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Shaadi me dulha sirf Ghodi hi kyon chadhta hai: भारतीय शादीयों में दूल्हा सिर्फ घोड़ी ही क्यों चढ़ता है अन्य जानवर क्यों नहीं? जानिए इसके पीछे का रहस्य

Shaadi me dulha sirf Ghodi hi kyon chadhta hai: शादी में एंट्री के लिए घोड़ी पर चढ़कर जाने की परंपरा ही अपनाई जाती है। विवाह के दौरान की जाने वाली यह परंपरा सदियों पुरानी है जो आज भी चली आ रही है। चलिए जानते हैं कि घोड़े पर चढ़कर बारात जाने की प्रथा कब और कहां से शुरू हुई।

Shaadi me dulha sirf Ghodi hi kyon chadhta hai: भारतीय शादीयों में दूल्हा सिर्फ घोड़ी ही क्यों चढ़ता है अन्य जानवर क्यों नहीं? जानिए इसके पीछे का रहस्य
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Chirag Sahu

Shaadi me dulha sirf Ghodi hi kyon chadhta hai: अधिकतर शादियों में आपने देखा होगा की बारात के दौरान दूल्हा हमेशा घोड़ी पर ही सवार होकर आता है लेकिन सवाल ये है कि कोई भी दूल्हा घोड़ी पर ही क्यों सवार होता है घोड़े या फिर अन्य जानवर पर क्यों नहीं? कई लोग तो बारात जाने के लिए बड़ी-बड़ी गाड़ियां यहां तक की हवाई जहाज भी बुक कर लेते हैं लेकिन शादी में एंट्री के लिए घोड़ी पर चढ़कर जाने की परंपरा ही अपनाई जाती है। विवाह के दौरान की जाने वाली यह परंपरा सदियों पुरानी है जो आज भी चली आ रही है। चलिए जानते हैं कि घोड़े पर चढ़कर बारात जाने की प्रथा कब और कहां से शुरू हुई।

प्राचीन राजवंशों ने शुरू की यह प्रथा

शादियों में घोड़ी चढ़ने की परंपरा भारत के क्षेत्रीय राजवंशों से ही मानी जाती है। पुराने राजा महाराजा जब शादी किया करते थे तो घोड़ी पर ही अपनी पत्नी को लेने जाते थे। उनका मानना था की शादी के दौरान घोड़ी की सवारी वीरता और साहस का प्रतीक है। पहले के समय में किसी सुंदर कन्या से शादियों के लिए युद्ध जैसी स्थिति निर्मित हो जाती थी और उस समय प्रमुख साधन घोड़े ही हुआ करते थे।

ऐसे में जो योद्धा उस कन्या से शादी करता था वह घोड़ी पर सवार होकर अपने साहस और पराक्रम का परिचय देता था। यही प्रथा आज भी चली आ रही है। इतिहास में आपको ऐसे अनेकों उदाहरण मिल जाएंगे जहां एक कन्या के लिए हजारों तलवारे उठ गई थी। जैसे– श्री राम और माता सीता का विवाह, श्री कृष्णा और रुक्मणी का विवाह, अर्जुन और द्रौपदी का विवाह।

शादी में दूल्हा सिर्फ घोड़ी ही क्यों चढ़ता है?

शादी के लिए घोड़े या फिर अन्य जानवर की जगह घोड़ी का ही चयन करना यह दिखाता है कि दूल्हे के अंदर पुरुषत्व और नारीत्व दोनों में संतुलन बनाने की क्षमता विकसित हो चुकी है। घोड़ी की सवारी के दौरान पुरुष यह संदेश देता है कि वह अब वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के आदर्शों का पालन करने में सक्षम है। घोड़ी को संभालना काफी कठिन और मुश्किल काम होता है ऐसे में यदि दूल्हा घोड़ी की सवारी सफलतापूर्वक करता है तो यह दर्शाता है कि दूल्हा अब जीवन में आने वाली सभी समस्याओं का सामना करने में सक्षम है। साथ ही घोड़ी को सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है जिस वजह से हर दुल्हे को घोड़ी चढ़ना पसंद है।

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