Phobia kya hota hai: क्या आपको भी ऊंचाई, पानी या भीड़ से लगता है डर? तो आप भी हैं फोबिया के शिकार! जानिए इसके लक्षण और निदान के उपाय
Phobia kya hota hai: आइए समझते हैं कि फोबिया क्या होता है और इससे किस प्रकार बचा जाए।

Phobia kya hota hai: आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपको यदि कोई कमरे में बंद कर दे तो बेचैनी या भय का एहसास होता है या फिर ऊंचाई से नीचे की ओर देखने पर डर लगता है तो ऐसी स्थिति में आप किसी फोबिया का शिकार है। यह मनोवैज्ञानिक स्थिति बड़े से बड़े मजबूत आदमी के भी रोंगटे खड़े कर देती है। इसे एक तरह का एंजायटी डिसऑर्डर कह सकते हैं, जो आम जिंदगी में लगने वाले डर से बिल्कुल अलग होता है। इसमें कई बार व्यक्ति की सांस फूलना, बेचैनी, चक्कर और पसीने आना जैसी समस्याएं होने लगते हैं। आइए समझते हैं कि फोबिया क्या होता है और इससे किस प्रकार बचा जाए।
फोबिया किसे कहते हैं?
कई बार डरावनी कहानियां और अंधेरों से जिस प्रकार का डर हमें लगता है, ये काफी सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया होती है लेकिन जब यही डर हमारे दिमाग पर हावी हो जाता है, तो यही फोबिया की स्थिती कहलाती है। जैसे कि किसी इंसान को पता होते हुए भी की लिफ्ट सुरक्षित और सरल माध्यम होता है ऊपर जाने का लेकिन फिर भी वह गिरने के डर से सीढ़ियों का उपयोग करता है। यही फोबिया की सबसे बड़ी खासियत होती है कि व्यक्ति को इसका अंदाजा होते हुए भी अपने आप पर काबू नहीं कर पाता।
जानिए फोबिया के अलग-अलग प्रकार
वैसे तो दुनिया में 100 से भी अधिक प्रकार के फोबिया पाए जाते हैं लेकिन कुछ फोबिया है जो काफी सामान्य है।
1. एक्रोफोबिया/Acrophobia
यह फोबिया उन लोगों को अधिक परेशान करती है जो ऊंचाइयों से काफी डरते हैं। इन्हें लंबी सीढ़ियों के और बालकनियों से नीचे देखने पर भी पसीने आने लगते हैं। यहां तक कि इन्हें हवाई जहाज में बैठने पर भी गिरने का डर रहता है।
2. एक्वाफोबिया/Aquaphobia
यह पानी से जुड़ा हुआ डर है, जिसमें व्यक्ति को डूब जाने का खतरा हर समय बना रहता है। इस फोबिया के वजह से व्यक्ति का स्विमिंग पूल या तालाब में नहाते वक्त सांस फूलना और हृदय की गति का बढ़ना जैसी क्रियाएं होती है। जिस वजह से ऐसे लोग गहरे पानी के पास में भी जाने से डरते हैं।
3. क्लॉस्ट्रोफोबिया/Claustrophobia
अधिकतर लोगों को इस फोबिया का शिकार होते हुए देखा जा सकता है इसमें व्यक्ति को किसी छोटी जगह पर बंद कर देने पर उसे घुटन महसूस होने लगती है। यहां तक की लिफ्ट में भी जाने और किसी भीड़ वाली जगह पर फंस जाने पर भी उसे ऐसा महसूस होता है कि वह कुछ देर में मरने वाला है। इस स्थिति में व्यक्ति को पैनिक अटैक और सांस फूलने की समस्या हो जाती है।
4. एस्ट्राफोबिया/Astraphobia
यह फोबिया बच्चों में अधिक लेकिन वयस्कों में भी देखा जाता है। इसमें होता यह है कि जब भी बादलों में बिजली चमकती है और वह जोर से गरजते हैं तो इसे लोग काफी घबरा जाते है और इनके लिए घर से निकलना भी बहुत मुश्किल हो जाता है।
5. सोशलफोबिया/Socialphobia
यह मानसिक डर लोगों को हमेशा शांत और अकेले रहने पर जोड़ देता है। इसमें व्यक्ति किसी भी प्रकार के कार्यक्रम और और भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से डरता है और हर वक्त यही सोचता है कि लोग उसे ही घूर रहे हैं और जज कर रहे हैं।
6. ग्लासोफोबिया/Glassophobia
ऐसे लोग जो किसी सार्वजनिक मंच पर बोल नहीं पाते और पैनिक कर जाते हैं तो कहा जा सकता है कि उन्हें ग्लासोफोबिया है। इस स्थिति में लोगों को किसी मीटिंग में बोलना, प्रेजेंटेशन देना या भाषण देने में भी काफी डर लगता है।
7. ऑटोमेटोनोफोबिया/Automatonophobia
इसमें इंसान किसी पुतले, कठपुतली या मानव जैसे दिखने वाले रोबोट से भी डरने लगता है। इस स्थिति को अनकैनी वैली इफेक्ट से जोड़ा जाता है जिसमें व्यक्ति हुबहू इंसान जैसी दिखने वाली निर्जीव चीजों से भी डर महसूस करता है।
8. मेगालोफोबिया/Megalophobia
यह खास तरह का एंजायटी डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति को किसी बड़ी-बड़ी चीजों को देखकर घबराहट महसूस होती है। जैसे– कोई बड़ी इमारत, जानवर, गाड़िया, हवाई जहाज। इस फोबिया के शिकार लोगों को यह लगता है कि ये सारी बड़ी चीजे उन्हें कुचल कर मार डालेंगी।
फोबिया से छुटकारा कैसे पाएं
फोबिया के पीछे का सबसे बड़ा कारण होता है बचपन में हुए हमारे बुरे अनुभव, जो हमारे बड़े होने तक हमारे साथ बने रहते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई वयस्क व्यक्ति को बंद कमरे में अकेले छोड़ देने पर उसे बेचैनी होती है तो इसका मतलब यह है की बचपन में उसने इसी तरह की कोई मुसीबत झेली हुई है और कई बार यह अनुवांशिक भी हो सकता है।
फोबिया से बचने का सबसे सरल उपाय है कि इसे जितना हो सके अपने पास लाने की कोशिश करें। अगर आप इससे भागेंगे तो यह आपको और डरता रहेगा। इस थेरेपी के लिए आपको सबसे पहले उस फोबिया के बारे में सोचना है और फिर उसे धीरे-धीरे अपने नियंत्रण में लाने की कोशिश करना है और लगातार अपने दिमाग को यह बताना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है। इसमें किसी प्रकार कीे कोई डरावनी चीज नहीं है। इससे आप देखेंगे की आपका डर धीरे-धीरे कम होने लगा है।
