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Sindhu jal sandhi kya hai: सिंधु जल समझौता क्या है? जानिए भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद की पूरी कहानी।

Sindhu jal sandhi kya hai: भारत का अपने पड़ोसे देशों जैसे– पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के साथ आज भी किसी न किसी वजह से विवाद बना हुआ है और इन विवादों को सुलझाने के लिए कई संधियां भी हुए हैं, इन्हीं में से एक है सिंधु जल समझौता। आईए जानते हैं की यह संधि क्या है और किन दो देशों के बीच हुई थी।

Sindhu jal sandhi kya hai: सिंधु जल समझौता क्या है? जानिए भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद की पूरी कहानी।
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By Anjali Vaishnav

Sindhu jal sandhi kya hai: महान गुरु और प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ चाणक्य की एक बात आज भी सच साबित होती है की दो आपस के पड़ोसी देशों में कभी भी मित्रता नहीं हो सकती। उनमें हमेशा किसी न किसी बात को लेकर विवाद बना ही रहेगा और इन विवादों को सुलझाने के लिए वे कई प्रकार की संधियां भी करेंगे। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह बात सच भी है कि भारत का अपने पड़ोसे देशों जैसे– पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन के साथ आज भी किसी न किसी वजह से विवाद बना हुआ है और इन विवादों को सुलझाने के लिए कई संधियां भी हुए हैं, इन्हीं में से एक है सिंधु जल समझौता। आईए जानते हैं की यह संधि क्या है और किन दो देशों के बीच हुई थी।

सिंधु जल संधि क्या है? (What is the Indus Water Treaty?)

सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के बंटवारे से जुड़ी हुई है। 1947 में जब भारत और पाकिस्तान अलग हुए, तो पर भी दोनों देशों की नदियां एक दूसरे से जुड़ी हुई थी। यह समझौता मुख्य रूप से सिंधु नदी प्रणाली की 6 नदियों आधारित है जिसमें सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलज नदी शामिल है। इन सभी नदियों का अधिकतर हिस्सा भारत से होकर गुजरता है ऐसे में पाकिस्तान को यह डर था कि भारत ऊपर से पानी रोककर पाकिस्तान की जलपूर्ति में बाधा न डाल दे और हुआ भी कुछ ऐसा ही जब 1 अप्रैल 1948 को भारत ने पाकिस्तान में जाने वाली नदियों को अस्थाई रूप से बंद कर दिया, ताकि इस पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सके कि कौनसी नदी पर किस देश का अधिकार है।

नदियों को रोके जाने पर पाकिस्तान ने अपनी आपत्ति जताई और इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया। फिर दोनों देशों के बीच के इस विवाद को सुलझाने के लिए विश्व बैंक (World Bank) ने मध्यस्थता की और कई वर्षों तक इस पर चर्चाएं हुई। अंततः 19 सितंबर 1960 को पाकिस्तान के कराची शहर में भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ जिसमें तीसरे पक्ष के रूप में विश्व बैंक के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सिंधु जल समझौते के प्रमुख बिंदु

  • इस समझौते में यह तय हुआ कि भारत को पूर्वी नदियां मिलेंगी जिनमें रावी, ब्यास और सतलज नदी शामिल है और भारत को इन नदियों के उपयोग का पूरा अधिकार है। जिसके तहत भारत इन नदियों में बांध बनाना, सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसी चीजे कर सकता है।
  • पाकिस्तान को पश्चिमी नदियां मिली जिसमें सिंधु, झेलम और चिनाब नदी शामिल थी। भारत को इन नदियों पर बिजली और किसी भी प्रकार की सिंचाई परियोजना आदि को सीमित मात्रा में ही करने पर सहमति बनी।
  • इन नदियों पर किसी भी प्रकार की परियोजना शुरू करने से पहले एक दूसरे देशों को अवगत कराना बहुत जरूरी है। यदि अन्य कोई विवाद की स्थिति पैदा हो तो विश्व बैंक की सहायता ली जा सकती है।

संधि को किया गया समाप्त

कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा 22 अप्रैल 2025 को किए पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने अपने आप को इस समझौते से अलग कर लिया है। भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान ने भी शिमला समझौते को स्थगित कर दिया जो भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच 2 जुलाई 1972 में हुई थी। शिमला समझौते में दो शर्तों को मंजूरी दी गई थी– (1) भारत और पाकिस्तान के विवादों के बीच कोई तीसरा हस्तक्षेप नहीं करेगा। (2) कश्मीर को लेकर चल रहे विवादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नहीं उठाया जाएगा।

Anjali Vaishnav

अंजली वैष्णव मैंने छत्तीसगढ़ के कल्याण कॉलेज भिलाई से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म करने के बाद रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में M.sc Electronic Media की पढ़ाई की. इस दौरान मैने 2021 से TCP News, फिर TV 24 MPCG में बतौर कंटेट राइटर और बुलेटिन प्रोड्यूसर का कार्य किया, वर्तमान में मैं NPG.NEWS में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं, कंटेंट राइटिंग के साथ मुझे रिपोर्टिंग करना पसंद है.

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