पुरुष बनते हैं महिलाएं और करते हैं रहस्यमयी कयांग नृत्य; जानिए हिमाचल के अनोखे राउलेन फेस्टिव के बारे में

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Raulane Festival Himachal Pradesh: जब भी संस्कृति में विविधता की बात आती है तो भारत का नाम सबसे पहले नंबर पर आता है। भारत की खूबसूरती ही यही है कि यहां अनेक प्रकार के धर्म, त्यौहार, रीति रिवाज और खान-पान आदि मौजूद है। जिस तरह से बिहार में छठ और पंजाब में बैसाखी प्रमुख त्योहार हैं इसी तरह हिमाचल में भी एक ऐसा त्यौहार मनाया जाता है जिसे देखकर आप जरूर चौंक जाएंगे। इस त्यौहार के दौरान पुरुष, महिलाओं की तरह सजते हैं, अनोखे नृत्य करते हैं और अजीब पोशाक और चेहरे पर मुखौटे भी पहनते हैं। हम बात कर रहे हैं राउलेन फेस्टिवल (Raulane Festival) की; चलिए जानते हैं इस त्यौहार के बारे में।
क्या होता है राउलेन फेस्टिवल
हिमाचल की ठंडी वादियों में मनाया जाने वाला यह Raulane Festival यहां का सबसे अनोखा त्यौहार है। इस त्यौहार में पुरुष अलग-अलग प्रकार के मुखौटे पहनते हैं साथ ही लोकगीतों में डांस भी किया जाता है। यह त्यौहार मुख्यतः हिमाचल के किन्नौर जिले में मनाया जाता है। पुरुषों का इस तरह से तैयार होकर नृत्य करना परियों के विदाई के लिए किया जाता है। यहां के लोगों के लिए यह त्यौहार इतना खास है कि हजारो लाखों की संख्या में लोग भाग लेते हैं
क्यों मनाया जाता है राउलेन फेस्टिवल
यह त्यौहार वसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे एक स्थानीय मान्यता बताई जाती है कि ठंड के समय इस इलाके में अदृश्य शक्तियां और परियों का निवास होता हैं जो लोगों को ठंड से बचाती हैं और जब भी ठंड का मौसम गुजरता है तो यहां के लोग इन अदृश्य शक्तियों को विदाई देने के लिए यह उत्सव मनाते हैं। साथ ही प्रकृति और उन देवताओं को भी धन्यवाद दिया जाता है जिन्होंने ठंड से लोगों की रक्षा की है। आमतौर पर यह उत्सव होली के बाद 5 से 7 दिनों के लिए मनाया जाता है। लोग इस दौरान नाटक और लोक नृत्य भी करते हैं।
राउलेन फेस्टिवल में लोगों द्वारा क्या पहना जाता है?
इस त्यौहार को मनाने के लिए तीन तरह के पात्र तैयार किए जाते हैं।
1. रावला– इसका मतलब होता है साधु। रावला वह व्यक्ति होता है जो इस पूरे त्यौहार के दौरान लोक नृत्य करते है व जुलूस आदि निकालते हैं। जो भी पुरुष रावला बनता है उसके फेस को गाची नामक कपड़े से पूरी तरह ढंक देते हैं और एक चाकू की तरह दिखने वाला रकस पकड़ाया जाता है। लोगों का मानना है कि इस त्यौहार के दौरान परियां यही मौजूद होती हैं इसलिए शरीर का कोई भी हिस्सा बाहर नहीं दिखना चाहिए। इसके साथ ही रावला लोक नृत्य करते हुए होली के रंगों की तरह लोगों पर आटे या फिर सत्तू भी फेंकते हैं।
2. रावलानी– रावला के ही फीमेल वर्जन को रावलानी कहते है। रावलानी बनने के दौरान कंधों पर एक साल, कमर पर बेल्ट और चांदी के आभूषण पहनकर सिर को पूरी तरह ढका जाता है। यह परंपरा लगभग 5000 सालों से चली आ रही है।
3. जंत पंदलु– इस त्यौहार को पूरा करने में इस पात्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये भी सफेद रंग के चमकीले कपड़ों से अपने चेहरे को ढकते हैं और लोगों का मनोरंजन करते हैं और यहां के लोक नृत्य कयांग(kayang) की प्रस्तुति भी देते हैं।
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