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Thrissur gold capital of india: ना दिल्ली, ना मुंबई—यह शहर है भारत की असली सोने की राजधानी, पूरे भारत की 30% ज्वेलरी इसी शहर में बनाई जाती है!

Thrissur gold capital of india: क्या आपने गोल्ड सिटी के बारे में सुना है। जी हां! भारत के इस शहर को सोने की राजधानी या सोने का शहर भी कहते हैं। यह कोई बड़ा महानगर नहीं है बल्कि केरल का ही एक छोटा सा शहर है। आईए जानते हैं भारत के गोल्ड कैपिटल कहे जाने वाले त्रिशूर(Thrissur) शहर के बारे में।

Thrissur gold capital of india: ना दिल्ली, ना मुंबई—यह शहर है भारत की असली सोने की राजधानी, पूरे भारत की 30% ज्वेलरी इसी शहर में बनाई जाती है!
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By Chirag Sahu

Thrissur gold capital of india: भारत देश में सोने को आर्थिक समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। वैसे तो इससे बने आभूषण काफी महंगे और महिलाओं को अतिप्रिय भी होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि भारत देश के किस शहर में सबसे ज्यादा सोने का कारोबार और निर्माण किया जाता है। भारत में अक्सर हमने पिंक सिटी या ब्लू सिटी जैसे नामो से कई शहरों को जाना है लेकिन क्या आपने गोल्ड सिटी के बारे में सुना है। जी हां! भारत के इस शहर को सोने की राजधानी या सोने का शहर भी कहते हैं। यह कोई बड़ा महानगर नहीं है बल्कि केरल का ही एक छोटा सा शहर है। आईए जानते हैं भारत के गोल्ड कैपिटल कहे जाने वाले त्रिशूर(Thrissur) शहर के बारे में।

त्रिशूर शहर को कहते हैं भारत की सोने की राजधानी

त्रिशूर शहर केरल राज्य में स्थित है, जिसे भारत का गोल्ड कैपिटल कहा जाता है। इस शहर के गोल्ड कैपिटल बनने के कई कारण है जैसे कि यहां सोने के आभूषणों का भारी मात्रा में निर्माण और थोक व्यापार होता है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में जितना भी सोने का व्यापार होता है उसमें से 30% आभूषण यही बनाए जाते हैं। इस शहर के लगभग आधे से अधिक व्यक्ति किसी न किसी रूप में सोने का व्यापार कर रहा है और उनके पास खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भी होती है।

सोने की राजधानी बनने का इतिहास

सोने को लेकर इतने समृद्ध होने के पीछे एक और कहानी बताई जाती है। लगभग 14वीं शताब्दी के आसपास रोमन और अरब के व्यापारी भारत आया करते थे और उनकी लंबी यात्राओं के दौरान वे त्रिशूर के पास कोडुंगालुर बंदरगाह पर रुकते थे, जिससे यहां के स्थानीय लोगों को इनकी शिल्प कला और अन्य कारीगरी सीखने को मिली। समय के साथ यहां व्यापार कम होने लगा लेकिन यहां के लोग सोने के आभूषणों पर कारीगरी करने में महारत हासिल कर चुके थे।

जिस वजह से आज भी यहां निर्मित सोने के विभिन्न आभूषणों को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जाता है। इसके साथ ही 18वीं शताब्दी में यहां के राजा शक्तन थम्पूरन ने अपनी पुरानी राजधानी बदलकर त्रिशूल को अपनी राजधानी बनाई और सीरिया देश के कुछ ईसाइयों को यहां व्यापार के लिए आमंत्रित किया और ये लोग काफी कुशल व्यापारी थे जिन्होंने यहां सोने का व्यापार अधिक मात्रा में किया।

1991 में यहां तेज हुआ गोल्ड बिजनेस

1991 में सोने के आयात–निर्यात को लेकर कई नियमो में बदलाव किए गए और कई प्रकार के प्रतिबंध भी हटाए गए। गोल्ड कंट्रोल एक्ट में बदलाव होने से लोग आसानी से विदेशो में भी सोना ले जा सकते थे। इस बदलाव का फायदा त्रिशूर को सबसे ज्यादा हुआ। यही कारण है कि भारत की सबसे बड़ी गोल्ड बिजनेस कंपनी जैसे– कल्याण ज्वेलर्स, मालाबार ज्वैलर्स और जॉय अलुकस ज्वेलर्स यही त्रिशूर से ही आते है और इस वजह से यह शहर गोल्ड कैपिटल ऑफ़ इंडिया कहलाया।

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