Vishwa ka sabse Lamba pul: ये है दुनिया का सबसे लंबा पुल; 2 घंटे तक चलते रहने पर भी खत्म नहीं होता, जानिए इस ब्रिज की हैरान कर देने वाली खासियतें!
Vishwa ka sabse Lamba pul: किसी भी देश को सुप्रसिद्ध और विकसित बनाने के लिए वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बहुत जरूरी होता है जिसमें इंजीनियर्स और आर्किटेक्ट की बहुत बड़ी भूमिका होती है। ऐसी ही एक बेहतरीन इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना चीन में स्थित है। वैसे तो चीन आए दिन लोगों को अपने अनोखे कारनामों से चौंकाते आया है, पर आज हम जिस चीज पर बात करने वाले हैं वह है दुनिया का सबसे लंबा पुल जिसे बनाने का गौरव चीन के पास है। इस ब्रिज का नाम है दानयांग-कुनशान ग्रांड ब्रिज(Danyang-Kunshan Grand Bridge)। आईए जानते हैं इस पुल की खास बातें।

Vishwa ka sabse Lamba pul: किसी भी देश को सुप्रसिद्ध और विकसित बनाने के लिए वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बहुत जरूरी होता है जिसमें इंजीनियर्स और आर्किटेक्ट की बहुत बड़ी भूमिका होती है। ऐसी ही एक बेहतरीन इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना चीन में स्थित है। वैसे तो चीन आए दिन लोगों को अपने अनोखे कारनामों से चौंकाते आया है, पर आज हम जिस चीज पर बात करने वाले हैं वह है दुनिया का सबसे लंबा पुल जिसे बनाने का गौरव चीन के पास है। इस ब्रिज का नाम है दानयांग-कुनशान ग्रांड ब्रिज(Danyang-Kunshan Grand Bridge)। आईए जानते हैं इस पुल की खास बातें।
दानयांग-कुनशान ग्रांड ब्रिज की खासियत
चीन के इस पुल का निर्माण जियांगसू प्रांत में किया गया है। यह पुल चीन के दो बड़े शहर नानजिंग को शंघाई से जोड़ती है और हाई स्पीड रेलवे लाइन का हिस्सा है। यह ब्रिज झीलों, नदियों, खेतों, पहाड़ों और समुद्रों से होकर गुजरती है। यांगचेंग झील के ऊपर से इस पुल के द्वारा गुजरना एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, जो करीब 9 किलोमीटर लंबी है। इस पुल में सफर करना किसी सुंदर जगह की ट्रिप में जाने जैसा है।
कितनी लंबी है यह पुल
बताया जाता है कि इस पुल की कुल लंबाई 164 किलोमीटर की है, जो इसे दुनिया का सबसे लंबा पुल बनाता है और इसे पार करने में लगभग दो से ढाई घंटे का समय आराम से लगता है। इस पुल की कुल औसत ऊंचाई 100 फीट है और साथ ही पहाड़ी इलाकों में 490 फीट तक भी बनाई गई है। इस पुल के बनते ही इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और आज तक इसकी कोई बराबरी नहीं कर पाया है।
कब तैयार हुआ था विश्व का सबसे लंबा पुल
चीन में इस पुल का निर्माण 18 अप्रैल सन 2006 में हाई स्पीड रेलवे योजना के तहत किया गया था। दस हजार से भी अधिक मजदूरों के अथक प्रयासों से 4 साल बाद यानी 15 नवंबर 2010 को इस पुल का कार्य पूरा किया गया और 2011 से जनता के लिए खोला गया। इस पुल का निर्माण चाइना रोड एंड ब्रिज कॉरपोरेशन के द्वारा किया गया है। इस पुल को बनाने का कुल खर्च लगभग 76 हजार करोड रुपए आया था। इस पुल को तैयार करने में हर प्रकार के सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया है, क्योंकि इसे पहाड़ों, खेतों, नदियों और झीलों से गुजारा गया है।
भूकंपरोधी है यह पुल
भूकंपरोधी यह पुल 8 मेग्नीट्यूड तक के झटकों को भी झेल सकता है। इसके लिए इसमें सीस्मिक आइसोलेटर्स इलास्टोमेरिक बेयरिंग्स और स्लाइडिंग प्लेट्स जैसे आधुनिक तकनीके लगाई गई है। इसके साथ ही समुद्र से गुजरने वाले हिस्सों को एयरोडायनेमिक और जंग प्रतिरोधी बनाया गया है। इतना ही नहीं इस पुल के लिए उपयोग किए गए पिलर्स 3 लाख टन के वजन को भी झेल सकते हैं। इस पुल के बन जाने के बाद चीन के महत्वपूर्ण शहर बीजिंग से शंघाई तक (लगभग 1000 किमी) मात्र 4 से 5 घंटे में ही पहुंचा जा सकता है। दानयांग-कुनशान ग्रांड ब्रिज को विश्व का सबसे लंबा पुल होने पर 2011 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी प्राप्त हुआ है।
