विषपान कराना था। लेकिन कृष्ण उसकी सच्चाई को समझ गए। उन्होंने दुग्धपान करते समय ही पूतना का वध कर दिया। कहा जाता है कि तभी से होली पर्व मनाने की मान्यता शुरू हुई।

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