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Christmas 2026 : आखिर कौन है ये सांता क्लॉज और क्रिसमस ट्री क्यों है जरूरी... यहां है आपके हर सवाल के जवाब

Christmas 2026 : तो फिर चलिए इस क्रिसमस हम आप लोगों के मन में उठने वाले ऐसे सभी सवालों का जवाब देने जा रहे हैं.

Christmas 2026 : आखिर कौन है ये सांता क्लॉज और क्रिसमस ट्री क्यों है जरूरी... यहां है आपके हर सवाल के जवाब
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By Meenu Tiwari

Christmas 2026 को लेकर लोग टिक-टिक घडी दो घडी इंतजार कर रहे हैं. क्रिसमस को लेकर शहर के मॉल से लेकर, सभी शॉप्स यहाँ तक बाजार भी सजे हुए हैं. स्कूलों में भी क्रिसमस को लेकर सेलिब्रेशन जारी है.


इन सबके बीच मन में ये सवाल हर किसी के उठता है की आखिर ये फेस्टिवल 25 दिसम्बर को ही क्यों मनाया जाता है. या फिर ये सांता अंकल कौन है... क्रिसमस ट्री का इस दिन से क्या कनेक्शन है. तो फिर चलिए इस क्रिसमस हम आप लोगों के मन में उठने वाले ऐसे सभी सवालों का जवाब देने जा रहे हैं.



इसलिए मनाया जाता है


क्रिसमस का त्योहार क्रिश्चन धर्म में हर वर्ष 25 दिसंबर को बनाया जाता है. क्रिसमस 25 दिसंबर को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि चौथी सदी में रोम के सम्राट कॉन्सटेंटाइन ने इस दिन को यीशु मसीह के जन्मदिवस के रूप में आधिकारिक मान्यता दी थी. जैसे कि 'सोल इन्विक्टस' का जन्मदिन. चर्च ने इन लोकप्रिय त्योहारों के साथ तालमेल बिठाने और उन्हें ईसाई रूप देने के लिए यीशु के जन्म का उत्सव इसी दिन तय किया, ताकि लोग बहुत ही आसानी से ईसाई धर्म अपना सकें. 350 ईस्वी के आसपास, पोप जूलियस प्रथम ने 25 दिसंबर को आधिकारिक तौर पर यीशु के जन्मदिन के रूप में चुना और इसे 'क्राइस्ट मास' कहा जाने लगा. बाइबिल के अनुसार, महादूत गेब्रियल ने वर्जिन मैरी को 25 मार्च को बताया था कि वह यीशु को जन्म देंगी. इस घोषणा से ठीक नौ महीने बाद की तारीख 25 दिसंबर आती है, जिससे इस दिन को जन्म का दिन मानना तार्किक माना गया.




तीसरी सदी के एक दयालु बिशप थे सांता


सांता क्लॉज संत निकोलस पर आधारित हैं, जो तीसरी सदी के एक दयालु बिशप थे. वे जरूरतमंदों को चुपके से उपहार देते थे, खासकर क्रिसमस के आसपास, जिससे उपहार देने की प्रथा शुरू हुई. और इसी दिन से सांता क्लॉज के गिफ्ट देने की परम्परा शुरू हुई.




क्रिश्चन समाज में है क्रिसमस ट्री का विशेष महत्व


क्रिसमस में यह पेड़ इस समाज के लिए विशेष महत्त्व रखता है. क्रिसमस ट्री पेड़ों का उपयोग जर्मनी में 400 साल पहले शुरू हुआ, और यह बुरी आत्माओं को दूर भगाने और स्वर्ग वृक्ष (ए एडम और ईव के पर्व से जुड़ा) का प्रतीक बन गया.

Meenu Tiwari

मीनू तिवारी 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और प्रिंट व डिजिटल मीडिया में अनुभव रखती हैं। उन्होंने हरिभूमि, पत्रिका, पेज 9 सहित क्लिपर 28, लल्लूराम, न्यूज टर्मिनल, बोल छत्तीसगढ़ और माई के कोरा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। वर्तमान में वे एनपीजी न्यूज में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं।

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